मेरठ फुटबॉल एसोसिएशन (एमएफए) द्वारा आयोजित जिला फुटबॉल लीग प्रतियोगिता गंभीर विवादों में घिर गई है। स्थानीय क्लबों और खेल प्रेमियों ने एमएफए पर मैच फिक्सिंग और अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है। इस मामले के सामने आने के बाद जिले के फुटबॉल जगत में हलचल मच गई है। आरोप है कि ग्रुप स्टेज के महत्वपूर्ण मैचों में क्वालीफिकेशन प्रभावित करने के लिए परिणामों को पूर्व-निर्धारित किया गया। विशेष रूप से अजेक्स फुटबॉल क्लब और मेरठ स्पोर्टिंग क्लब के बीच हुए मैच पर सवाल उठाए जा रहे हैं। दावा किया गया है कि जेनएक्स फुटबॉल क्लब को टूर्नामेंट से बाहर करने के उद्देश्य से दोनों टीमों के बीच जानबूझकर 1-1 का ड्रॉ कराया गया, जबकि जेनएक्स एफसी का प्रदर्शन बेहतर था। इसके अलावा, जेनएक्स एफसी का गोल अंतर अन्य टीमों से बेहतर होने के बावजूद, एमएफए ने एआईएफएफ के नियमों का उल्लंघन करते हुए हेड-टू-हेड नियम लागू किया। इससे क्लब प्रतियोगिता से बाहर हो गया। क्लब अधिकारियों ने बताया कि यह पहली बार नहीं है; ऐसी अनियमितताएं हर टूर्नामेंट में सामने आती रही हैं, लेकिन शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। खिलाड़ियों, कोचों और फुटबॉल प्रशंसकों ने एमएफए के इस निर्णय पर असंतोष जताया। उन्होंने एमएफए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए एआईएफएफ और उत्तर प्रदेश फुटबॉल एसोसिएशन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की गई है। फिलहाल एमएफए की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि उच्चस्तरीय जांच से सच्चाई सामने आएगी और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा।


