प्रधानमंत्री की कुर्सी से कैदी तक: इस देश के पूर्व PM को किस लिए मिली 23 साल की सजा? दुनिया भर में मची खलबली!

प्रधानमंत्री की कुर्सी से कैदी तक: इस देश के पूर्व PM को किस लिए मिली 23 साल की सजा? दुनिया भर में मची खलबली!

South Korea Martial Law: दक्षिण कोरिया की राजनीति में भूचाल लाने वाले मार्शल लॉ मामले में स्थानीय अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। ‘सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट’ ने पूर्व प्रधानमंत्री हान डक-सू को विद्रोह में अहम भूमिका निभाने के लिए 23 साल की जेल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने माना कि हान ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल द्वारा 3 दिसंबर 2024 को लगाए गए मार्शल लॉ को लागू कराने में अहम भूमिका निभाई। अदालत का यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश पहले ही लोकतंत्र पर हमले को लेकर गहरे आक्रोश से गुजर चुका है।

क्या था मार्शल लॉ विवाद?

3 दिसंबर 2024 को तत्कालीन राष्ट्रपति यून सुक योल ने अचानक देश में मार्शल लॉ लागू कर दिया था। सरकार ने इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया, लेकिन कुछ ही घंटों में देशभर में विरोध शुरू हो गया। सरकार को ‘नेशनल असेंबली’ में वोटिंग के बाद सिर्फ छह घंटे में यह फैसला वापस लेना पड़ा। आरोप है कि इस दौरान सरकार ने मीडिया की आवाज दबाने, प्रशासनिक ताकत का दुरुपयोग करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश की। मार्शल लॉ के इस फैसले को अदालत ने “विद्रोह” कहा।

पूर्व PM हान को क्यों मिली 23 साल की सजा?

कोर्ट के मुताबिक, पूर्व PM हान डक-सू ने मार्शल लॉ से पहले कैबिनेट मीटिंग बुलाने का सुझाव दिया था और बैठक के दौरान इसका विरोध नहीं किया। अदालत ने यह भी माना कि हान ने मीडिया संस्थानों की बिजली-पानी काटने जैसे आदेशों को लागू करने में भूमिका निभाई। जज ने कहा कि एक प्रधानमंत्री के तौर पर हान का कर्तव्य था कि वह संविधान की रक्षा करें, लेकिन उन्होंने इसके बजाय सत्ता के दुरुपयोग में साथ दिया। अदालत ने सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए हान को तुरंत हिरासत में लेने का आदेश दिया।

पूर्व राष्ट्रपति को मिली 5 साल की सजा

इस पूरे मामले का असर पूर्व राष्ट्रपति यूं सुक-योल पर भी पड़ा है। शुक्रवार को एक अलग फैसले में अदालत ने उन्हें 5 साल की जेल की सजा सुनाई। यह उनके खिलाफ चल रहे आठ आपराधिक मामलों में पहला फैसला है। मार्शल लॉ के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके चलते यून पर महाभियोग लगाया गया, उन्हें गिरफ्तार किया गया और राष्ट्रपति पद से हटा दिया गया। अभियोजन पक्ष (Prosecution) ने उनके लिए मौत की सजा तक की मांग की थी, जबकि विद्रोह से जुड़े मामले में अंतिम फैसला 19 फरवरी को आना है।

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