प्रिंसिपल के कमरे में महिला टीचर ने की थी आत्महत्या:बाराबंकी में दो शिक्षकों पर केस दर्ज, प्रधानाध्यापिका की तंज से थी परेशान

प्रिंसिपल के कमरे में महिला टीचर ने की थी आत्महत्या:बाराबंकी में दो शिक्षकों पर केस दर्ज, प्रधानाध्यापिका की तंज से थी परेशान

बाराबंकी के हरख विकासखंड स्थित सरकारी स्कूल उधवापुर में महिला टीचर उमा वर्मा (40) का शव फंदे से लटका मिला था। पति ऋषि वर्मा की तहरीर पर विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका सीतावती गुप्ता और सहायक अध्यापक सुशील वर्मा के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और मानसिक प्रताड़ना का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। यह घटना 17 जनवरी को सतरिख थाना क्षेत्र स्थित कंपोजिट विद्यालय उधवापुर में हुई थी। नगर कोतवाली क्षेत्र के जलालपुर मोहल्ला निवासी उमा वर्मा विद्यालय में यूपीएस स्तर पर विज्ञान विषय की टीचर के पद पर तैनात थीं। उनके पति ऋषि वर्मा सिद्धौर ब्लॉक के यूपीएस टेड़वा विद्यालय में टीचर हैं। छात्रा ने बताया कि शनिवार को क्लास में कोई टीचर नहीं थे। इसके लिए टीचर को बुलाने गई। इसी दौरान प्रधानाध्यापिका के कमरे में उमा मैम का शव फंदे से लटकते हुए देखा। जिसके बाद स्कूल में मौजूद लोगों को बताया। उमा मैम बहुत अच्छा पढ़ाती थी। उनके पढ़ाने का तरीका बहुत अच्छा था। जिससे सभी को अच्छे से समझ आता था। पंखे से फंदे के सहारे लटका मिला था शव घटना वाले दिन शनिवार सुबह दोनों पति-पत्नी एक साथ घर से निकले थे। ऋषि वर्मा ने करीब साढ़े नौ बजे उमा वर्मा को विद्यालय छोड़ा था। उस समय विद्यालय में प्रभारी प्रधानाध्यापिका सहित 11 शिक्षक, तीन अनुदेशक और दो शिक्षामित्र मौजूद थे। विद्यालय की टीचर अर्चना वर्मा के अनुसार, उमा वर्मा रोज की तरह विद्यालय आई थीं और अन्य शिक्षकों के साथ बैठी थीं। कुछ देर बाद वह शौचालय जाने की बात कहकर उठीं, लेकिन सीधे प्रधानाध्यापक कक्ष में चली गईं। दोपहर करीब साढ़े ग्यारह बजे जब अन्य शिक्षक वहां पहुंचे, तो उन्होंने उमा वर्मा को पंखे से फंदे के सहारे लटका पाया। घटना उस समय हुई, जब विद्यालय छात्रों और स्टाफ से भरा हुआ था। इसके बावजूद प्रधानाध्यापक कक्ष में इस तरह की घटना होना कई सवाल खड़े करता है। खासकर तब जब कमरे का दरवाजा अंदर से बंद नहीं था। टीचर पर करते थे तंज और व्यंग्यात्मक टिप्पणी ऋषि वर्मा ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया है कि प्रभारी प्रधानाध्यापिका सीतावती गुप्ता और सहायक अध्यापक सुशील वर्मा लगातार उनकी पत्नी पर तंज कसते थे और व्यंग्यात्मक टिप्पणियां करते थे। वे अक्सर कहते थे, “तुम्हें तो सरकार से अवार्ड चाहिए।” इन टिप्पणियों के चलते उमा वर्मा मानसिक तनाव और अवसाद में थीं। परिजनों का कहना है कि आत्महत्या से पहले उमा वर्मा ने अपने वॉट्सऐप स्टेटस में लिखा था। “ऐसे लोगों के संग अब न रहना मुझे, जिनकी आदत परेशान करना मुझे… इसलिए अब बदलना है स्कूल मुझे।” परिजनों के अनुसार यह स्टेटस उनके मानसिक तनाव को स्पष्ट करता है। गौरतलब है कि वर्ष 2025 में उमा वर्मा के निर्देशन में तैयार किए गए एक शैक्षिक प्रोजेक्ट के लिए उनके विद्यालय के एक छात्र को मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया था। इस दौरान उमा वर्मा के शैक्षिक योगदान की भी सराहना हुई थी। आरोप है कि इसी उपलब्धि को लेकर उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। विद्यालय प्रशासन के अनुसार, स्कूल में कुल 330 छात्र पंजीकृत हैं। घटना के दो दिन बाद जब विद्यालय खुला, तो केवल एक-दो छात्र ही उपस्थित मिले, जबकि सभी 16 शिक्षक और पांच रसोइया मौजूद थे। थाना प्रभारी डीके सिंह ने बताया कि मृतका के पति की तहरीर के आधार पर प्रभारी प्रधानाध्यापिका और सहायक अध्यापक के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की गहन जांच की जा रही है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी नवीन कुमार पाठक ने बताया कि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। यदि इसमें कोई शिक्षक दोषी पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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