एसटीएफ ने साइबर अपराधियों के अंतरराज्यीय गिरोह के चार बदमाशों को गया से गिरफ्तार कर लिया। गया के धीरज कुमार, प्रवीण कुमार, आनंद सिंह और विजय कुमार को गिरफ्तार किया। इनके पास से चार मोबाइल बरामद किए गए। यह गिरोह एटीएम कार्ड बदलकर लोगों के खाते से निकासी कर लेता है। गिरोह का सरगना धीरज है। एसटीएफ ने सभी शातिरों को पटना साइबर थाने को सौंप दिया है। साइबर थाने की पुलिस ने पूछताछ के बाद जेल भेज दिया। पिछले एक महीने से इस गिरोह के बदमाश मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में घूम-घूमकर ठगी कर रहे थे। सभी मध्यप्रदेश के रीवा और सतना में ठगी कर गया लौटे थे। इसी बीच एसटीएफ को भनक लग गई। इस गिरोह के शातिरों से पूछताछ में पुलिस को इनके 10 बैंक खातों की जानकारी मिली है। अब पुलिस इनकी संपत्ति का पता करेगी। बैंकों से खाते का डिटेल मांगा गया है। साथ ही इस गिरोह के पांच अन्य शातिरों के नाम-पते का सत्यापन भी पुलिस कर रही है। झारखंड और बिहार के कई जिलों में वांटेड यह गिरोह चार-पांच सालों से फ्रॉड कर रहा है। झारखंड के रांची, जमशेदपुर, धनबाद सहित कई जिलों में एटीएम फ्रॉड कर चुका है। बिहार में भी पटना, औरंगाबाद, गया सहित अन्य जगहों पर घटना को अंजाम दे चुका है। झारखंड में कई थानों और पटना के साइबर थाने में इस गिरोह के खिलाफ केस दर्ज हैं। गिरोह की पहचान पुलिस ने एटीएम में लगे सीसीटीवी कैमरे से की है। ठगी का तरीका: महिलाओं और बुजुर्गों को टारगेट करता है यह गिरोह सुनसान जगह और बिना गार्ड वाले एटीएम को चुनता है। एटीएम केबिन के अंदर एक कागज पर एटीएम इंजीनियर और उसका मोबाइल नंबर लिखकर चिपका देता है। साथ ही एटीएम के कार्ड रीडर में फेबी क्विक लगा देता है। खाताधारक जैसे ही एटीएम कार्ड लगाता है, फंस जाता है। इसके बाद ग्राहक चस्पा किए गए मोबाइल नंबर पर फोन करता है। फोन शातिर को लगता है और वह किसी दूसरी एटीएम में गार्ड को बुलाने भेज देता है। वह जैसे ही वहां से निकलता है, शातिर कार्ड निकाल लेता है और पैसे की निकासी कर लेता है। जैसे ही बुजुर्ग और महिला एटीएम में जाते हैं, शातिर मदद के बहाने अंदर चला जाता है और उनका एटीएम कार्ड बदल लेता है और उनका पासवर्ड भी जान लेता है। इसके बाद उनके जाते ही उनके खाते से निकासी कर लेता है। एसटीएफ ने साइबर अपराधियों के अंतरराज्यीय गिरोह के चार बदमाशों को गया से गिरफ्तार कर लिया। गया के धीरज कुमार, प्रवीण कुमार, आनंद सिंह और विजय कुमार को गिरफ्तार किया। इनके पास से चार मोबाइल बरामद किए गए। यह गिरोह एटीएम कार्ड बदलकर लोगों के खाते से निकासी कर लेता है। गिरोह का सरगना धीरज है। एसटीएफ ने सभी शातिरों को पटना साइबर थाने को सौंप दिया है। साइबर थाने की पुलिस ने पूछताछ के बाद जेल भेज दिया। पिछले एक महीने से इस गिरोह के बदमाश मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में घूम-घूमकर ठगी कर रहे थे। सभी मध्यप्रदेश के रीवा और सतना में ठगी कर गया लौटे थे। इसी बीच एसटीएफ को भनक लग गई। इस गिरोह के शातिरों से पूछताछ में पुलिस को इनके 10 बैंक खातों की जानकारी मिली है। अब पुलिस इनकी संपत्ति का पता करेगी। बैंकों से खाते का डिटेल मांगा गया है। साथ ही इस गिरोह के पांच अन्य शातिरों के नाम-पते का सत्यापन भी पुलिस कर रही है। झारखंड और बिहार के कई जिलों में वांटेड यह गिरोह चार-पांच सालों से फ्रॉड कर रहा है। झारखंड के रांची, जमशेदपुर, धनबाद सहित कई जिलों में एटीएम फ्रॉड कर चुका है। बिहार में भी पटना, औरंगाबाद, गया सहित अन्य जगहों पर घटना को अंजाम दे चुका है। झारखंड में कई थानों और पटना के साइबर थाने में इस गिरोह के खिलाफ केस दर्ज हैं। गिरोह की पहचान पुलिस ने एटीएम में लगे सीसीटीवी कैमरे से की है। ठगी का तरीका: महिलाओं और बुजुर्गों को टारगेट करता है यह गिरोह सुनसान जगह और बिना गार्ड वाले एटीएम को चुनता है। एटीएम केबिन के अंदर एक कागज पर एटीएम इंजीनियर और उसका मोबाइल नंबर लिखकर चिपका देता है। साथ ही एटीएम के कार्ड रीडर में फेबी क्विक लगा देता है। खाताधारक जैसे ही एटीएम कार्ड लगाता है, फंस जाता है। इसके बाद ग्राहक चस्पा किए गए मोबाइल नंबर पर फोन करता है। फोन शातिर को लगता है और वह किसी दूसरी एटीएम में गार्ड को बुलाने भेज देता है। वह जैसे ही वहां से निकलता है, शातिर कार्ड निकाल लेता है और पैसे की निकासी कर लेता है। जैसे ही बुजुर्ग और महिला एटीएम में जाते हैं, शातिर मदद के बहाने अंदर चला जाता है और उनका एटीएम कार्ड बदल लेता है और उनका पासवर्ड भी जान लेता है। इसके बाद उनके जाते ही उनके खाते से निकासी कर लेता है।


