बजट के पहले युवाओं की राय : डिग्री है, नौकरी नहीं, दावों और हकीकत के बीच उलझा युवा

दमोह. बजट से पहले युवाओं की उम्मीदें एक बार फिर सरकार की ओर टिकी हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन उम्मीदों पर भारी पड़ती दिख रही है। मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार के बीते बजटों में युवाओं को रोजगार देने के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन हालात यह हैं कि डिग्री हाथ में होने के बावजूद हजारों युवा बेरोजगार हैं। सरकारी नौकरियों की भर्ती न के बराबर हुई, वहीं रोजगार मेला, अप्रेंटिस मेला और स्किल इंडिया जैसे कार्यक्रम कागजी प्रक्रिया तक सिमटकर रह गए।
सरकारी आंकड़ों में रोजगार के अवसर बढ़ते दिखाए जाते हैं, लेकिन युवा कहते हैं कि इन योजनाओं का सीधा लाभ 10 प्रतिशत युवाओं तक भी नहीं पहुंच पाया। आवेदन कराए गए, फॉर्म भरे गए, इंटरव्यू और काउंसलिंग में समय और पैसा खर्च हुआ, लेकिन नौकरी या स्थायी काम अब भी दूर है।

रोजगार मेले बने औपचारिकता
युवाओं की माने तो रोजगार मेलों में अधिकतर निजी कंपनियां कम वेतन, अस्थाई या लक्ष्य आधारित काम का प्रस्ताव देती हैं। अप्रेंटिसशिप के नाम पर कुछ महीनों की ट्रेनिंग तो मिल जाती है, लेकिन उसके बाद स्थायी नियुक्ति नहीं होती। स्किल इंडिया के तहत प्रशिक्षण लेने के बाद भी जॉब प्लेसमेंट की गारंटी नहीं है।

सरकारी नौकरी का इंतजार
सरकारी भर्तियों की स्थिति भी निराशाजनक है। कई विभागों में पद खाली हैं, लेकिन नई भर्तियां नहीं निकल रहीं। जो परीक्षाएं होती भी हैं, उनके परिणाम और नियुक्तियां लंबे समय तक अटकी रहती हैं। इससे युवाओं में हताशा और असुरक्षा बढ़ रही है। जिले में ३ हजार से अधिक युवा आउटसोर्स और कच्चे में सरकारी दफ्तरों में ड्यूटी कर रहे हैं, जिन्हें सरकार से उम्मीद है।

युवाओं के व्यू
मैंने ग्रेजुएशन करने के बाद दो साल से सरकारी नौकरी की तैयारी की है। न वैकेंसी निकल रही है, न पुरानी भर्तियों का रिजल्ट समय पर आ रहा है। रोजगार मेले में गया, लेकिन वहां 8-10 हजार की अस्थायी नौकरी ऑफर हुई। ऐसे में अब अपने पापा की ग्रॉसरी शॉप पर ही हाथ बंटा रहा हूं।
सानिध्य जैन, युवा

अप्रेंटिस मेला और स्किल ट्रेनिंग के नाम पर हमसे आवेदन भरवाए गए। छह महीने की ट्रेनिंग के बाद कोई जॉब नहीं मिली। बजट में हर साल युवाओं की बात होती है, लेकिन कोई सुरक्षित और स्थाई रोजगार अब भी सपना है। ऐसे में अपने पिता की पान की दुकान पर ही सेवा दे रहा हूं। सरकारी नौकरी भी नहीं है।
कृष्णा चौरसिया, युवा

डिग्री लेकर घर बैठा हूं। निजी कंपनियां अनुभव मांगती हैंए, अनुभव कहां से लाएं। सरकारी नौकरी साल भर से नहीं मिली। बजट में सिर्फ घोषणाएं नहीं, टाइम बाउंड भर्ती और स्थानीय स्तर पर रोजगार चाहिए। आगामी बजट में केवल योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि स्पष्ट भर्ती कैलेंडर, स्थायी रोजगार, स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा और अप्रेंटिसशिप के बाद जॉब की गारंटी जैसे ठोस प्रावधान किए जाएं।
अंकित उपाध्याय, युवा


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