चित्रकूट में कोषागार घोटाला मामले की जांच कर रही एसआईटी (SIT) ने शनिवार देर रात तक सभी फाइलों के डेटा का फिर से मिलान किया। डेटा के आधार पर विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से बारी-बारी से पूछताछ की जा रही है। जांच टीम ने वर्ष 2014 से लेकर 2025 तक की कुल 40 फाइलों के रिकॉर्ड की कई बार जांच की। सूत्रों के अनुसार, टीम को वर्ष 2022 के बाद के 24 भुगतानों से संबंधित फाइलों में काफी अनियमितताएं मिली हैं। इस संबंध में वर्तमान वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह से पूछताछ की गई है। जानकारी के मुताबिक, जांच टीम को यहां तैनात रहे वरिष्ठ कोषाधिकारी कमलेश और शैलेश के बयानों के बाद शुक्रवार को नामजद आरोपी रिटायर्ड एटीओ अवधेश सिंह से मिली जानकारी से जांच की दिशा में बदलाव आया है। इसी आधार पर वर्तमान अधिकारी को भी बुलाया गया है। सूत्रों के अनुसार, जांच टीम ने अलग-अलग पटल से हुए ऑनलाइन भुगतान के डिजिटल हस्ताक्षर वर्तमान अधिकारी को दिखाए, जिस पर उन्होंने कमलेश, शैलेश और अवधेश को ही दोषी ठहराया है। रजिस्टर में दर्ज पेंशनर के खाते की धनराशि, भुगतान करने वाले अधिकारी के हस्ताक्षर और तारीख का भी मिलान किया गया, जिसमें कई गलत प्रविष्टियां पाई गई हैं। अब तक इस घोटाले में 35 आरोपी जेल जा चुके हैं। नामजद आरोपियों में रिटायर्ड एटीओ अवधेश समेत अन्य आरोपी अभी जेल से बाहर हैं। एसपी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि जांच टीम तेजी से काम कर रही है और जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी। इस बीच, कोषागार घोटाला मामले में एक करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले के आरोपी बिचौलिए बरहट निवासी दीपक पांडेय की जमानत जिला जज कोर्ट से खारिज हो गई है। जिला शासकीय अधिवक्ता श्यामसुंदर मिश्रा ने बताया कि यह बिचौलिए की दूसरी बार जमानत याचिका थी, जो अदालत ने खारिज कर दी। उस पर आरोप है कि उसने अपनी मां पेंशनर लक्ष्मी देवी की पेंशन को अपने खाते से जोड़कर कोषागार विभाग से एक करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि निकाली है। इसमें कोषागार विभाग के नामजद आरोपियों का भी हिस्सा बताया गया है।


