39 साल पहले हुई मिली उम्रकैद के खिलाफ अपील खारिज:कोर्ट ने कहा -बयान का एक हिस्सा गलत होने का मतलब पूरा गलत नहीं

39 साल पहले हुई मिली उम्रकैद के खिलाफ अपील खारिज:कोर्ट ने कहा -बयान का एक हिस्सा गलत होने का मतलब पूरा गलत नहीं

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि अगर गवाह के बयान का एक हिस्सा गलत है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसका पूरा बयान ही गलत है। अगर बाकी सबूत अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त हैं, तो सजा बरकरार रखा जा सकता है, भले ही अन्य सह अभियुक्तों को बरी कर दिया गया हो।
न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय तथा न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने सहारनपुर में 39 साल पहले हुई हत्या मामले में उम्रकैद की सजा पाने वाले अभियुक्त इस्लाम की अपील खारिज करते हुए यह बात कही है। कोर्ट ने कहा कि एक गवाह के बयान का वह हिस्सा जो अन्य सह अभियुक्तों से संबंधित है, वह भले ही कमजोर हो, लेकिन अपीलार्थी के खिलाफ उसका बयान विश्वसनीय है और अन्य साक्ष्यों से समर्थित है।
उसे खारिज करने का कोई कारण नहीं है। जमानत पर चल रहे अपीलकर्ता को कोर्ट ने 25 फरवरी, 2026 तक ट्रायल कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण का निर्देश दिया है।
कहा है कि ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई बची सजा को पूरा करने के लिए उसे जेल भेजा जाएगा। कोर्ट ने कहा अगर अपीलार्थी आत्मसमर्पण नहीं करता है तो ट्रायल कोर्ट उसकी उपस्थिति को सुरक्षित करने के लिए कानून के अनुसार कदम उठाएगा।

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