गोरखपुर में जामिया अल इस्लाह एकेडमी नौरंगाबाद गोरखनाथ, सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार और मदरसा रज़ा-ए-मुस्तफा तुर्कमानपुर में इस्लामी अकीदे की पांच सप्ताह की विशेष कार्यशाला जारी है। दूसरे सप्ताह के सत्र में पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के इल्म-ए-गैब (छुपी बातों का ज्ञान) विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यशाला की शुरुआत कुरआन-ए-पाक की तिलावत से हुई। गैब का ज़ाती इल्म अल्लाह के पास बताया गया
मुख्य वक्ता कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि कुरआन के अनुसार गैब का ज़ाती (निजी) इल्म अल्लाह के पास है और वही अपनी मर्जी से चुने हुए रसूलों व नबियों को गैब की खबरें देता है। उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम को मिला इल्म-ए-गैब अल्लाह की अता है और यह वही (विशेष संदेश) के जरिए प्रदान किया गया। उनका कहना था कि इस इल्म का उद्देश्य अल्लाह का संदेश स्पष्ट रूप से लोगों तक पहुंचाना और दीन की राह दिखाना है। अध्यक्षता कर रहे हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि अल्लाह का इल्म अज़ली (हमेशा से) और अबदी (हमेशा रहने वाला) है। उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम को कायनात, भविष्य की घटनाओं, पिछली उम्मतों और दैवी संदेशों से संबंधित कई बातों का इल्म अल्लाह की अता के तहत प्रदान किया गया। उन्होंने इसे पैगंबर-ए-इस्लाम को दी गई विशेष क्षमता बताया, जिसका आधार वही और दैवी संदेश हैं। कार्यशाला के उद्देश्य और सहभागिता पर भी चर्चा
आयोजकों के अनुसार इस्लामी अकीदे पर आधारित पांच सप्ताह की इस कार्यशाला का उद्देश्य समुदाय में धार्मिक अवधारणाओं को अध्ययन, विचार-विमर्श और तर्क आधारित समझ के साथ प्रस्तुत करना है। कार्यशाला में हर सप्ताह अलग विषय पर चर्चा हो रही है, जिसमें उलेमा व वक्ताओं द्वारा संबंधित मुद्दों को कुरआन, हदीस और स्थापित इस्लामी स्रोतों के आधार पर समझाया जाता है। समापन में दुरूद-ओ-सलाम के बाद आपसी भाईचारे, समाजी सेवा और अमन-शांति की दुआ की गई। आयोजकों ने बताया कि तीसरे सप्ताह में अकीदे से संबंधित अन्य विषयों पर चर्चा होगी। कार्यक्रम में उलेमा, स्थानीय पुरुषों के साथ बड़ी संख्या में महिलाओं की सहभागिता रही। इनमें मुजफ्फर हसनैन रूमी, आसिफ महमूद, सैयद नदीम अहमद, खुर्शीद खान, अली अफसर, शीराज सिद्दीकी समेत कई लोग मौजूद रहे।


