काशी में अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा तोड़ने का विरोध:समाज में आक्रोश, धौलपुर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग

काशी में अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा तोड़ने का विरोध:समाज में आक्रोश, धौलपुर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग

काशी के मणिकर्णिका घाट पर लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को नगर निगम द्वारा तोड़े जाने की सूचना के बाद पाल-बघेल-धनगर-गडरिया समाज में रोष व्याप्त है। इस घटना के विरोध में अखिल भारतीय गडरिया गाडरी बघेल महासभा, धौलपुर ने जिला कलेक्टर के नाम अतिरिक्त जिला कलेक्टर हरिराम मीणा को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मामले में त्वरित और कठोर कार्रवाई की मांग की गई है। ज्ञापन में बताया गया कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर इंदौर रियासत की महान शासिका होने के साथ-साथ धर्मपरायण, समाज सुधारक और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण की प्रतीक थीं। उन्होंने काशी सहित देशभर में लगभग 12,672 मंदिरों, घाटों और धार्मिक स्थलों का पुनर्निर्माण कराया था, जो भारतीय इतिहास में उनका अतुलनीय योगदान दर्शाता है। महासभा ने ऐसी महान विभूति की प्रतिमा को तोड़ा जाना समाज की धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाने वाला कृत्य बताया है। महासभा के पदाधिकारियों ने इस घटना को अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि काशी बनारस जैसे पवित्र स्थल पर इस प्रकार की घटना होना पूरे समाज का अपमान है। पदाधिकारियों ने यह भी उल्लेख किया कि बनारस देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है, ऐसे में यहां इस तरह की लापरवाही या असंवेदनशीलता को और भी शर्मनाक बताया गया है। ज्ञापन में जिला कलेक्टर से चार प्रमुख मांगें रखी गईं। पहली, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। दूसरी, दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। तीसरी, लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को पुनः सम्मानपूर्वक उसी स्थान पर स्थापित कराया जाए। चौथी, भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं ताकि किसी भी समाज की भावनाएं आहत न हों। अखिल भारतीय गडरिया गाडरी बघेल महासभा, धौलपुर के जिला अध्यक्ष लाखन सिंह बघेल उर्फ बबलू राजालखेड़ा ने कहा कि समाज को पूर्ण विश्वास है कि जिला प्रशासन जनभावनाओं का सम्मान करते हुए शीघ्र उचित निर्णय लेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो समाज आंदोलन का रास्ता भी अपना सकता है।

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