दरभंगा में रविवार को हाईकोर्ट के आदेश पर 4 दुकानों को तोड़ने जिला प्रशासन और दरभंगा नगर निगम की टीम बुलडोजर लेकर पहुंची। दुकानों के पीछे शिक्षक सोनू चौधरी का घर है। आदेश के अनुसार दुकानों को हटाकर सोनू चौधरी को 40 फीट का रास्ता देना है। इसी के लिए टीम दुकानों को हटाने पहुंची थी। जिसके बाद दुकानदारों ने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इन्हें हटाने के लिए लाठीचार्ज भी हुआ। कार्रवाई की सूचना मिलने पर स्थानीय पत्रकार पहुंचे। पत्रकार वीडियो बना रहे थे। तभी दरभंगा नगर निगम के उप नगर आयुक्त जय चंद्र अकेला ने पत्रकारों को वीडियो बनाने से रोक दिया। आरोप है कि धक्का भी दिया गया। मोबाइल छीनने की कोशिश की गई। कहा गया कि ‘आप लोग पीछे से वीडियो बनाइए।’ पत्रकार लगातार पूछते रहे कि मीडिया कवरेज की अनुमति है या नहीं, लेकिन उप नगर आयुक्त ने इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। वीडियो में उन्हें पुलिस बल को यह कहते हुए सुना गया कि ‘इन लोगों को हटाइए। दुकानदारों ने कहा, पहले नई दुकान बनाकर देनी थी धरना दे रहे दुकानदारों का कहना है कि हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि पहले दुकानदारों को नई दुकान बनाकर आवंटित की जाए, उसके बाद ही पुरानी दुकानों को तोड़ा जाए। यह रास्ता मकान मालिक और शिक्षक सोनू चौधरी को उनके आवास तक आने-जाने के लिए दिया जाना है। कार्रवाई के दौरान सिविल कोर्ट दरभंगा, अंचल अधिकारी, नगर निगम के पदाधिकारी और भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर मौजूद थे। इससे पहले दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर टूटने वाली दुकानों के सामने धरना शुरू कर दिया था। लहेरियासराय टावर से चट्टी चौक तक पूरा बाजार बंद रहा। बुलडोजर चलाकर चारों दुकानों को तोड़ दिया गया। दुकानदारों का आरोप है कि यह कार्रवाई पूरी तरह तानाशाहीपूर्ण है। आदेश के वक्त दुकानदारों को पक्षकार नहीं बनाया गया था स्थानीय व्यवसायी अशोक नायक ने बताया, ‘यह बीके रोड है, जहां नगर निगम की कुल 74 पक्की दुकानें हैं। इनका निर्माण 1974-75 में हुआ था और उसी समय दुकानदारों को आवंटन दिया गया था। तब से हम लोग किराएदार के रूप में यहां व्यवसाय कर रहे हैं। आरओबी निर्माण के दायरे में 74 में से 61 दुकानें आ रही हैं। निर्माण एजेंसी ने नगर निगम को पत्र देकर दुकानें खाली कराने को कहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि 1996 का एक मामला, जिसमें 40 फीट सड़क देने का आदेश दिया गया था। उसमें दुकानदारों को पक्षकार नहीं बनाया गया, नगर निगम ने उस केस को गंभीरता से नहीं लिया, बाद में उसी फैसले के आधार पर अब कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाईकोर्ट में नगर निगम की ओर से दिए गए एफिडेविट में छह महीने में नई दुकान बनाकर देने की बात कही गई थी, लेकिन सच्चाई छिपाई गई। इस तरह की कार्रवाई सही नहीं है दुकानदार राजीव चौधरी ने कहा कि यह लाठी-गोली की सरकार है। इतने लोग शांतिपूर्ण तरीके से बैठे हैं, फिर भी जबरदस्ती की जा रही है। यह बना-बनाया पक्का मकान है, लाखों की संपत्ति है। एक व्यक्ति के बहकावे में प्रशासन तोड़फोड़ करने आया है। दुकानदार शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं और इस तरह की कार्रवाई पूरी तरह गलत है। दादाजी ने मुकदमा दायर किया था शिक्षक सोनू चौधरी ने कहा कि आज न्यायालय के आदेश का क्रियान्वयन हुआ है। इसके लिए मैं अदालत का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। नगर निगम के अधिकारी, पुलिस पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, दरभंगा के जिलाधिकारी सहित जिन लोगों के सहयोग से मुझे मुझे रास्ता मिला, उन सभी को तहेदिल से धन्यवाद देता हूं।
रास्ते की लड़ाई नई नहीं है। 1976 में मेरे दादाजी ने इसको लेकर मुकदमा दायर किया था। दुर्भाग्यवश मेरे दादाजी और पिता दोनों ही दुनिया में नहीं हैं। मैं तीसरी पीढ़ी हूं। अब न्याय मिला है। यह मेरे परिवार के लिए न्याय की जीत है। मैं मीडिया को क्यों रोकूंगा उपनगर आयुक्त जयचंद्र अकेला ने बताया कि मौके पर जेसीबी से कार्य चल रहा था और ऊपर से हाई टेंशन तार गुजर रहा था। दुर्घटना से बचने के लिए आम लोगों और वहां मौजूद सभी व्यक्तियों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए कहा गया था। किसी भी पत्रकार को कवरेज से नहीं रोका। मुझे यह जानकारी नहीं है कि वहां कौन-कौन पत्रकार थे, लेकिन प्रिंट मीडिया और अन्य मीडिया के सभी लोग शालीनता पूर्वक कवरेज कर रहे थे। मैंने किसी को एक बार भी नहीं रोका। मैं मीडिया को क्यों रोकूंगा ? उप नगर आयुक्त ने कहा कि लोगों को हटाने का उद्देश्य केवल सुरक्षा था। यदि भीड़ को नियंत्रित नहीं किया जाता तो कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। प्रशासन की प्राथमिकता किसी भी अप्रिय घटना को रोकना था। दरभंगा में रविवार को हाईकोर्ट के आदेश पर 4 दुकानों को तोड़ने जिला प्रशासन और दरभंगा नगर निगम की टीम बुलडोजर लेकर पहुंची। दुकानों के पीछे शिक्षक सोनू चौधरी का घर है। आदेश के अनुसार दुकानों को हटाकर सोनू चौधरी को 40 फीट का रास्ता देना है। इसी के लिए टीम दुकानों को हटाने पहुंची थी। जिसके बाद दुकानदारों ने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इन्हें हटाने के लिए लाठीचार्ज भी हुआ। कार्रवाई की सूचना मिलने पर स्थानीय पत्रकार पहुंचे। पत्रकार वीडियो बना रहे थे। तभी दरभंगा नगर निगम के उप नगर आयुक्त जय चंद्र अकेला ने पत्रकारों को वीडियो बनाने से रोक दिया। आरोप है कि धक्का भी दिया गया। मोबाइल छीनने की कोशिश की गई। कहा गया कि ‘आप लोग पीछे से वीडियो बनाइए।’ पत्रकार लगातार पूछते रहे कि मीडिया कवरेज की अनुमति है या नहीं, लेकिन उप नगर आयुक्त ने इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। वीडियो में उन्हें पुलिस बल को यह कहते हुए सुना गया कि ‘इन लोगों को हटाइए। दुकानदारों ने कहा, पहले नई दुकान बनाकर देनी थी धरना दे रहे दुकानदारों का कहना है कि हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि पहले दुकानदारों को नई दुकान बनाकर आवंटित की जाए, उसके बाद ही पुरानी दुकानों को तोड़ा जाए। यह रास्ता मकान मालिक और शिक्षक सोनू चौधरी को उनके आवास तक आने-जाने के लिए दिया जाना है। कार्रवाई के दौरान सिविल कोर्ट दरभंगा, अंचल अधिकारी, नगर निगम के पदाधिकारी और भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर मौजूद थे। इससे पहले दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर टूटने वाली दुकानों के सामने धरना शुरू कर दिया था। लहेरियासराय टावर से चट्टी चौक तक पूरा बाजार बंद रहा। बुलडोजर चलाकर चारों दुकानों को तोड़ दिया गया। दुकानदारों का आरोप है कि यह कार्रवाई पूरी तरह तानाशाहीपूर्ण है। आदेश के वक्त दुकानदारों को पक्षकार नहीं बनाया गया था स्थानीय व्यवसायी अशोक नायक ने बताया, ‘यह बीके रोड है, जहां नगर निगम की कुल 74 पक्की दुकानें हैं। इनका निर्माण 1974-75 में हुआ था और उसी समय दुकानदारों को आवंटन दिया गया था। तब से हम लोग किराएदार के रूप में यहां व्यवसाय कर रहे हैं। आरओबी निर्माण के दायरे में 74 में से 61 दुकानें आ रही हैं। निर्माण एजेंसी ने नगर निगम को पत्र देकर दुकानें खाली कराने को कहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि 1996 का एक मामला, जिसमें 40 फीट सड़क देने का आदेश दिया गया था। उसमें दुकानदारों को पक्षकार नहीं बनाया गया, नगर निगम ने उस केस को गंभीरता से नहीं लिया, बाद में उसी फैसले के आधार पर अब कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाईकोर्ट में नगर निगम की ओर से दिए गए एफिडेविट में छह महीने में नई दुकान बनाकर देने की बात कही गई थी, लेकिन सच्चाई छिपाई गई। इस तरह की कार्रवाई सही नहीं है दुकानदार राजीव चौधरी ने कहा कि यह लाठी-गोली की सरकार है। इतने लोग शांतिपूर्ण तरीके से बैठे हैं, फिर भी जबरदस्ती की जा रही है। यह बना-बनाया पक्का मकान है, लाखों की संपत्ति है। एक व्यक्ति के बहकावे में प्रशासन तोड़फोड़ करने आया है। दुकानदार शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं और इस तरह की कार्रवाई पूरी तरह गलत है। दादाजी ने मुकदमा दायर किया था शिक्षक सोनू चौधरी ने कहा कि आज न्यायालय के आदेश का क्रियान्वयन हुआ है। इसके लिए मैं अदालत का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। नगर निगम के अधिकारी, पुलिस पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, दरभंगा के जिलाधिकारी सहित जिन लोगों के सहयोग से मुझे मुझे रास्ता मिला, उन सभी को तहेदिल से धन्यवाद देता हूं।
रास्ते की लड़ाई नई नहीं है। 1976 में मेरे दादाजी ने इसको लेकर मुकदमा दायर किया था। दुर्भाग्यवश मेरे दादाजी और पिता दोनों ही दुनिया में नहीं हैं। मैं तीसरी पीढ़ी हूं। अब न्याय मिला है। यह मेरे परिवार के लिए न्याय की जीत है। मैं मीडिया को क्यों रोकूंगा उपनगर आयुक्त जयचंद्र अकेला ने बताया कि मौके पर जेसीबी से कार्य चल रहा था और ऊपर से हाई टेंशन तार गुजर रहा था। दुर्घटना से बचने के लिए आम लोगों और वहां मौजूद सभी व्यक्तियों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए कहा गया था। किसी भी पत्रकार को कवरेज से नहीं रोका। मुझे यह जानकारी नहीं है कि वहां कौन-कौन पत्रकार थे, लेकिन प्रिंट मीडिया और अन्य मीडिया के सभी लोग शालीनता पूर्वक कवरेज कर रहे थे। मैंने किसी को एक बार भी नहीं रोका। मैं मीडिया को क्यों रोकूंगा ? उप नगर आयुक्त ने कहा कि लोगों को हटाने का उद्देश्य केवल सुरक्षा था। यदि भीड़ को नियंत्रित नहीं किया जाता तो कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। प्रशासन की प्राथमिकता किसी भी अप्रिय घटना को रोकना था।


