कानपुर के लिए एक ऐतिहासिक पहल अब जमीन पर उतरने जा रही है। वर्षों से फाइलों और बैठकों तक सीमित रहा गंगा रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट अब हकीकत की ओर बढ़ चुका है। गंगा बैराज स्थित अटल घाट से लेकर शुक्लागंज पुल तक प्रस्तावित यह रिवर फ्रंट न सिर्फ शहर की खूबसूरती बढ़ाएगा, बल्कि ट्रैफिक और आवागमन की बड़ी समस्या का भी समाधान बनेगा। शासन से पहले ही हरी झंडी मिलने के बाद अब कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने पहले चरण में पांच करोड़ रुपये खर्च कर काम शुरू करने की तैयारी कर ली है। इस प्रोजेक्ट को लेकर हाल ही में भाजपा सांसद रमेश अवस्थी ने केडीए अधिकारियों के साथ स्थल निरीक्षण किया था। इसके बाद तय हुआ कि 27 जनवरी को निर्माण से जुड़े कार्यों के लिए टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। केडीए वीसी मदन सिंह गर्ब्याल का कहना है कि यह कानपुर के लिए पहला ऐसा प्रोजेक्ट होगा, जो गंगा को शहर के विकास की धुरी बनाएगा। पटना मॉडल से मिली दिशा
कानपुर का यह रिवर फ्रंट पटना की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इसके लिए उच्च स्तरीय संयुक्त विकास समिति के समन्वयक नीरज श्रीवास्तव के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम ने पटना जाकर गंगा नदी पर बने रिवर फ्रंट और गंगा पथ का अध्ययन किया। वहां सामने आई चुनौतियों और उनके समाधानों को ध्यान में रखते हुए कानपुर के लिए एक व्यावहारिक और दीर्घकालिक योजना तैयार की गई है। जिला प्रशासन, केडीए, सेतु निगम और लोक निर्माण विभाग मिलकर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अंजाम देंगे। पर्यटन, परिवार और ट्रैफिक तीनों को फायदा
रिवर फ्रंट बनने के बाद गंगा किनारा शहरवासियों के लिए एक नया सार्वजनिक स्थल बन जाएगा, जहां लोग परिवार के साथ घूम सकेंगे, सैर कर सकेंगे और गंगा के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकेंगे। खास बात यह है कि रिवर फ्रंट के जरिए शहर के कई प्रमुख मार्गों से सीधा जुड़ाव होगा। जिससे जाम की समस्या काफी हद तक कम होने की उम्मीद है। जाजमऊ मोड़, अटल घाट, रानी घाट, पॉवर हाउस चौराहा और सरसैया घाट जैसे प्वाइंट्स से लोग आसानी से रिवर फ्रंट तक पहुंच सकेंगे। 11.5 किलोमीटर का सपना, हजारों करोड़ का निवेश करीब 11.5 किलोमीटर लंबा यह गंगा रिवर फ्रंट चरणबद्ध तरीके से विकसित होगा। पहले चरण में जाजमऊ से गंगा बैराज तक का हिस्सा कवर किया जाएगा, जबकि आगे इसे बिठूर तक जोड़ने की योजना है। कुल मिलाकर पहले चरण में ही लगभग तीन हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। कभी आईआईटी कानपुर द्वारा तैयार की गई स्टडी रिपोर्ट अब साकार होती नजर आ रही है। साफ है कि गंगा रिवर फ्रंट कानपुर के विकास की कहानी में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है।


