भोजपुर में साइबर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। यूपीआई और फोन कॉल के माध्यम से करीब 60 लाख रुपए की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। मामले में 2 सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है। जिसकी पहचान नवादा जिले के मंझवे गांव निवासी विकास कुमार चौरसिया और विशाल कुमार चौरसिया के तौर पर हुई है। दोनों पटना के रामकृष्णनगर मोहल्ले में मकान बनाकर रह रहे थे। ओटीपी के जरिए निकालता था पैसा साइबर डीएसपी स्नेहू सेतू ने बताया कि दोनों भाई फर्जी अफसर बनकर रोजाना सौ से डेढ़ सौ लोगों को फोन करते थे। मोबाइल नंबर पोर्ट कराने के जरिए उनके बैंक खातों तक पहुंच बना लेते थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से एक कार, 11 मोबाइल, एक राउटर, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, एक लैपटॉप और एक लाख बरामद की है। गिरोह नोएडा और दिल्ली में सक्रिय एजेंटों की मदद से सीधे-साधे लोगों के मोबाइल नंबर पोर्ट करवा लेता था। अधिकतर बैंक खाते मोबाइल नंबर से लिंक होते हैं, इसलिए नंबर पोर्ट होते ही आरोपी ओटीपी के जरिए खातों को हैक कर लेते थे। इसके बाद आसानी से रुपए उड़ा लेते थे। ठगी की रकम को पहले किसी अन्य व्यक्ति के खाते में मंगाया जाता था। फिर तुरंत उसे निकाल लिया जाता था। छापेमारी कर दोनों भाइयों को पकड़ा साइबर डीएसपी ने आगे बताया कि गिरोह की गतिविधियों को लेकर साइबर थाना को लगातार शिकायतें मिल रही थी। आरा टाउन थाना क्षेत्र के अबरपुल निवासी सुबोध कुमार के खाते से साढ़े तीन लाख रुपए की अवैध निकासी की गई थी। इस मामले में उन्होंने 9 सितंबर 2025 को साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पीड़ित ने बताया था कि निर्वाचन विभाग का फर्जी पदाधिकारी बनकर बीएलओ कार्य की जानकारी ली गई। ओटीपी हासिल कर खाते से पैसे निकाल लिए गए।प्राथमिकी के आधार पर गठित पुलिस टीम ने बैंक खातों की जांच-पड़ताल करते हुए गिरोह तक पहुंची। इसके बाद नवादा जिले के हिसुआ, नादरीगंज और पटना के रामकृष्णनगर इलाके में छापेमारी कर दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया गया। ठगी के पैसे से पटना में बनाया घर साइबर डीएसपी ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि ठगी से अर्जित रकम का निवेश पटना में घर बनाने में किया है। जिसकी अनुमानित कीमत चार से पांच करोड़ रुपए है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) और आयकर विभाग के माध्यम से संपत्ति की विस्तृत जांच कराई जाएगी। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और नोएडा-दिल्ली में सक्रिय एजेंटों की तलाश में जुटी हुई है। भोजपुर में साइबर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। यूपीआई और फोन कॉल के माध्यम से करीब 60 लाख रुपए की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। मामले में 2 सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है। जिसकी पहचान नवादा जिले के मंझवे गांव निवासी विकास कुमार चौरसिया और विशाल कुमार चौरसिया के तौर पर हुई है। दोनों पटना के रामकृष्णनगर मोहल्ले में मकान बनाकर रह रहे थे। ओटीपी के जरिए निकालता था पैसा साइबर डीएसपी स्नेहू सेतू ने बताया कि दोनों भाई फर्जी अफसर बनकर रोजाना सौ से डेढ़ सौ लोगों को फोन करते थे। मोबाइल नंबर पोर्ट कराने के जरिए उनके बैंक खातों तक पहुंच बना लेते थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से एक कार, 11 मोबाइल, एक राउटर, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, एक लैपटॉप और एक लाख बरामद की है। गिरोह नोएडा और दिल्ली में सक्रिय एजेंटों की मदद से सीधे-साधे लोगों के मोबाइल नंबर पोर्ट करवा लेता था। अधिकतर बैंक खाते मोबाइल नंबर से लिंक होते हैं, इसलिए नंबर पोर्ट होते ही आरोपी ओटीपी के जरिए खातों को हैक कर लेते थे। इसके बाद आसानी से रुपए उड़ा लेते थे। ठगी की रकम को पहले किसी अन्य व्यक्ति के खाते में मंगाया जाता था। फिर तुरंत उसे निकाल लिया जाता था। छापेमारी कर दोनों भाइयों को पकड़ा साइबर डीएसपी ने आगे बताया कि गिरोह की गतिविधियों को लेकर साइबर थाना को लगातार शिकायतें मिल रही थी। आरा टाउन थाना क्षेत्र के अबरपुल निवासी सुबोध कुमार के खाते से साढ़े तीन लाख रुपए की अवैध निकासी की गई थी। इस मामले में उन्होंने 9 सितंबर 2025 को साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पीड़ित ने बताया था कि निर्वाचन विभाग का फर्जी पदाधिकारी बनकर बीएलओ कार्य की जानकारी ली गई। ओटीपी हासिल कर खाते से पैसे निकाल लिए गए।प्राथमिकी के आधार पर गठित पुलिस टीम ने बैंक खातों की जांच-पड़ताल करते हुए गिरोह तक पहुंची। इसके बाद नवादा जिले के हिसुआ, नादरीगंज और पटना के रामकृष्णनगर इलाके में छापेमारी कर दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया गया। ठगी के पैसे से पटना में बनाया घर साइबर डीएसपी ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि ठगी से अर्जित रकम का निवेश पटना में घर बनाने में किया है। जिसकी अनुमानित कीमत चार से पांच करोड़ रुपए है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) और आयकर विभाग के माध्यम से संपत्ति की विस्तृत जांच कराई जाएगी। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और नोएडा-दिल्ली में सक्रिय एजेंटों की तलाश में जुटी हुई है।


