संस्कृति को बचाने के लिए शिक्षा बेहद जरूरी
समारोह में हुब्बल्ली-धारवाड़ शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) के अध्यक्ष शाकिर सनदी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि शाकिर सनदी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों के जीवन में सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति मां होती है। मां के भीतर असीम शक्ति होती है, वही बच्चे को आगे बढऩे का हौसला देती है। उन्होंने कहा कि आज बच्चे प्रतिस्पर्धा के युग में जी रहे हैं, लेकिन जब उन्हें सही दिशा और प्रेरणा मिलती है, तो वे पूरी दुनिया जीतने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अच्छा नागरिक बनने, समाज के लिए सोचने और मानवता को सर्वोपरि रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृति का मूल अर्थ सहयोग है और संस्कृति को बचाने के लिए शिक्षा बेहद जरूरी है। पढ़ाई केवल नौकरी के लिए नहीं, बल्कि इंसानियत को जिंदा रखने के लिए होनी चाहिए। हिंदी भाषा पर बोलते हुए शाकिर सनदी ने कहा कि हिंदी दुनिया की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। हमें अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व करना चाहिए, साथ ही अन्य संस्कृतियों का भी सम्मान करना चाहिए।
अनुशासन और संस्कार ही सफलता की असली कुंजी
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री जैन राजस्थानी विद्या प्रचारक मंडल के अध्यक्ष भंवरलाल सी. जैन ने की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जैन ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि दसवीं कक्षा के छात्र अच्छे अंक लाकर विद्यालय और अपने माता-पिता का नाम रोशन करें। मेहनत, अनुशासन और संस्कार ही सफलता की असली कुंजी हैं।
विद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत
समारोह में वनेसन्स के कपड़ा उद्योगपति जयंतीलाल ए. कटारिया तथा जीतो महिला शाखा की अध्यक्ष गीता छेड्डा विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन रहे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्घाटन मंडल के सचिव भरत एम. भंडारी (सीए) द्वारा किया गया। विद्यालय के प्रधानाध्यापक विलास जी. पुदाले ने विद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए शैक्षणिक, सह-शैक्षणिक एवं खेलकूद उपलब्धियों की जानकारी दी। हिंदी शिक्षक एस.एम.एल. जडेन्नवर ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम के अंत में शिक्षिका मंजूला ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान
इस अवसर पर शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले तथा खेलकूद प्रतियोगिताओं में अव्वल रहने वाले प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान किया गया, जिससे बच्चों में आगे और बेहतर करने की प्रेरणा मिली। वार्षिकोत्सव के दौरान विद्यार्थियों ने देशभक्ति, भारतीय संस्कृति, मातृत्व की शक्ति और सामाजिक मूल्यों पर आधारित विविध नृत्य एवं नाट्य प्रस्तुतियां दीं, जिनकी दर्शकों ने मुक्तकंठ से सराहना की।


