प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में भारतीय किसान यूनियन ने राष्ट्रीय चिन्तन शिविर लगाया। किसान, मजदूर, नौजवानों के बीच भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत जमकर गरजे। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत सरकार पर फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को लेकर किसी भी प्रकार का दबाव न बनाएद्ध भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां की अर्थव्यवस्था का आधार किसान हैं।
ऐसे में भारत सरकार को किसानों के हितों की रक्षा के लिए संरक्षणवादी कृषि नीति अपनानी चाहिए। कहा कि अंतरराष्ट्रीय समझौते में देश के किसानों, मजदूरों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हितों से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐलान किया कि 16 फरवरी को उत्तर प्रदेश के सीतापुर, 17 फरवरी को बाराबंकी, 18 फरवरी को बहराइच, 19 फरवरी को फतेहपुर, 20 फरवरी को मथुरा में किसान पंचायतों का आयोजन किया जाएगा। 21 फरवरी को अमरोहा, बिजनौर और मुरादाबाद तीनों जनपदों की एक संयुक्त विशाल किसान पंचायत आयोजित होगी। इसके बाद 22 फरवरी को मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत और मेरठ जनपदों की संयुक्त किसान पंचायत का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में किसान भाग लेंगे। किसान यूनियन ने पीएम को भेजा अधिकार पत्र 15,16,17,18 जनवरी 2026 को माघ मेले में आयोजित राष्ट्रीय चिन्तन शिविर में देशभर से पहुंचे किसानों, मजदूरो, नौजवानो, आदिवासियों, बेरोजगार व महिलाओं की ओर से किसान यूनियन ने पीएम मोदी के नाम एक अधिकार भेजने का ऐलान किया। अधिकार पत्र में ये हैं मांगे 1. सभी फसलों के लिए एमएसपी प्रतिशत के साथ गारंटीड खरीद हेतु संसद और सभी राज्य विधानसभाओं में तुरंत कानून पारित करें। 3. बिजली बिल 2025 तुरंत वापस लिया जाए। 4. हाल में अधिसूचित 4 श्रम संहिताएं तुरंत वापस ली जाएं। 5. मनरेगा या उससे परिवर्तित योजना में बजट बढ़ाकर 200 दिन का काम तथा 700 रुपये दैनिक मजदूरी सुनिश्चित की जाए। 6. भारत पर 50 प्रतिशत अमेरिकी शुल्क को देश की संप्रभुता पर हमला मानते हुए सख्त प्रतिकारी कार्रवाई की जाए तथा भारतीय गणराज्य की गरिमा की रक्षा की जाए। 7. 84000 करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी बहाल की जाए, डीएपी और यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा काला बाज़ारी बंद की जाए। 8. सभी भीषण बाढ़ और भूस्खलनों को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए। 9. जनता पर बुलडोज़र राज समाप्त किया जाए। पुनर्वास और पुनर्स्थापन के बिना भूमिहीनों और गरीबों का विस्थापन रोका जाए। 10. राज्यों के संघीय अधिकारों की रक्षा की जाए।


