घोटाला करने मेंटेनेंस के नाम पर सीबीसी मशीनों को कर दिया था लॉक, डेढ़ साल बाद भी नहीं खुलीं

घोटाला करने मेंटेनेंस के नाम पर सीबीसी मशीनों को कर दिया था लॉक, डेढ़ साल बाद भी नहीं खुलीं

मोक्षित कॉर्पोरेशन ने रीएजेंट के साथ खून जांचने वाली मशीन भी सरकारी अस्पतालों में सप्लाई की है। साल 2024 में उन मशीनों के मेंटेनेंस के दौरान कंपनी के तकनीशियनों ने छेड़खानी करते हुए कोडिंग लॉक लगा दिया, ताकि किसी दूसरी कंपनी के तकनीशियन उसमें रीएजेंट डालने के लिए खोल न सकें और सरकार उन्हीं की कंपनी का रीएजेंट खरीदे। इसके बाद मोक्षित कॉर्पोरेशन के शशांक चोपड़ा ने रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रालि के डायरेक्टर अभिषेक कौशल, शारदा इंडस्ट्रीज के प्रोप्राइटर राकेश जैन और आरएमएस के लाइजनर प्रिंस जैन के साथ मिलकर रीएजेंट घोटाला किया। स्वास्थ्य केंद्रों में मौजूद मशीनों में ऐसा सिस्टम लगाया गया है, जिसमें विशेष कोडिंग थी। उस कोड की जानकारी भी किसी को नहीं दी गई। इसके चलते अब वह मशीन खुल नहीं पा रही है। इसके पीछे का कारण ये था कि मशीनों में उसकी कंपनी का रीएजेंट लग सके। स्वास्थ्य केंद्रों में रोजाना आते हैं 300 मरीज, जांच मशीनें खा रही हैं धूल
स्वास्थ्य केंद्रों में रोजाना 200-300 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। बड़े अस्पतालों में बोझ कम करने इन स्वास्थ्य केंद्रों में खून जांच, एक्सरे समेत अन्य जरुरी सुविधाएं दी गई। लेकिन इसकी नियमित मॉनिटरिंग न करने और स्टाफ की कमी के कारण सुविधाएं ठप हैं। इस सीबीसी मशीन की सहायता से खून की सभी तरह की जांच की जाती है। इसमें हीमोग्लोबीन, डेंगु, टाइफाइड, मलेरिया, एचआईवी, हेपेटाइटिस, ब्लड ग्रुप जांच, कंप्लीट ब्लड काउंट, शुगर जैसी करीब 50 से ज्यादा तरह की जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्रों में यह मशीन दी गई थी। लेकिन बीते डेढ़ साल से अस्पतालों में खून जांच की मशीन धूल खा रही है। 2019 से लगीं हैं सभी अस्पतालों में मशीनें
रायपुर शहर में कुल 16 सीएचसी और 4 हमर अस्पताल हैं। इन सभी अस्पतालों में साल 2019 में मोक्षित कॉर्पोरेशन कंपनी ने ही खून जांच की मशीन सप्लाई की है। इस दौरान 2022 के आसपास कुछ केंद्रों की मशीनों के खराब होने की शिकायतें सामने आई। इसके बाद इन मशीनों को बदला भी गया। वहीं, लैब स्टाफ से मिली जानकारी के अनुसार डेढ़ साल पहले मोक्षित कंपनी की ओर से कुछ लोग आए और उन्होंने सारी मशीनों को कुछ मरम्मत करना है,यह कहकर मशीनों को लॉक कर दिया। CGMSC घोटाले में एसीबी की कार्रवाई; 550 करोड़ की हेराफेरी में 3 गिरफ्तार सीजीएमएससी घोटाला मामले में एसीबी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इसमें रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रालि, पंचकुला के डायरेक्टर अभिषेक कौशल, शारदा इंडस्ट्रीज, रायपुर के प्रोप्राइटर राकेश जैन और आरएमएस के लाइजनर प्रिंस जैन (शशांक चोपड़ा का जीजा) शामिल है। एसीबी ने अपनी जांच के दौरान पाया कि प्रदेश के सभी स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में खुले हमर लैब योजना के तहत मेडिकल उपकरण व रीएजेंट की निविदा में पुल टेंडरिंग, कार्टेलाइजेशन और फर्जी दस्तावेजों के जरिए प्रतिस्पर्धा प्रभावित की गई। तीनों फर्मों के टेंडर विवरण और दरें एक जैसे पैटर्न में भरी गईं, जिससे मोक्षित कॉर्पोरेशन को लाभ मिला। आरोप है कि मोक्षित कॉर्पोरेशन ने एमआरपी से तीन गुना तक अधिक दरों पर आपूर्ति कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया, जिससे शासन को करीब 550 करोड़ की आर्थिक क्षति हुई। एसीबी की टीम ने आरोपियों को 19 जनवरी को विशेष न्यायालय में पेश कर 27 जनवरी तक रिमांड पर लिया है। वहीं इस मामले में मुख्य आरोपी मोक्षित कॉर्पोरेशन के शशांक चोपड़ा भी इस मामले में एसीबी की गिरफ्त में हैं।

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