4 दिन के जिस बच्चे को कुंवारी मां ने अनाथ आश्रम छोड़ा वो 40 साल बाद नीदरलैंड से मेयर बनकर लौटा

4 दिन के जिस बच्चे को कुंवारी मां ने अनाथ आश्रम छोड़ा वो 40 साल बाद नीदरलैंड से मेयर बनकर लौटा

Mayor यह किसी हिंदी फिल्म की कहानी नहीं बल्कि सच्ची घटना है। चार दिन के जिस बच्चे को अनाथ आश्रम में छोड़ दिया गया था वह नींदरलैंड के एक शहर का मेयर बन गया। मेयर बनने के बाद वह बेटा अपनी जन्म देने वाली मां की तलाश में तीन बार भारत आ चुका है। वह कहता है कि उसे अपनी जन्म देने वाली मां से मिलना है। यह भी कहता हैं कि उसने महाभारत पढ़ी और यहीं से प्रेरणा मिली कि हर कर्ण को कुंती से मिलने का अधिकार है।

नागपुर के एक अनाथ आश्रम से शुरू होती है कहानी

यह घटना नागपुर से जुड़ी है और वर्ष 1985 से शुरू होती है, जब एक अविवाहित मां अपने चार दिन के बच्चे को अनाथ आश्रम में छोड़ती है। एक महीने तक इस बच्चे की यहीं पर देखभाल की जाती है। इसी बीच नीदरलैंड से भारत घूमने आया एक कपल इस बच्चे को गोद लेकर नीदरलैंड चला जता है। यह बच्चा अब इतना बड़ा हो गया है कि नीदरलैंड की राजधानी एम्सटर्डम के पास स्थित एक सुंदर शहर हीमस्टेड का मेयर बन गया है। इस बच्चे का नाम भारत और नीदरलैंड दोनों से जुड़ा है। हीमस्टेड के मेयर का नाम फाल्गुन बिन्नेन्डिज्क है। वह अंतिम बार दिसंबर में भारत आए यहां नागपुर में उन्होंने अपनी मां की तलाश की लेकिन मां से मिल नहीं पाए।

अनाथ आश्रम की नर्स ने रखा था फाल्गुन नाम Mayor

नीदर लैंड के कपल ने जब 34 दिन के इस बच्चे फाल्गुन बिन्नेन्डिज्क को गोद लिया तो उस समय इसका नाम फाल्गुन था। इस कपल ने इसका नाम नहीं बदला फाल्गुन के साथ ही इसका पूरा नाम फाल्गुन बिन्नेन्डिज्क रखा। नागपुर के जिस अनाथ आश्रम में बच्ची को छोड़ा गया था उस आश्रम की नर्स ने इस बच्चे का नाम फाल्गुन रखा था। इसके पीछे की वजह यह थी कि जब यह तीन दिन का था तो उस समय फाल्गुन माह चल रहा था। इसका जन्म फाल्गुन माह में हुआ था इसलिए नर्स ने बच्चे का फाल्गुन रख दिया। फाल्गुन को यह बात तब पता चला कि जब वह अपनी मां को तलाशते हुए उस नर्स तक पहुंचे जिसने उनका नाम फाल्गुन रखा था। नर्स से मिलने के बाद हीमस्टेड के मेयर फाल्गुन बिन्नेन्डिज्क ने कहा कि उस महिला से मिलना जीवन का अलग ही सुखद अहसास हुआ।

सामाजिक व्यवस्था के चलते अनाथ आश्रम छोड़ गई थी मां!

फाल्गुन बिन्नेन्डिज्क जब अपनी तलाश को आगे बढ़ाते हैं तो वह नागपुर नगर पालिका पहुंचते हैं। यहां पर आयुक्त अभिजीत चौधरी ने उनके जन्म से संबंधित कागजात निकलवाए तो पता चला कि उनकी मां एक 21 वर्षीय अविवाहित मां थी जो समाज के डर से उसे अनाथ आश्रम में छोड़ गई। यह अलग बात है कि इन कागजात में फाल्गुन बिन्नेन्डिज्क की मां का नाम भी दर्ज है लेकिन फाल्गुन बिन्नेन्डिज्क ने अपनी मां के नाम को सार्वजनिक नहीं किया है। फाल्गुन बिन्नेन्डिज्क ने एक डच दंपति के घर पढ़ाई लिखाई की। फाल्गुन बिन्नेन्डिज्क ने कहा है कि वह अपनी मां से मिलना चाहते हैं। एक मीडियाकर्मी ने जब उनसे पूछा कि उन्हे अपनी मां से मिलकर कैसा लगेगा तो फाल्गुन बिन्नेन्डिज्क ने जवाब दिया कि उन्हे भी बिल्कुल ऐसा ही अहसास होगा जैसा किसी मां को 40 साल बाद अपने बच्चे से मिलकर लगेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मां भी उनसे मिलना चाहती होंगी।

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