‘आयुष अंकल धूप में नंगे पैर खड़ा रखते थे’:प्रतीक की हत्या के बाद बच्चों को भूखा रखा, खाना मांगने पर पड़े थप्पड़

‘आयुष अंकल धूप में नंगे पैर खड़ा रखते थे’:प्रतीक की हत्या के बाद बच्चों को भूखा रखा, खाना मांगने पर पड़े थप्पड़

दादी, हम लोगों को आयुष अंकल दो–दो घंटों तक धूप में छत पर नंगे पांव खड़ा रखते थे… उंगलियों में पेंसिल फंसा कर दबा देते थे… कमरे में पंजे के बल हाथ ऊपर कर खड़ा कर देते थे…रोने पर नीम की छड़ी से पीटा जाता था। सजा मिलने पर रोना और चिल्लाना मना था, खाना मांगने पर अंकल थप्पड़ मारते थे। हम लोग रोते तो मम्मी कहती– अंकल पढ़ाई के मारते हैं, अच्छे से पढ़ाई किया करो। यह दर्द का नौबस्ता में रहने वाले मेडिकल स्टोर संचालक प्रतीक शर्मा के मासूम बच्चे अभिराज और अभिश्री का, जो घटना के एक माह बाद वह अपनी दादी गायत्री शर्मा से मिले तो उन्होंने अपना दर्द बयां किया था। 16 जनवरी को प्रतीक के हत्यारी पत्नी नेहा और उसके प्रेमी आयुष को एडीजे–20 नीलांजन की कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई, जिसमें प्रतीक की करीब 8 साल की बेटी अभिश्री के बयान अहम साबित हुए। घटना को करीब 2 साल का समय बीतने वाला है, लेकिन प्रतीक के परिजनों का जख्म अभी भी नहीं भरा है। पिता बोले- बेटे की आखिरी बार शक्ल भी नहीं देख सका दैनिक भास्कर एप टीम के प्रतीक के घर पूरी घटना की जानकारी करने पहुंची, तो रायबरेली में सप्लाई इंस्पेक्टर से रिटायर्ड पिता पुनीत कुमार शर्मा ने प्रतीक के बच्चों अभिराज और अभिश्री को दूसरे कमरे में भेज दिया। उन्होंने बताया कि बच्चों पर बुरा असर न पड़े इसके लिए वह उनके सामने कोई बात नहीं करते। बच्चे रोज मां–बाप को पूछते थे, बड़ी मुश्किल से उन्हें बहलाया है। पुनीत ने बताया कि उनकी पत्नी की 2020 में मौत हो गई, फिर मार्च 2024 में बेटे की हत्या कर दी गई, उसकी शक्ल तक आखिरी बार देखना नसीब नहीं हो सका। मैं अकेला बूढ़ा, उसके साथ ही छोटे–छोटे बच्चों की जिम्मेदारियों ने तोड़ कर रख दिया, लेकिन बेटे के हत्यारों को सजा दिलानी थी, इसलिए लड़ा। बेटा तो वापस नहीं आ सकता, लेकिन उसके हत्यारों को उम्रकैद की सजा हो गई, इससे दिल को थोड़ी राहत है। मेरी लड़ाई में छोटे भाई डॉ अरुण कुमार शर्मा और उसकी पत्नी गायत्री ने पूरा साथ दिया। जिस दिन से पुलिस ने बच्चों को सौंपा है, उनको गायत्री ने ही पाला है। बुजुर्ग पिता ने डबडबाती आंखों से बताया कि– 6 मार्च 2024 को प्रतीक, नेहा और बच्चों को फैजाबाद गया, इसके बाद वापस नहीं आया। प्रतीक के मोबाइल से आयुष ने किया था फोन 12 मार्च को नेहा बच्चों के साथ लौटी तो उसने बाराबंकी में गाड़ी खराब होने की बात कही, फिर 16 मार्च को बच्चों को दिलाने की बात कहकर चली गई और वापस नहीं लौटी। 