भाई सरकारी नौकरी में फिर भी बहन अनुकंपा नियुक्ति की हकदार, बशर्ते..हाईकोर्ट का फैसला

भाई सरकारी नौकरी में फिर भी बहन अनुकंपा नियुक्ति की हकदार, बशर्ते..हाईकोर्ट का फैसला

High Court: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी परिवार का सदस्य पहले से सरकारी नौकरी में है, लेकिन वह परिवार से अलग रहता है, तो इससे किसी की अनुकंपा नियुक्ति निरस्त नहीं की जा सकती। कोर्ट का ये फैसला देवास प्रेस नोट से बिना जांच के नौकरी से बर्खास्त की गई याचिका पर आया है। कोर्ट ने अहम फैसला लेते हुए महिला की नौकरी बहाल करते हुए बकाया वेतन देने के आदेश भी दिए हैं।

ये है पूरा मामला ?

देवास की रहने वाली मनीषा ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें उसने बताया था कि उसके पिता बैंक नोट प्रेस देवास में सीनियर चेकर थे। सेवा अवधि के दौरान ही पिता का निधन हो गया था, पिता की मौत के बाद मां भी निधन हो गया इस तरह से वो पूरी तरह से निराश्रित हो गई थी। शैक्षणिक योग्यता और विभागीय सत्यापन के बाद जनवरी 2025 में उसे जूनियर ऑफिसर असिस्टेंट के पद पर देवास नोट प्रेस में अनुकंपा नियुक्ति मिली। लेकिन नियुक्ति के करीब चार महीने बाद ही मई 2025 में उन्हें एक नोटिस विभाग की ओर से भेजा गया जिसमें आरोप लगाया कि आपके (मनीषा) के द्वारा ये जानकारी छिपाई गई है कि उसका भाई पहले से पुलिस विभाग में पदस्थ है। मनीषा ने इसका जवाब भी दिया और बताया कि बड़ा भाई साल 2013 से पुलिस में है और अपने परिवार के साथ अलग रहता है। वो न तो पिता पर आश्रित था और न ही पिता की मौत के बाद उसकी जिम्मेदारी उठा रहा है। लेकिन इसके बावजूद विभाग ने उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया।

कोर्ट का अहम फैसला

मनीषा की याचिका पर जस्टिस जय कुमार पिल्लई की कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने देवास नोट प्रेस द्वारा बिना जांच महिला की नौकरी समाप्त करने के फैसले को खत्म करते हुए उनकी नौकरी बहाल कर दी। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा नौकरी से बर्खास्त करने से पहले विभाग ने कोई विधिवत विभागीय जांच नहीं की। कोर्ट ने ये भी कहा कि याचिकाकर्ता का भाई मृत कर्मचारी यानी पिता पर आश्रित नहीं था और उसका अपना अलग परिवार है, इसलिए उसे अनुकंपा नियुक्ति योजना के तहत बाधा नहीं माना जा सकता। इसलिए याचिकाकर्ता अनुकंपा नियुक्ति की पात्र है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता मनीषा को तत्काल ‘जूनियर ऑफिस असिस्टेंट’ के पद पर दोबारा बहाल किया जाए। साथ ही बर्खास्तगी की तारीख से लेकर पुन: नियुक्ति तक की पूरी अवधि का वेतन, सेवा में निरंतरता और अन्य सभी परिणामी लाभ दिए जाएं।

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