बिहार के नवादा जिले के दो भाइयों की मेहनत और सफलता की कहानी युवाओं को नई दिशा देने वाली है। टेक्सटाइल डिजाइनर राहुल कुमार और मैकेनिकल इंजीनियर विकास कुमार ने नौकरी छोड़कर प्लास्टिक कचरे से उपयोगी और टिकाऊ उत्पाद बनाने का सपना देखने वाले इन दोनों भाइयों की कंपनी ‘माइनस डिग्री’ के उत्पाद आज लगभग देशभर में पहुंच चुके हैं। इन दोनों भाई की कहानी बताती है कि छोटे शहर से निकलकर भी बड़े सपनों को साकार किया जा सकता है। कोरोना काल में वर्ष 2020 में शुरू हुई सोच को उन्होंने 2021 में कंपनी के रूप में पंजीकृत कराया। मात्र 10 हजार रुपए की पूंजी से शुरू हुई यह यात्रा शुरुआती दो वर्षों तक संघर्ष से भरी रही, लेकिन 2023 में कंपनी ने रफ्तार पकड़ी और आज इसका सालाना रेवेन्यू एक करोड़ रुपए हो चुका है। राहुल ने निफ्ट दिल्ली से टेक्सटाइल डिजाइनिंग और विकास ने आईआईटी दिल्ली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। दोनों ने अच्छी तनख्वाह वाली नौकरियों को छोड़कर पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक बदलाव के रास्ते पर चलने का निर्णय लिया। आज उनकी कंपनी प्लास्टिक वेस्ट से पेन स्टैंड, मेडल, की-चेन, फ्रिज मैग्नेट और मार्बल और प्लाई के विकल्प के रूप में टिकाऊ प्लास्टिक शीट जैसे उत्पाद तैयार कर रही है। 250 टन प्लास्टिक की रिसाइकिलिंग राष्ट्रपति भवन स्थित शॉप में उनके उत्पादों की बिक्री और करीब एक लाख रुपए का ऑर्डर मिलना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है। राहुल बताते हैं कि एक होटल में प्रोडक्ट पिच के दौरान संयोगवश राष्ट्रपति भवन से जुड़े इस शॉप के एक अधिकारी से मुलाकात हुई, जिन्हें उनके उत्पाद पसंद आए और वहीं से यह ऐतिहासिक कनेक्शन बना। उन्होंने बताया कि अब तक ‘माइनस डिग्री’ 250 टन से अधिक प्लास्टिक का रिसाइकिलिंग कर चुकी है। 14 से 16 परिवारों को रोजगार दे रही है। बिहार सरकार से मिले 10 लाख रुपए के ऋण से कंपनी को और विस्तार मिला है। गाजियाबाद से संचालित यह यूनिट को बिहार में भी स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। बिहार के नवादा जिले के दो भाइयों की मेहनत और सफलता की कहानी युवाओं को नई दिशा देने वाली है। टेक्सटाइल डिजाइनर राहुल कुमार और मैकेनिकल इंजीनियर विकास कुमार ने नौकरी छोड़कर प्लास्टिक कचरे से उपयोगी और टिकाऊ उत्पाद बनाने का सपना देखने वाले इन दोनों भाइयों की कंपनी ‘माइनस डिग्री’ के उत्पाद आज लगभग देशभर में पहुंच चुके हैं। इन दोनों भाई की कहानी बताती है कि छोटे शहर से निकलकर भी बड़े सपनों को साकार किया जा सकता है। कोरोना काल में वर्ष 2020 में शुरू हुई सोच को उन्होंने 2021 में कंपनी के रूप में पंजीकृत कराया। मात्र 10 हजार रुपए की पूंजी से शुरू हुई यह यात्रा शुरुआती दो वर्षों तक संघर्ष से भरी रही, लेकिन 2023 में कंपनी ने रफ्तार पकड़ी और आज इसका सालाना रेवेन्यू एक करोड़ रुपए हो चुका है। राहुल ने निफ्ट दिल्ली से टेक्सटाइल डिजाइनिंग और विकास ने आईआईटी दिल्ली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। दोनों ने अच्छी तनख्वाह वाली नौकरियों को छोड़कर पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक बदलाव के रास्ते पर चलने का निर्णय लिया। आज उनकी कंपनी प्लास्टिक वेस्ट से पेन स्टैंड, मेडल, की-चेन, फ्रिज मैग्नेट और मार्बल और प्लाई के विकल्प के रूप में टिकाऊ प्लास्टिक शीट जैसे उत्पाद तैयार कर रही है। 250 टन प्लास्टिक की रिसाइकिलिंग राष्ट्रपति भवन स्थित शॉप में उनके उत्पादों की बिक्री और करीब एक लाख रुपए का ऑर्डर मिलना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है। राहुल बताते हैं कि एक होटल में प्रोडक्ट पिच के दौरान संयोगवश राष्ट्रपति भवन से जुड़े इस शॉप के एक अधिकारी से मुलाकात हुई, जिन्हें उनके उत्पाद पसंद आए और वहीं से यह ऐतिहासिक कनेक्शन बना। उन्होंने बताया कि अब तक ‘माइनस डिग्री’ 250 टन से अधिक प्लास्टिक का रिसाइकिलिंग कर चुकी है। 14 से 16 परिवारों को रोजगार दे रही है। बिहार सरकार से मिले 10 लाख रुपए के ऋण से कंपनी को और विस्तार मिला है। गाजियाबाद से संचालित यह यूनिट को बिहार में भी स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है।


