हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड में मंगलवार को आडानी कोल खनन परियोजना की पर्यावरण जनसुनवाई में सैकड़ों ग्रामीणों ने उग्र विरोध प्रदर्शन किया। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा आयोजित इस जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने हंगामा किया, कार्यक्रम स्थल पर तोड़फोड़ की। सुरक्षा के दृष्टिकोण से मौके पर पुलिस बल को तैनात किया गया है। जनसुनवाई शुरू होने से पहले ही गोंदलपुरा, गाली, हाहे और फुलांग बलोदर गांवों के ग्रामीणों ने परियोजना के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कार्यक्रम को बाधित कर दिया। आक्रोशित भीड़ ने टेंट, कुर्सियों और अन्य व्यवस्थाओं को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे अफरातफरी मच गई। कोल परियोजना से आजीविका पर गंभीर खतरा: ग्रामीण
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार्यक्रम स्थल पर मौजूद कुछ लोगों के साथ मारपीट की भी सूचना है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि आडानी कोल परियोजना से उनकी उपजाऊ कृषि भूमि, जंगल और पारंपरिक आजीविका पर गंभीर खतरा है। इसी कारण वे लंबे समय से इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शन में महिलाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई और परियोजना को गांव तथा भविष्य के लिए विनाशकारी बताया। इधर, गोंदलपुरा गांव के ग्रामीण कृष्ण कुमार राणा ने कहा कि ग्रामीण किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देंगे और ऐसी जनसुनवाई का लगातार विरोध करते रहेंगे। क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया
वहीं, ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम स्थल पर हुई तोड़फोड़ स्थानीय लोगों ने नहीं, बल्कि बाहरी तत्वों ने की है, ताकि उनके आंदोलन को बदनाम किया जा सके। इधर,स्थिति बिगड़ते देख प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया। क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और प्रशासन हालात पर कड़ी नजर रखे हुए है। फिलहाल क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और प्रशासन आगे की कार्रवाई में जुटा है। पूर्व विधायक अंबा प्रसाद भी ग्रामीणों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन स्थल पर पहुंची और कहा कि ग्रामीणों के विरोध के बावजूद भी लगातार जनसुनवाई हो रही है। यह सही नहीं है। इस पर राज्य और केंद्र सरकार को ध्यान देना होगा। हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड में मंगलवार को आडानी कोल खनन परियोजना की पर्यावरण जनसुनवाई में सैकड़ों ग्रामीणों ने उग्र विरोध प्रदर्शन किया। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा आयोजित इस जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने हंगामा किया, कार्यक्रम स्थल पर तोड़फोड़ की। सुरक्षा के दृष्टिकोण से मौके पर पुलिस बल को तैनात किया गया है। जनसुनवाई शुरू होने से पहले ही गोंदलपुरा, गाली, हाहे और फुलांग बलोदर गांवों के ग्रामीणों ने परियोजना के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कार्यक्रम को बाधित कर दिया। आक्रोशित भीड़ ने टेंट, कुर्सियों और अन्य व्यवस्थाओं को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे अफरातफरी मच गई। कोल परियोजना से आजीविका पर गंभीर खतरा: ग्रामीण
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार्यक्रम स्थल पर मौजूद कुछ लोगों के साथ मारपीट की भी सूचना है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि आडानी कोल परियोजना से उनकी उपजाऊ कृषि भूमि, जंगल और पारंपरिक आजीविका पर गंभीर खतरा है। इसी कारण वे लंबे समय से इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शन में महिलाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई और परियोजना को गांव तथा भविष्य के लिए विनाशकारी बताया। इधर, गोंदलपुरा गांव के ग्रामीण कृष्ण कुमार राणा ने कहा कि ग्रामीण किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देंगे और ऐसी जनसुनवाई का लगातार विरोध करते रहेंगे। क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया
वहीं, ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम स्थल पर हुई तोड़फोड़ स्थानीय लोगों ने नहीं, बल्कि बाहरी तत्वों ने की है, ताकि उनके आंदोलन को बदनाम किया जा सके। इधर,स्थिति बिगड़ते देख प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया। क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और प्रशासन हालात पर कड़ी नजर रखे हुए है। फिलहाल क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और प्रशासन आगे की कार्रवाई में जुटा है। पूर्व विधायक अंबा प्रसाद भी ग्रामीणों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन स्थल पर पहुंची और कहा कि ग्रामीणों के विरोध के बावजूद भी लगातार जनसुनवाई हो रही है। यह सही नहीं है। इस पर राज्य और केंद्र सरकार को ध्यान देना होगा।


