जल आपूर्ति व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए क्लाउड बेस्ड रिमोट मॉनिटरिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम बनाया जाएगा। यह व्यवस्था रिमोट सेंसर आधारित होगी, जिसमें हर कनेक्शन में पानी आपूर्ति, टीडीएस, गंगाजल, नलकूप और रैनीवेल संचालन की जानकारी का आंकड़ा जल्द मिलेगा। इसके लिए कंपनी का चयन इसी सप्ताह कर लिया जाएगा। छह जनवरी तक आवेदन मांगे गए थे। जिसमें एक ही कंपनी आई। ये तीसरी बार आवेदन मांगे गए थे इसलिए जो कंपनी आई है उसी को कंसिडर किया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट पर काम होगा
प्राधिकरण के जीएम आरपी सिंह ने बताया कि इस सिस्टम से नोएडा प्राधिकरण को यह पता चल जाया करेगा कि कौन सी लाइन से कितने घरों या संस्थानों में पानी की आपूर्ति नहीं हुई है। इसके बाद कारण पता कर तत्काल सुधार करवाया जा सकेगा। जल विभाग इस व्यवस्था को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 6 सेक्टरों से शुरू करने जा रहा है, जिसमें 1 करोड़ 80 लाख 97 हजार रुपए की लागत का अनुमान है। इन सेक्टरों को चुना गया
प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सेक्टर-14, 14 ए, 15, 15 ए, 16 व 16 ए का चयन किया गया है। इस व्यवस्था के जरिए इन सेक्टरों की सभी पानी की लाइन, भूमिगत व ओवरहेड जलाशय, नलकूप और यमुना किनारे के रैनीवाल जोड़े जाएंगे। हर एक सेक्टर के प्रवेश स्थल जहां से सेक्टर में पानी आपूर्ति की लाइनें अलग-अलग दिशा में जाती हैं, वहां पर रिमोट सेंसर लगाए जाएंगे। छह महीने में हो जाएगा इंस्टॉल
इस मॉनिटरिंग सिस्टम को कंपनी छह महीने में इंस्टॉल करेगी। जिसके बाद आकड़े मिलने लगेंगे। पायलट प्रोजेक्ट है इसलिए कंपनी खुद ही इस प्रोजेक्ट की मानिटरिंग करेगी और आकड़े प्राधिकरण को देगी। पायलट प्रोजेक्ट सफल होने पर इसे पूरे सिस्टम में इंस्टॉल किया जाएगा।


