परिवहन विभाग ने पहली बार यात्री स्लीपर की बसों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। यह कि जिले में सभी पंजीकृत करीब 838 बसों के संचालकों को नोटिस जारी कर इन्हें कम्प्यूटर में लॉक कर दिया है। इन पर ये कार्रवाई इसलिए की है, ताकि ये बस बॉडी कोड कंडक्ट के प्रावधानों के अनुरूप संचालित हो। दरअसल यात्रियों की सुविधा व सुरक्षित सफर की दृष्टि से वर्ष 2019 में बस बॉडी कोड कंडक्ट लागू हुआ। इसके तहत बसों के निर्माण व संचालन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बिंदू अनिवार्य किए थे। इसकी मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी परिवहन विभाग की है। वर्ष 2023 के बाद स्लीपर यात्री बसें रजिस्टर होना बंद हो गई, लेकिन देखने में यह भी आया कि इस अवधि से पहले की जो बसें रजिस्टर हुई हैं, उनमें से भी कुछ में मापदंडों की कमी है। लिहाजा इनकी पूर्ति करवाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग ने इन्हें कम्प्यूटर में लॉक किया है। आरटीओ संतोष मालवीय बस की चैकिंग करते हुए। लॉक से बस संचालन में दिक्कत आएगी कम्प्यूटर में लॉक के बाद यात्री स्लीपर बस के पहिए स्वत: थम जाएंगे। बस किसी भी टोल नाके से गुजरेगी तो उसका परिवहन स्टेटस लॉक प्रदर्शित होगा। उसका फिटनेस, परमिट, बीमा कहीं भी नहीं बन पाएगा। यानी बस वैधानिक रूप से आगे चलने योग्य नहीं रहेगी। ऐसे में संचालक को बस को चैकिंग के लिए परिवहन कार्यालय लाना पड़ेगा। यदि बस उज्जैन में पंजीकृत हैं और दूसरे जिले में कहीं चैकिंग करवा रही है तो वहां के परिवहन विभाग से इस संबंध में उज्जैन सूचना पहुंचेगी। चैकिंग में बस बॉडी कोड कंडक्ट के बिंदुओं से जुड़ी कमी पाई जाने पर उसे दूर करवाए जाने के बाद ही कम्प्यूटर में लॉक खोला जा सकेगा। मानकों पर फीट होने पर खुलेगा लॉक ^यात्री स्लीपर 838 बसों को नोटिस जारी कर कम्प्यूटर में लॉक किया है। इन्हें बस बॉडी कोड कंडक्ट के तहत चैकिंग करवाना होगी। बस फीट पाए जाने पर ही लॉक खोला जाएगा। अन्यथा जो कमी होगी, उसे दूर करवाना रहेगा। – संतोष मालवीय, आरटीओ


