बिहार में 6 नई क्षेत्रीय FSL शुरू होंगी:163 करोड़ के उपकरण की मंजूरी, जल्द ही खरीदारी की जाएगी; भवन निर्माण हो चुका

बिहार में 6 नई क्षेत्रीय FSL शुरू होंगी:163 करोड़ के उपकरण की मंजूरी, जल्द ही खरीदारी की जाएगी; भवन निर्माण हो चुका

बिहार में अपराध जांच को तकनीकी रूप से मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य में इस साल 6 नई क्षेत्रीय विधि-विज्ञान प्रयोगशालाएं (FSL) शुरू होंगी। इन प्रयोगशालाओं में मॉडर्न उपकरण स्थापित करने के लिए 163 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। ये नई FSL पूर्णिया, गया जी, बेतिया, छपरा, मुंगेर और सहरसा में स्थापित की जा रही हैं। इन सभी स्थानों पर FSL भवनों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और अब उपकरणों की स्थापना प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। इन 6 नई FSL में उपकरण लगाने के लिए 163 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को गृह विभाग से स्वीकृति मिल चुकी है। इसे अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय भेजा गया है। यह जानकारी सोमवार को पुलिस मुख्यालय सभागार में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के अपर पुलिस महानिदेशक पारसनाथ ने पीसी में दी। दरभंगा और रोहतास में भवन निर्माण जारी है एडीजी पारसनाथ ने बताया कि वर्तमान में पटना के अलावा मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर में क्षेत्रीय FSL संचालित हैं। दरभंगा और रोहतास में भी FSL शुरू की जानी हैं, लेकिन वहां अभी भवन निर्माण कार्य जारी है। उन्होंने यह भी बताया कि राजगीर और पूर्णिया FSL के लिए 13 करोड़ 40 लाख रुपए की लागत से उपकरणों की खरीद की जा रही है। इसमें से आधी राशि के उपकरण खरीदे जा चुके हैं, जबकि शेष उपकरण फरवरी तक उपलब्ध हो जाएंगे। एडीजी पारसनाथ ने घोषणा की कि मार्च महीने तक राज्य में साइबर फॉरेंसिक यूनिट भी शुरू कर दी जाएगी। पहले चरण में पटना और राजगीर FSL में साइबर फॉरेंसिक यूनिट स्थापित होंगी। इन यूनिटों के शुरू होने से मोबाइल फोन और कंप्यूटर से जुड़े मामलों की फॉरेंसिक जांच राज्य में ही संभव हो सकेगी, जिससे जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी। अगले चरण में मुजफ्फरपुर और भागलपुर में भी साइबर फॉरेंसिक यूनिट शुरू करने की योजना है, जिसके लिए नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी से करार किया गया है। डीएनए यूनिट स्थापित करने का भी प्रस्ताव इसके अलावा पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर एफएसएल में एक-एक डीएनए यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव भी गृह विभाग को सौंपा गया है। इससे गंभीर अपराधों की वैज्ञानिक जांच को और मजबूती मिलेगी। एडीजी ने बताया कि वर्तमान में राज्य की विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं में 44 राजपत्रित पदाधिकारी और 85 वरीय वैज्ञानिक सहायक कार्यरत हैं। वहीं, 89 सहायक निदेशकों और 100 वरीय वैज्ञानिक सहायकों की संविदा पर नियुक्ति के लिए शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों का सत्यापन और मेडिकल जांच अंतिम चरण में है। फरवरी तक पूरी चयन प्रक्रिया पूरी होने की संभावना जताई गई है। बिहार में अपराध जांच को तकनीकी रूप से मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य में इस साल 6 नई क्षेत्रीय विधि-विज्ञान प्रयोगशालाएं (FSL) शुरू होंगी। इन प्रयोगशालाओं में मॉडर्न उपकरण स्थापित करने के लिए 163 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। ये नई FSL पूर्णिया, गया जी, बेतिया, छपरा, मुंगेर और सहरसा में स्थापित की जा रही हैं। इन सभी स्थानों पर FSL भवनों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और अब उपकरणों की स्थापना प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। इन 6 नई FSL में उपकरण लगाने के लिए 163 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को गृह विभाग से स्वीकृति मिल चुकी है। इसे अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय भेजा गया है। यह जानकारी सोमवार को पुलिस मुख्यालय सभागार में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के अपर पुलिस महानिदेशक पारसनाथ ने पीसी में दी। दरभंगा और रोहतास में भवन निर्माण जारी है एडीजी पारसनाथ ने बताया कि वर्तमान में पटना के अलावा मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर में क्षेत्रीय FSL संचालित हैं। दरभंगा और रोहतास में भी FSL शुरू की जानी हैं, लेकिन वहां अभी भवन निर्माण कार्य जारी है। उन्होंने यह भी बताया कि राजगीर और पूर्णिया FSL के लिए 13 करोड़ 40 लाख रुपए की लागत से उपकरणों की खरीद की जा रही है। इसमें से आधी राशि के उपकरण खरीदे जा चुके हैं, जबकि शेष उपकरण फरवरी तक उपलब्ध हो जाएंगे। एडीजी पारसनाथ ने घोषणा की कि मार्च महीने तक राज्य में साइबर फॉरेंसिक यूनिट भी शुरू कर दी जाएगी। पहले चरण में पटना और राजगीर FSL में साइबर फॉरेंसिक यूनिट स्थापित होंगी। इन यूनिटों के शुरू होने से मोबाइल फोन और कंप्यूटर से जुड़े मामलों की फॉरेंसिक जांच राज्य में ही संभव हो सकेगी, जिससे जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी। अगले चरण में मुजफ्फरपुर और भागलपुर में भी साइबर फॉरेंसिक यूनिट शुरू करने की योजना है, जिसके लिए नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी से करार किया गया है। डीएनए यूनिट स्थापित करने का भी प्रस्ताव इसके अलावा पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर एफएसएल में एक-एक डीएनए यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव भी गृह विभाग को सौंपा गया है। इससे गंभीर अपराधों की वैज्ञानिक जांच को और मजबूती मिलेगी। एडीजी ने बताया कि वर्तमान में राज्य की विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं में 44 राजपत्रित पदाधिकारी और 85 वरीय वैज्ञानिक सहायक कार्यरत हैं। वहीं, 89 सहायक निदेशकों और 100 वरीय वैज्ञानिक सहायकों की संविदा पर नियुक्ति के लिए शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों का सत्यापन और मेडिकल जांच अंतिम चरण में है। फरवरी तक पूरी चयन प्रक्रिया पूरी होने की संभावना जताई गई है।  

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