भोजपुर के जिला परिवहन कार्यालय में करीब 69 लाख 11 हजार 698 रुपए के मोटर वाहन टैक्स के गबन का खुलासा हुआ है। यह गबन न सिर्फ विभागीय लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है। इस मामले में डीटीओ अमित कुमार ने आरा के नवादा थाना में आवेदन देकर आरटीपीएस काउंटर पर कार्यरत तत्कालीन डाटा एंट्री ऑपरेटर अजय कुमार सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। आरोपी डाटा ऑपरेटर कैमूर जिले के दुमदुम गांव का रहने वाला है। स्पष्टीकरण मांगने पर भी जवाब नहीं मिला थाने में दिए आवेदन के मुताबिक आरोपी कर्मी ने आरटीपीएस काउंटर पर वाहन मालिकों से मोटर वाहन टैक्स की राशि नकद वसूल की, लेकिन उक्त राशि को सरकारी खजाने में जमा नहीं किया। यह सिलसिला लंबे समय तक चलता रहा और धीरे-धीरे बड़ी रकम गबन हो गई। जब विभागीय स्तर पर संदेह गहराया तो आरोपी से 9 दिसंबर 2025 और 2 जनवरी 2026 को स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन उसने किसी भी पत्र का कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद कराई गई जांच में गबन की पुष्टि हुई। डीटीओ अमित कुमार के आवेदन के आधार पर नवादा थाना में कांड संख्या 43/26 दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(4) और 318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपी से पूछताछ की जाएगी। विभागीय अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग हालांकि, इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी राशि का गबन एक या दो दिन में संभव नहीं है। ऐसे में परिवहन विभाग की आंतरिक निगरानी व्यवस्था, डीटीओ कार्यालय की नियमित जांच प्रक्रिया और नाजिर की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। लंबे समय तक टैक्स की राशि सरकारी खाते में जमा नहीं होने के बावजूद किसी स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह अब जांच का अहम बिंदु बन गया है। मामला सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग तेज हो गई है। भोजपुर के जिला परिवहन कार्यालय में करीब 69 लाख 11 हजार 698 रुपए के मोटर वाहन टैक्स के गबन का खुलासा हुआ है। यह गबन न सिर्फ विभागीय लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है। इस मामले में डीटीओ अमित कुमार ने आरा के नवादा थाना में आवेदन देकर आरटीपीएस काउंटर पर कार्यरत तत्कालीन डाटा एंट्री ऑपरेटर अजय कुमार सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। आरोपी डाटा ऑपरेटर कैमूर जिले के दुमदुम गांव का रहने वाला है। स्पष्टीकरण मांगने पर भी जवाब नहीं मिला थाने में दिए आवेदन के मुताबिक आरोपी कर्मी ने आरटीपीएस काउंटर पर वाहन मालिकों से मोटर वाहन टैक्स की राशि नकद वसूल की, लेकिन उक्त राशि को सरकारी खजाने में जमा नहीं किया। यह सिलसिला लंबे समय तक चलता रहा और धीरे-धीरे बड़ी रकम गबन हो गई। जब विभागीय स्तर पर संदेह गहराया तो आरोपी से 9 दिसंबर 2025 और 2 जनवरी 2026 को स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन उसने किसी भी पत्र का कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद कराई गई जांच में गबन की पुष्टि हुई। डीटीओ अमित कुमार के आवेदन के आधार पर नवादा थाना में कांड संख्या 43/26 दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(4) और 318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपी से पूछताछ की जाएगी। विभागीय अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग हालांकि, इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी राशि का गबन एक या दो दिन में संभव नहीं है। ऐसे में परिवहन विभाग की आंतरिक निगरानी व्यवस्था, डीटीओ कार्यालय की नियमित जांच प्रक्रिया और नाजिर की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। लंबे समय तक टैक्स की राशि सरकारी खाते में जमा नहीं होने के बावजूद किसी स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह अब जांच का अहम बिंदु बन गया है। मामला सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग तेज हो गई है।


