RCP पर नीतीश चुप, ललन बोले- जगह नहीं:भाजपा एजेंट का दाग, 9 साल में 58 प्लॉट खरीदे, क्या RCP की JDU में वापसी रुक गई

RCP पर नीतीश चुप, ललन बोले- जगह नहीं:भाजपा एजेंट का दाग, 9 साल में 58 प्लॉट खरीदे, क्या RCP की JDU में वापसी रुक गई

बिहार की राजनीति में RCP सिंह की JDU में वापसी अब सिर्फ अटकल नहीं, बल्कि टकराव का मुद्दा बन चुकी है। एक तरफ नीतीश कुमार चुप हैं तो दूसरी ओर पार्टी के सीनियर नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह का सख्त संदेश- ’72 से 42 पर लाने वालों के लिए पार्टी में कोई जगह नहीं है।’ सवाल यही है कि क्या RCP के लिए JDU के दरवाजे सच में बंद हो चुके हैं या ये सिर्फ सत्ता संतुलन की अगली चाल का संकेत है। 9 साल में 58 प्लॉट खरीदने का आरोप लगाने वाली JDU क्या RCP को पार्टी में शामिल कराएगी। जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। सवाल-1ः RCP सिंह के JDU में आने की चर्चा कैसे शुरू हुई? जवाबः 11 जनवरी को पटेल भवन में पटेल सेवा संघ ने दही-चूड़ा का भोज दिया। इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और RCP सिंह (रामचंद्र प्रसाद सिंह) शामिल हुए। सवाल-2ः RCP की वापसी पर JDU की टॉप लीडरशिप ने क्या कहा? जवाबः JDU में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही सर्वेसर्वा हैं। वह जो बोलेंगे वही होगा। उनके अलावा राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, मंत्री विजय चौधरी और मंत्री अशोक चौधरी, मनीष वर्मा का दखल है। सवाल-3ः क्या RCP सिंह की JDU में वापसी हो सकती है? जवाबः फिलहाल एंट्री मुश्किल है। हालांकि, राजनीति में पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की राय को पार्टी में वीटो का दर्जा है। इसे एक उदाहरण से समझिए… 2025 विधानसभा चुनाव में लखीसराय के सूर्यगढ़ा से डिप्टी CM विजय सिन्हा RJD छोड़कर साथ आए प्रह्लाद यादव को भाजपा का टिकट दिलाना चाहते थे। ललन सिंह ने कह दिया था- ‘लखीसराय के आतंक को टिकट नहीं मिलेगा।’ भाजपा नेता लगातार JDU से सीट लेने का दबाव बनाते रहे, लेकिन नहीं मिला। लास्ट में प्रह्लाद यादव को टिकट नहीं मिला। RCP सिंह की वापसी में 3 बड़ी अड़चनें… 1. पार्टी का एक धड़ा नाराज ललन सिंह के बयान से साफ है कि RCP के नाम पर पार्टी में अभी दो राय है। सीनियर जर्नलिस्ट प्रियदर्शी रंजन कहते हैं, ‘ललन सिंह की बातों को गंभीरता से लेना चाहिए। वह अगर सीधा मना कर रहे हैं तो यह तय है कि नीतीश कुमार ने अभी तक RCP की वापसी पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है। ज्यादा संभावना है कि अभी मामला ना में ही है।’ प्रियदर्शी रंजन कहते हैं, ‘RCP सिंह की पैरवी नीतीश कुमार के पास हो रही है। पैरवी करने वाले कुछ IAS और समाज के लोग हैं। लेकिन नीतीश कुमार ने अभी तक कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है। RCP पर फैसला नीतीश कुमार को लेना है। वह चाहेंगे तो ललन सिंह अपना विरोध खत्म कर सकते हैं।’ 