16 मार्च की शाम को प्रतीक के मोबाइल से फोन आया और उसने कहा कि नेहा से बात कर लो, वह आवाज प्रतीक की नहीं थी। नेहा ने मध्य प्रदेश जाने की बात कही, मोबाइल स्विच ऑफ हो गया। वाट़्सएप मैसेज किया तो रिप्लाई नहीं किया गया। आयुष को फोन किया तो उसने खुद के जबलपुर में होने की बात कहते हुए कहा कि–प्रतीक पर बहुत कर्जा हो गया था, वह जल्द ही आ जाएगा। गुमशुदगी दर्ज कराने पर एक महीने बाद बेटे के मर्डर की जानकारी मिली। दादी बोलीं- बच्चों को देखकर आत्मा फट गई थी गायत्री ने बताया कि बच्चे जब उनके पास आए तो पूरी तरह से बदहवास थे। उनकी हालत भिखारियों से भी बदतर थी। आयुष और नेहा उन्हें लेकर एक महीने तक मध्य प्रदेश में ठहरे थे। 2 साल के अभिराज और 5 साल की अभिश्री ने गायत्री को बताया कि आयुष अक्सर उनको पीटता था, भूखा रखता था, धूप में दौड़ाता था… और मां कुछ बोलती भी नहीं थी। वह कहती थीं कि तुम लोग पढ़ते नहीं हो इसलिए अंकल तुम्हे मारते हैं। गायत्री ने कहा– कि जब मेरे पास बच्चे आए तो उनके पैरों में छाले पड़े हुए थे, उन बच्चों को देख कर आत्मा फट सी गई थी। अभिराज और अभिश्री बहुत रोते थे, हर वक्त अपने मां बाप को पूछते थे, उन्हें कहानियां सुनाकर फुसलाते थे। बताया कि मैं कई बीमारियों से ग्रसित हूं, लेकिन फिर भी बच्चों की परवरिश में कोई कसर नहीं छोड़ी। अभिराज अब भूल रहा है, लेकिन अभिश्री आज भी अपने पापा को याद करती है। अब जानिए पूरा मामला… किदवई नगर वाई ब्लााक निवासी पुनीत कुमार शर्मा ने नौबस्ता थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा था कि उनके इकलौते बेटे प्रतीक की शादी फैजाबाद की नेहा शर्मा के साथ वर्ष 2017 में हुई थी। बेटा मेडिकल स्टोर चलाता था। छह मार्च 2024 को नेहा बेटे प्रतीक और बच्चों पांच साल की मान्या और तीन साल के अभिराज को लेकर फैजाबाद स्थित मायके गई थी। 12 मार्च को वह बच्चों के साथ वापस आ गई लेकिन बेटा नहीं आया। पूछने पर बहू ने बताया कि रास्ते में गाड़ी खराब हो गई थी। दो तीन दिन में वापस आ जाएंगे। इसके बाद उन्होंने बेटे के मोबाइल पर फोन किया लेकिन संपर्क नहीं हो सका। 16 मार्च 2024 को बहू पोते अबिराज को दवा दिलाने के बात कहकर दोनों बच्चों को लेकर चली गई और वापस नहीं लौटी। इस पर नौबस्ता थाने में बेटा बहू और दोनों बच्चों की गुमशुदगी दर्ज करायी। इसी बीच पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू की तो पता चला कि नेहा के संबंध प्रतीक के दोस्त आयुष से हो गए थे। इन लोगों ने साजिश के तहत लखनऊ ले जाकर आयुष को जहर दे दिया। लखनऊ में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया। नौबस्ता पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर दोनों आरोपितों को गिरफ्तार किया था। कोर्ट में प्रतीक की बेटी अभिश्री ने बताया था कि हम लोग पांच दिनों तक लखनऊ के एक होटल में रहे, पापा और आयुष खाना लेने जाते थे। बेटी ने गवाही से हुई सजा एक दिन मैने देखा कि आयुष गिलास में कुछ सफेद सी चीज पानी में मिला रहा था, इसके बाद मम्मी ने पापा को वो पिला दिया, जिसके बाद पापा के खर्राटे बंद हो गए। फिर मम्मी पापा को एंबुलेंस से हॉस्पिटल लेकर पहुंची और आयुष मुझे और अभिराज को अपनी कार से ले गए। कुछ समय बाद मम्मी पापा को हॉस्पिटल में छोड़ कर चली आईं थी। कोर्ट ने आयुष और नेहा को उम्रकैद और 30–30 हजार जुर्माने की सजा सुनाई थी।

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