मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के नतीजों के बाद शहर की राजनीति एक बार फिर ‘मराठी बनाम परप्रांतीय’ के मुद्दे पर गरमा गई है। बिहार की नीतीश कुमार सरकार द्वारा मुंबई में एक भव्य ‘बिहार भवन’ बनाने की घोषणा के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने आक्रामक रुख अपना लिया है। मनसे के नवनिर्वाचित पार्षद यशवंत किल्लेदार ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि वे मुंबई की धरती पर बिहार भवन का निर्माण नहीं होने देंगे।
नीतीश सरकार का 314 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट
बिहार सरकार ने मुंबई के एलफिंस्टन एस्टेट में पोर्ट ट्रस्ट क्षेत्र में 30 मंजिला ‘बिहार भवन’ बनाने की योजना तैयार की है। लगभग 314.20 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह इमारत 69 मीटर ऊंची होगी। इसमें बिहार से मुंबई आने वाले कैंसर जैसे गंभीर बिमारियों के मरीजों के लिए 240 बेड का डोरमेट्री, 178 कमरे, आधुनिक कार्यालय और वीआईपी सुइट्स जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं। नीतीश सरकार का तर्क है कि इससे मुंबई में इलाज के लिए आने वाले बिहार के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
मनसे बोली- यहां पैसा खर्च न करें
मनसे पार्षद यशवंत किल्लेदार ने इस प्रोजेक्ट पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा, “हम मुंबई में बिहार भवन नहीं बनने देंगे। बिहार सरकार को अगर विकास और जनसेवा की इतनी ही चिंता है, तो वे यह पैसा बिहार में अस्पताल और सुविधाएं बनाने पर खर्च करें। मुंबई में पहले ही स्थानीय लोगों के कई प्रश्न अनसुलझे हैं, ऐसे में बाहरी राज्यों के भवनों की यहां जरूरत नहीं है।”
उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ रही है, मुंबई के स्थानीय मुद्दे अब तक सुलझे नहीं हैं और ऐसे में गैर-जरूरी परियोजनाओं पर पैसा खर्च किया जा रहा है। बता दें कि मुंबई के बीएमसी चुनाव में मनसे के छह पार्षद जीते हैं।
बता दें कि 13 जनवरी को बिहार मंत्रिमंडल की बैठक हुई, जिसमें मुंबई में बिहार भवन के निर्माण के लिए 314 करोड़ 20 लाख रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इसे पूरी तरह आधुनिक वास्तुकला के आधार पर बनाया जाएगा और इसमें पर्यावरण के अनुकूल तकनीक का इस्तेमाल होगा। सोलर पैनल, एसटीपी प्लांट और हरित क्षेत्र जैसी सुविधाएं भी इसमें शामिल होंगी। हालांकि, मनसे के विरोध के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि मुंबई में यह परियोजना आगे बढ़ती है या नहीं।


