गयाजी में नगर निगम की वार्ड संख्या 34 की निर्वाचित पार्षद शीला देवी को सरकारी रिकॉर्ड में अब मृत घोषित कर दिया गया है। शीला देवी न सिर्फ जीवित हैं, बल्कि वर्तमान में वार्ड पार्षद के रूप में सक्रिय रूप से अब भी काम भी कर रही हैं। खुलासा तब हुआ जब जब पार्षद शीला देवी मंगलवार को ई-केवाईसी कराने के लिए एक साइबर कैफे पहुंचीं। वहां कैफे के ऑपरेटर ने जब सरकारी पोर्टल चेक किया तो बताया कि रिकॉर्ड में उनका नाम तो मृत दर्शाया जा रहा है। अब कुछ भी यहां से नहीं हो सकता है। यह सुनते ही शीला देवी सन्न रह गईं। उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि सरकारी दस्तावेजों में उन्हें मृत बताया जा रहा है जबकि मैं तो अभी भी जीवित हूं। पार्षद कहती हैं कि जब मैं खुद चुनाव जीतकर वार्ड पार्षद बनी हुईं हूं। अपने क्षेत्र की जनता की समस्याएं सुन रही। नगर निगम की बैठकों में हिस्सा ले रही हूं, तो फिर सरकारी सिस्टम में मृत कैसे दिखाया जा सकता है। किस आधार पर सरकारी दस्तावेज में मृत दर्शाया गया। विधवा पेंशन बंद होने की चिंता शीला देवी ने बताया कि मैं पिछले 15 साल से विधवा पेंशन का लाभ ले रही हूं। ई-केवाईसी के दौरान इस तरह की जानकारी सामने आने से उनकी पेंशन के ऊपर संकट मंडराने लगे हैं। डर है कि कहीं पेंशन के लाभ से वंचित न कर दिया जाए। पार्षद ने डीएम से शिकायत की पार्षद शीला देवी ने डीएम को लिखित शिकायत सौंपी है। उन्होंने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और जल्द से जल्द रिकॉर्ड में सुधार किया जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि इतनी बड़ी गलती किस स्तर पर हुई। इस घटना ने सरकारी पोर्टल और ई-केवाईसी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनप्रतिनिधि के साथ ऐसी चूक होना सिस्टम की गंभीर कमजोरी को उजागर करता है। गैरजिम्मेदाराना हरकत परेशानी हुई है पार्षद के बेटे ओम यादव का कहना है कि जिंदा शख्स को सरकारी दस्तावेज में मृत करार देना किसी के लिए असहज कर देने वाली घटना है। सरकारी कर्मचारियों की इस तरह की गैरजिम्मेदाराना हरकत से न केवल परेशानी बढ़ी है बल्कि मानसिक आघात भी पहुंचा है। अब अपनी मां के जीवित होने का प्रमाण बनवाने के लिए हमें सरकारी सिस्टम से संघर्ष करना होगा। गयाजी में नगर निगम की वार्ड संख्या 34 की निर्वाचित पार्षद शीला देवी को सरकारी रिकॉर्ड में अब मृत घोषित कर दिया गया है। शीला देवी न सिर्फ जीवित हैं, बल्कि वर्तमान में वार्ड पार्षद के रूप में सक्रिय रूप से अब भी काम भी कर रही हैं। खुलासा तब हुआ जब जब पार्षद शीला देवी मंगलवार को ई-केवाईसी कराने के लिए एक साइबर कैफे पहुंचीं। वहां कैफे के ऑपरेटर ने जब सरकारी पोर्टल चेक किया तो बताया कि रिकॉर्ड में उनका नाम तो मृत दर्शाया जा रहा है। अब कुछ भी यहां से नहीं हो सकता है। यह सुनते ही शीला देवी सन्न रह गईं। उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि सरकारी दस्तावेजों में उन्हें मृत बताया जा रहा है जबकि मैं तो अभी भी जीवित हूं। पार्षद कहती हैं कि जब मैं खुद चुनाव जीतकर वार्ड पार्षद बनी हुईं हूं। अपने क्षेत्र की जनता की समस्याएं सुन रही। नगर निगम की बैठकों में हिस्सा ले रही हूं, तो फिर सरकारी सिस्टम में मृत कैसे दिखाया जा सकता है। किस आधार पर सरकारी दस्तावेज में मृत दर्शाया गया। विधवा पेंशन बंद होने की चिंता शीला देवी ने बताया कि मैं पिछले 15 साल से विधवा पेंशन का लाभ ले रही हूं। ई-केवाईसी के दौरान इस तरह की जानकारी सामने आने से उनकी पेंशन के ऊपर संकट मंडराने लगे हैं। डर है कि कहीं पेंशन के लाभ से वंचित न कर दिया जाए। पार्षद ने डीएम से शिकायत की पार्षद शीला देवी ने डीएम को लिखित शिकायत सौंपी है। उन्होंने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और जल्द से जल्द रिकॉर्ड में सुधार किया जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि इतनी बड़ी गलती किस स्तर पर हुई। इस घटना ने सरकारी पोर्टल और ई-केवाईसी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनप्रतिनिधि के साथ ऐसी चूक होना सिस्टम की गंभीर कमजोरी को उजागर करता है। गैरजिम्मेदाराना हरकत परेशानी हुई है पार्षद के बेटे ओम यादव का कहना है कि जिंदा शख्स को सरकारी दस्तावेज में मृत करार देना किसी के लिए असहज कर देने वाली घटना है। सरकारी कर्मचारियों की इस तरह की गैरजिम्मेदाराना हरकत से न केवल परेशानी बढ़ी है बल्कि मानसिक आघात भी पहुंचा है। अब अपनी मां के जीवित होने का प्रमाण बनवाने के लिए हमें सरकारी सिस्टम से संघर्ष करना होगा।


