बाराबंकी में भीषण कोहरे और कड़ाके की ठंड ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। जिले का न्यूनतम तापमान 3.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। घने कोहरे के कारण सड़कों पर वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ गई और ट्रेनें घंटों देरी से चलीं, जिससे यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गईं। रात से ही शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कोहरे की घनी चादर छाई रही। हाईवे और संपर्क मार्गों पर दृश्यता बेहद कम होने से वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लंबी दूरी के वाहन चालक हाईवे किनारे ढाबों पर रुककर कोहरा छंटने का इंतजार करते देखे गए। आवश्यक यात्रा पर निकले चालक हेडलाइट, फॉग लाइट और डीपर जलाकर बेहद धीमी गति से वाहन चला रहे थे। शनिवार को दिनभर सूर्यदेव के दर्शन न होने से ठंड का असर और बढ़ गया। हालांकि, बाद में हल्की धूप से कुछ राहत मिली, लेकिन शाम होते ही ठिठुरन फिर बढ़ गई। कड़ाके की ठंड से बचाव के लिए बच्चे और बुजुर्ग घरों में ही दुबके रहे, जिससे बाजारों और सड़कों पर आवाजाही सीमित रही। मवेशी भी अलाव के पास सिमटे रहे। घने कोहरे का असर रेल यातायात पर भी स्पष्ट दिखाई दिया। कई प्रमुख ट्रेनें अपने निर्धारित समय से घंटों देरी से बाराबंकी रेलवे स्टेशन पहुंचीं। कैफियत एक्सप्रेस (12226) लगभग 4 घंटे 21 मिनट, कुशीनगर एक्सप्रेस (22537) 1 घंटा 51 मिनट और अवध एक्सप्रेस (19038) 2 घंटे 27 मिनट की देरी से आई। इसी तरह, दून एक्सप्रेस (13010) लगभग 4 घंटे और फरक्का एक्सप्रेस (15744) करीब 9 घंटे 50 मिनट देरी से स्टेशन पर पहुंची। ठंड के साथ ट्रेनों का लंबा इंतजार यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बना। मौसम में आए इस बदलाव का असर तापमान पर साफ दिख रहा है। न्यूनतम तापमान 3.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज होने के साथ ही अधिकतम तापमान में भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। वर्तमान में ठंड और कोहरे के इस दौर से तत्काल राहत मिलने के आसार कम नजर आ रहे हैं।


