सत्संग और भक्ति के माध्यम से मिलती है मुक्ति

सत्संग और भक्ति के माध्यम से मिलती है मुक्ति

भास्कर संवाददाता| सीहोर शहर के प्राचीन इंदौर नाका स्थित श्री सिद्ध बटेश्वर महादेव मंदिर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और ज्ञान का संगम देखने को मिला। कथा में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरा वातावरण राधे-राधे और जय श्रीकृष्ण के संकीर्तन से गूंज उठा। मंगलवार को कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। इस अवसर पर कथावाचक पंडित चेतन उपाध्याय ने धुंधकारी चरित्र और उसके अंत की दिव्य कथा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार धुंधकारी ने पाप कर्मों का मार्ग त्यागकर सत्संग और भक्ति के माध्यम से मुक्ति प्राप्त की, उसी प्रकार मनुष्य को भी सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर भगवान में एकाग्रता स्थापित करनी चाहिए। इस बात पर जोर दिया कि धुंधकारी का उद्धार गोकर्ण के माध्यम से हुआ, जो यह दर्शाता है कि भागवत श्रवण से जीव का कल्याण संभव है। भगवान के पवित्र नाम का श्रवण, कीर्तन और जप सभी पाप कर्मों को नष्ट करने का सबसे सरल और सीधा उपाय है। जब हम सब कुछ ईश्वर को समर्पित कर देते हैं, तो कर्म बंधन से मुक्ति मिलती है। भगवान की भक्ति के बिना मनुष्य का जीवन व्यर्थ : मंगलवार को पंडित उपाध्याय ने कहा कि भगवान की भक्ति के बिना मनुष्य का जीवन व्यर्थ है। मनुष्य को अहंकार को त्यागकर भक्ति का मार्ग अपनाकर जपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए। भगवान की भक्ति करने से ही मनुष्य का कल्याण संभव है। ईश्वर-मुखी आत्माओं में जहां सूक्ष्म बुद्धि का विकास होता है और वे सांसारिक परिस्थितियों को साफ-साफ देखने लगते हैं। वहां उनमें सर्वात्म-भाव भी जागृत होता है।

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