मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका की बाढ़ को देखते हुए गंभीर रुख अपनाया है। उन्होंने मंगलवार को राज्य के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को अपने विवेक से जमानत संबंधी मामलों का निपटारा करने का निर्देश दिया। उनके साथ न्यायमूर्ति प्रभात कुमार सिंह, नवनीत कुमार पांडेय, सत्यव्रत वर्मा, राजेश कुमार वर्मा, चंद्रशेखर झा और आरपी मिश्रा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि तीन से सात साल की सजा के मामले में भी निचली अदालत से अग्रिम या नियमित जमानत नहीं दी जाती है, जिसके कारण हाईकोर्ट में याचिकाओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। हाईकोर्ट का अधिकांश समय उनके निपटारे में ही निकल जाता है। हाईकोर्ट के समक्ष अनेक महत्वपूर्ण मामले सुनवाई के लिए लंबित हैं। उपयोगिता प्रमाणपत्र मामले में जानकारी मांगी हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा कथित रूप से बड़े पैमाने पर उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा नहीं किए जाने के मामले में राज्य सरकार से जानकारी मांगी है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू और न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह की खंडपीठ ने किशोर कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। मामले पर दो माह बाद फिर सुनवाई होगी। याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार के विभिन्न विभागों ने 49,649 उपयोगिता प्रमाणपत्र नहीं जमा किया है, जो लगभग 70 हजार करोड़ के हैं। मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका की बाढ़ को देखते हुए गंभीर रुख अपनाया है। उन्होंने मंगलवार को राज्य के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को अपने विवेक से जमानत संबंधी मामलों का निपटारा करने का निर्देश दिया। उनके साथ न्यायमूर्ति प्रभात कुमार सिंह, नवनीत कुमार पांडेय, सत्यव्रत वर्मा, राजेश कुमार वर्मा, चंद्रशेखर झा और आरपी मिश्रा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि तीन से सात साल की सजा के मामले में भी निचली अदालत से अग्रिम या नियमित जमानत नहीं दी जाती है, जिसके कारण हाईकोर्ट में याचिकाओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। हाईकोर्ट का अधिकांश समय उनके निपटारे में ही निकल जाता है। हाईकोर्ट के समक्ष अनेक महत्वपूर्ण मामले सुनवाई के लिए लंबित हैं। उपयोगिता प्रमाणपत्र मामले में जानकारी मांगी हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा कथित रूप से बड़े पैमाने पर उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा नहीं किए जाने के मामले में राज्य सरकार से जानकारी मांगी है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू और न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह की खंडपीठ ने किशोर कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। मामले पर दो माह बाद फिर सुनवाई होगी। याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार के विभिन्न विभागों ने 49,649 उपयोगिता प्रमाणपत्र नहीं जमा किया है, जो लगभग 70 हजार करोड़ के हैं।


