झांसी से सटे मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले के पृथ्वीपुर थाना क्षेत्र के अतर्रा गांव में 18 वर्षीय युवती ने जहरीला पदार्थ निगलकर आत्महत्या कर ली। परिजन गंभीर हालत में उसे झांसी मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां रातभर चले इलाज के बावजूद बुधवार सुबह उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है। भोपाल में रहकर कर रही थी पढ़ाई अतर्रा गांव निवासी कमलेश अहिरवार की इकलौती बेटी मोहिनी कक्षा 10 की छात्रा थी। वह भोपाल में अपने चाचा के पास रहकर पढ़ाई कर रही थी, जबकि माता-पिता दिल्ली में काम करते हैं। करीब दस दिन पहले वह भोपाल से गांव आई थी और अपनी दादी के साथ रह रही थी। खेत के कमरे में मिली दवा की बदबू मृतका की दादी मिथिला अहिरवार ने बताया कि मंगलवार शाम वह खेत पर काम कर रही थीं। मोहिनी भी उनके साथ थी और खेत पर बने कमरे में मौजूद थी। जब दादी कमरे में पहुंचीं तो उन्हें दवा जैसी बदबू महसूस हुई। पूछने पर मोहिनी ने बात को टाल दिया। कुछ ही देर बाद जब मोहिनी को उल्टियां होने लगीं तो आसपास के लोगों को बुलाया गया और उसे तुरंत स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। हालत बिगड़ने पर झांसी किया गया रेफर स्थानीय अस्पताल में डॉक्टरों ने मोहिनी की हालत गंभीर बताकर उसे झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। यहां पूरी रात इलाज चला, लेकिन बुधवार सुबह उसने दम तोड़ दिया। सूचना मिलने पर पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। दादी ने भूत-प्रेत को मौत की वजह बताया मोहिनी की मौत की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सकी है। हालांकि उसकी दादी मिथिला अहिरवार ने इसे ऊपरी चक्कर बताया है। उनका कहना है कि कुछ महीने पहले गांव की ही एक युवती ने खेत के कुएं के पास जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी। मोहिनी अक्सर उसी कुएं के पास जाया करती थी। दादी का आरोप है कि उसी युवती की आत्मा ने मोहिनी को बहकाकर यह कदम उठाने पर मजबूर किया। आज जाना था शादी के लिए लड़का देखने परिजनों के अनुसार, मोहिनी परिवार में इकलौती बेटी थी और सभी की लाडली थी। उसकी शादी को लेकर बातचीत चल रही थी। बुधवार को ही परिवार को ललितपुर के महरौनी में लड़का देखने जाना था। लेकिन उससे पहले ही मोहिनी की मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया। मां बेटी का शव देखकर मेडिकल कॉलेज में बेहोश हो गईं।