2. पार्टी में बढ़ सकती है गुटबाजी सीनियर जर्नलिस्ट संजय सिंह कहते हैं, ‘RCP के आने से पार्टी में एक और पावर सेंटर बनेगा। निशांत कुमार के राजनीति में आने की चर्चा है। ऐसे में नीतीश कुमार पार्टी में गुटबाजी को बढ़ाने का नहीं, कम करने का प्रयास करेंगे। फिलहाल RCP से नीतीश को कोई फायदा नहीं है। और बिना फायदा राजनीति में कोई फैसला नहीं लिया जाता।’ 3. स्लीपर सेल का दाग खत्म करना मुश्किल JDU के नेता RCP सिंह पर भाजपा के साथ मिलकर नीतीश कुमार को कमजोर करने का आरोप लगाते रहे हैं। ललन सिंह ने भी 18 जनवरी को 72 से 42 देने वाला बयान इसी कड़ी में दिया है। ऐसे में एक चर्चा यह भी है कि RCP सिंह के JDU में दोबारा वापसी के पीछे एक बड़ा राजनीतिक दल है। वह दल चाहता है कि पार्टी के अंदर अपना भरोसेमंद रहे। सवाल-4ः RCP से JDU को कितना फायदा होगा? जवाबः कुछ भी नहीं। उल्टे राजनीति में असफल हो रहे RCP को काफी फायदा हो सकता है। JDU से निकाले जाने के बाद 2022 के आखिर से अब तक RCP सिंह अपने दम पर राजनीति में कुछ हासिल नहीं कर पाए हैं। उन्होंने जो भी राजनीतिक तौर पर हासिल किया है, नीतीश कुमार के साथ रहकर ही किया है। इसे ऐसे समझिए… सवाल-5ः RCP सिंह कब पार्टी से हटाए गए थे? JDU ने क्या आरोप लगाया था? जवाबः अगस्त 2022 में RCP सिंह को पार्टी से साइडलाइन कर दिया गया था। जुलाई 2021 में मोदी कैबिनेट विस्तार के दौरान RCP सिंह JDU कोटे से केंद्रीय मंत्री बने थे। तब वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी थे। JDU का आरोपः 9 साल में 58 प्लॉट खरीदे अगस्त 2022 में JDU ने 35 पेज की अपनी जांच रिपोर्ट तैयार की। जिसमें RCP सिंह पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। JDU की इंटरनल रिपोर्ट के मुताबिक… बिहार की राजनीति में RCP सिंह की JDU में वापसी अब सिर्फ अटकल नहीं, बल्कि टकराव का मुद्दा बन चुकी है। एक तरफ नीतीश कुमार चुप हैं तो दूसरी ओर पार्टी के सीनियर नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह का सख्त संदेश- ’72 से 42 पर लाने वालों के लिए पार्टी में कोई जगह नहीं है।’ सवाल यही है कि क्या RCP के लिए JDU के दरवाजे सच में बंद हो चुके हैं या ये सिर्फ सत्ता संतुलन की अगली चाल का संकेत है। 9 साल में 58 प्लॉट खरीदने का आरोप लगाने वाली JDU क्या RCP को पार्टी में शामिल कराएगी। जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। सवाल-1ः RCP सिंह के JDU में आने की चर्चा कैसे शुरू हुई? जवाबः 11 जनवरी को पटेल भवन में पटेल सेवा संघ ने दही-चूड़ा का भोज दिया। इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और RCP सिंह (रामचंद्र प्रसाद सिंह) शामिल हुए। सवाल-2ः RCP की वापसी पर JDU की टॉप लीडरशिप ने क्या कहा? जवाबः JDU में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही सर्वेसर्वा हैं। वह जो बोलेंगे वही होगा। उनके अलावा राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, मंत्री विजय चौधरी और मंत्री अशोक चौधरी, मनीष वर्मा का दखल है। सवाल-3ः क्या RCP सिंह की JDU में वापसी हो सकती है? जवाबः फिलहाल एंट्री मुश्किल है। हालांकि, राजनीति में पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की राय को पार्टी में वीटो का दर्जा है। इसे एक उदाहरण से समझिए… 2025 विधानसभा चुनाव में लखीसराय के सूर्यगढ़ा से डिप्टी CM विजय सिन्हा RJD छोड़कर साथ आए प्रह्लाद यादव को भाजपा का टिकट दिलाना चाहते थे। ललन सिंह ने कह दिया था- ‘लखीसराय के आतंक को टिकट नहीं मिलेगा।’ भाजपा नेता लगातार JDU से सीट लेने का दबाव बनाते रहे, लेकिन नहीं मिला। लास्ट में प्रह्लाद यादव को टिकट नहीं मिला। RCP सिंह की वापसी में 3 बड़ी अड़चनें… 1. पार्टी का एक धड़ा नाराज ललन सिंह के बयान से साफ है कि RCP के नाम पर पार्टी में अभी दो राय है। सीनियर जर्नलिस्ट प्रियदर्शी रंजन कहते हैं, ‘ललन सिंह की बातों को गंभीरता से लेना चाहिए। वह अगर सीधा मना कर रहे हैं तो यह तय है कि नीतीश कुमार ने अभी तक RCP की वापसी पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है। ज्यादा संभावना है कि अभी मामला ना में ही है।’ प्रियदर्शी रंजन कहते हैं, ‘RCP सिंह की पैरवी नीतीश कुमार के पास हो रही है। पैरवी करने वाले कुछ IAS और समाज के लोग हैं। लेकिन नीतीश कुमार ने अभी तक कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है। RCP पर फैसला नीतीश कुमार को लेना है। वह चाहेंगे तो ललन सिंह अपना विरोध खत्म कर सकते हैं।’ 2. पार्टी में बढ़ सकती है गुटबाजी सीनियर जर्नलिस्ट संजय सिंह कहते हैं, ‘RCP के आने से पार्टी में एक और पावर सेंटर बनेगा। निशांत कुमार के राजनीति में आने की चर्चा है। ऐसे में नीतीश कुमार पार्टी में गुटबाजी को बढ़ाने का नहीं, कम करने का प्रयास करेंगे। फिलहाल RCP से नीतीश को कोई फायदा नहीं है। और बिना फायदा राजनीति में कोई फैसला नहीं लिया जाता।’ 3. स्लीपर सेल का दाग खत्म करना मुश्किल JDU के नेता RCP सिंह पर भाजपा के साथ मिलकर नीतीश कुमार को कमजोर करने का आरोप लगाते रहे हैं। ललन सिंह ने भी 18 जनवरी को 72 से 42 देने वाला बयान इसी कड़ी में दिया है। ऐसे में एक चर्चा यह भी है कि RCP सिंह के JDU में दोबारा वापसी के पीछे एक बड़ा राजनीतिक दल है। वह दल चाहता है कि पार्टी के अंदर अपना भरोसेमंद रहे। सवाल-4ः RCP से JDU को कितना फायदा होगा? जवाबः कुछ भी नहीं। उल्टे राजनीति में असफल हो रहे RCP को काफी फायदा हो सकता है। JDU से निकाले जाने के बाद 2022 के आखिर से अब तक RCP सिंह अपने दम पर राजनीति में कुछ हासिल नहीं कर पाए हैं। उन्होंने जो भी राजनीतिक तौर पर हासिल किया है, नीतीश कुमार के साथ रहकर ही किया है। इसे ऐसे समझिए… सवाल-5ः RCP सिंह कब पार्टी से हटाए गए थे? JDU ने क्या आरोप लगाया था? जवाबः अगस्त 2022 में RCP सिंह को पार्टी से साइडलाइन कर दिया गया था। जुलाई 2021 में मोदी कैबिनेट विस्तार के दौरान RCP सिंह JDU कोटे से केंद्रीय मंत्री बने थे। तब वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी थे। JDU का आरोपः 9 साल में 58 प्लॉट खरीदे अगस्त 2022 में JDU ने 35 पेज की अपनी जांच रिपोर्ट तैयार की। जिसमें RCP सिंह पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। JDU की इंटरनल रिपोर्ट के मुताबिक…  

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