जीआरएमसी सहित प्रदेशभर के कॉलेजों में जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा पैरा मेडिकल कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। यूनिवर्सिटी की उदासीनता के चलते दो साल की डिग्री 5 साल में भी पूरी नहीं हो पा रही है। इसी बात से नाराज पैरा मेडिकल कोर्स के छात्रों ने सोमवार को जीआरएमसी के मुख्य गेट ताला डाल दिया और धरने पर बैठ गए। छात्रों का कहना था कि सत्र 2021-22 और 2022-23 की परीक्षा दो साल देरी से जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी बीते साल अप्रैल में कराई थी, लेकिन अब तक रिजल्ट घोषित नहीं किया। ऐसे में अब पूरे 5 साल हो चुके हैं। छात्रों का कहना है कि 4-4 लाख रुपए खर्च करने के बाद उन्हें डिलीवरी ब्वॉय का काम करना पड़ रहा है। मुख्य द्वार बंद होने के कारण डॉक्टरों को मुख्य द्वार के पास बने छोटे गेट से अंदर जाना पड़ा। डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ के समझाने के बाद करीब डेढ़ बजे छात्र माने। प्रदर्शन सुबह 10:30 बजे से शुरू हुआ था। भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. भरत जैन, पूर्व डीन, जीआरएमसी जीआरएमसी को बनाए रीजनल विवि, तभी सुधरेगी स्थिति यूनिवर्सिटी के नियमों में सब सेंटर बनाने का प्रावधान है। जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी को चाहिए कि वह ग्वालियर, भोपाल, इंदौर को सब सेंटर बना सकते हैं। इस सेंटर में कॉपियां चेक हों साथ ही यूनिवर्सिटी इतना पैसा दे कि जब कोई डॉक्टर कॉपी चेक करके जाए तो डीन ने उसी दिन उन्हें भुगतान कर दें। शासन को चाहिए कि जीआरएमसी को रीजनल यूनिवर्सिटी का दर्जा देकर यहीं सब कार्य कराए जाएं,जिससे समय पर परीक्षाएं होंगी और परिणाम भी निकलेंगे। कुलपति-परीक्षा नियंत्रक ने नहीं उठाया फोन: पिछले एक सप्ताह से छात्र परेशान हैं लेकिन कुलपति, रजिस्ट्रार और परीक्षा नियंत्रक फोन ही नहीं उठाते हैं। कांग्रेस नेता मितेंद्र दर्शन सिंह ने भी कुलपति को कई बार फोन लगाया लेकिन फोन नहीं उठाया। छात्र कर चुका है आत्महत्या का प्रयास फिर भी गंभीर नहीं
रिजल्ट घोषित नहीं होने से पैरा मेडिकल के एक छात्र ने बीते सप्ताह आत्महत्या का प्रयास किया, जिसे समय रहते बचा लिया।


