CGMSC घोटाला…कारोबारी चाेपड़ा को आज कोर्ट में पेश करेगी ED:660 करोड़ के दवा-रीएजेंट खरीदी मामले में चोपड़ा ने ED को बताया 6 कारोबारियों का नाम, जांच का दायरा बढ़ाया अफसरों ने

CGMSC घोटाला…कारोबारी चाेपड़ा को आज कोर्ट में पेश करेगी ED:660 करोड़ के दवा-रीएजेंट खरीदी मामले में चोपड़ा ने ED को बताया 6 कारोबारियों का नाम, जांच का दायरा बढ़ाया अफसरों ने

छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) के 660 करोड़ रुपए के बहुचर्चित दवा और मेडिकल उपकरण (रीएजेंट) खरीदी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। दुर्ग स्थित मोक्षित कॉरपोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा से रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। इसके आधार पर ईडी ने छह कारोबारियों और सहयोगियों को जांच के घेरे में लिया है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस मामले में गिरफ्तारी भी हो सकती है। शशांक चोपड़ा 19 जनवरी तक ईडी ने रिमांड पर लिया था। रिमांड में चोपड़ा ने पूछताछ के दौरान 6 सहयोगी कारोबारियों के नाम, टेंडर प्रक्रिया, कमीशन सिस्टम, फर्जी आपूर्ति, काले धन के नेटवर्क और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन को लेकर जानकारी दी है। इस घोटाले की समानांतर जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) भी कर रहा है। शशांक चोपड़ा की पांच दिन की ईडी रिमांड सोमवार को समाप्त हो रही है। इसके बाद उसे विशेष कोर्ट में पेश किया जाएगा। आने वाले दिनों में कार्रवाई होगी तेज ईडी सूत्रों के मुताबिक, रिमांड के दौरान शशांक के सामने फर्जी बिल, बैंक ट्रांजैक्शन और आपूर्तिकर्ता कंपनियों के नेटवर्क से जुड़े दस्तावेज रखे गए। साथ ही घोटाले में शामिल अन्य संदिग्धों की भूमिका पर भी सवाल किए गए। इससे जांच एजेंसी को नए सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर कार्रवाई तेज की जा सकती है। सहयोगियों की बढ़ेंगी मुश्किलें रीएजेंट घोटाले के मास्टरमाइंड माने जा रहे शशांक चोपड़ा से मिली जानकारी के बाद ईडी अब फाइनेंशियल चैनलों और बेनामी लेनदेन की जांच आगे बढ़ाएगी। इससे घोटाले में शामिल कई अन्य लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ईडी जांच में CGMSC के अधिकारियों डॉ. अनिल परसाई, दीपक कुमार बांधे, बसंत कुमार कौशिक, कमलकांत पाटनवार और क्षिरोद रौतिया पर शशांक को संरक्षण देने के गंभीर आरोप हैं। ये सभी फिलहाल रायपुर जेल में बंद हैं। 750 करोड़ की खरीदी से सरकार को आर्थिक नुकसान उल्लेखनीय है कि तत्कालीन IAS और IFS अधिकारियों सहित अन्य अफसरों ने आपूर्तिकर्ताओं से मिलीभगत कर महज 27 दिनों में करीब 750 करोड़ रुपए की दवाओं और उपकरणों की खरीदी की थी, जिससे सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

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