यमुनानगर के इस्माइलपुर गांव में शामलात भूमि विवाद:किसान विरोध के आगे फिर बैरंग लौटा प्रशासन, एक सप्ताह का दिया टाइम

यमुनानगर के इस्माइलपुर गांव में शामलात भूमि विवाद:किसान विरोध के आगे फिर बैरंग लौटा प्रशासन, एक सप्ताह का दिया टाइम

यमुनानगर के साढौरा ब्लॉक स्थित गांव इस्माइलपुर में शामलात भूमि की निशानदेही को लेकर एक बार फिर प्रशासन और किसानों के बीच टकराव की स्थिति बन गई। आज सोमवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट, भारी पुलिस बल के साथ पटवारी व कानूनगो गांव में निशानदेही के लिए पहुंचे, लेकिन ग्रामीणों और किसान यूनियन के कड़े विरोध के चलते प्रशासन को बिना कार्रवाई के ही वापस लौटना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि यह भूमि वर्ष 1923 से किसानों के कब्जे में है और पिछले 100 वर्षों से अधिक समय से किसान यहां खेती कर रहे हैं। किसानों को आशंका है कि सरकार निशानदेही के नाम पर उनकी जमीन पंचायत को सौंपना चाहती है, जबकि पंचायत का इस भूमि पर कोई अधिकार नहीं है। इसी कारण किसान और ग्रामीण किसी भी सूरत में निशानदेही नहीं होने देना चाहते। मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन का दिया हवाला सूचना मिलते ही भाकियू शहीद भगत सिंह किसान यूनियन के नेता भी गांव में पहुंच गए और प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। किसान नेता जयसिंह जलबेड़ा ने कहा कि सरकार की मंशा किसानों से जमीन छीनने की है, जिसे किसी भी कीमत पर पूरा नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसान अपनी जमीन बचाने के लिए एकजुट हैं और पीछे हटने वाले नहीं हैं। किसान नेता विक्रम राणा और हरमन सिंह ने बताया कि यह मामला फिलहाल हाईकोर्ट में विचाराधीन है और कोर्ट द्वारा स्टे लगाया गया है। स्टे के बावजूद प्रशासन द्वारा निशानदेही का प्रयास करना न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है। किसानों ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से मांग की कि जिला उपायुक्त से उनकी मुलाकात करवाई जाए और बैठकर इस विवाद का समाधान निकाला जाए। एक सप्ताह का दिया समय वहीं ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं पशु-चिकित्सक विक्रांत सिंह ने बताया कि किसानों को एक सप्ताह का समय दिया गया है ताकि वे उच्च अधिकारियों से मिलकर मामले को सुलझा लें। उन्होंने कहा कि यदि तय समय में समाधान नहीं हुआ तो प्रशासन फिर से निशानदेही की कार्रवाई करेगा। इस दौरान मौके पर जसप्रीत सिंह, शफी मोहम्मद, बलकार सिंह, अख्तर, पंकज, इसरान, सुलेमान, बलजीत सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं और किसान मौजूद रहे।

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