कहते हैं कि नदी और तालाब सौ साल बाद भी अपना रास्ता नहीं भूलते हैं। कायड़ तालाब भी 49 साल बाद अपने मूल रूप में लौटा तो हालात भयावह हो गए। इसी का नतीजा है कि 6 माह बाद भी यहां बारिश का पानी नहीं निकल पाया है। कायड़ ग्राम पंचायत ने कैचमेंट में पट्टे जारी कर दिए थे। अब हालात ये हैं कि करीब 200 से ज्यादा प्लॉट और मकान पानी की जद में हैं। करीब 500 मीटर का हाईवे डूब क्षेत्र में आ गया। तालाब के डूब क्षेत्र में आया हाईवे और मेडिकल कॉलेज भवन पानी से घिरे हुए हैं। मकान और खेत पानी में डूबे हैं। तालाब में 12 फीट पानी भरा है, जबकि पुष्कर मेला शुरू होने से पहले इसकी मोरी को खोल 3.5 फीट पानी निकाला जा चुका था। अन्यथा हाईवे से पानी खाली नहीं होता। दूसरी ओर इसका असर नेशनल हाईवे-58 के 63 करोड़ और नए मेडिकल कॉलेज भवन निर्माण के 191 करोड़ सहित 253 करोड़ के प्रोजेक्ट पर भी पड़ रहा है। डूब क्षेत्र के कारण हाईवे के दूसरे हिस्से में बनने वाले स्पोर्ट्स ब्लॉक का निर्माण तो शुरू होने के ही आसार नहीं हैं। हाईवे की सर्विस लेन, बीयूपी और फ्लाईओवर निर्माण पर 63 करोड़ खर्च होने हैं। यह प्रोजेक्ट शुरू होने के साथ ही बंद हो गया है। अब इसकी डीपीआर बदली जा रही है। इसे मंजूरी के लिए दिल्ली भेजा जाएगा। वहीं अब जेएलएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने डब्ल्यूआरडी को पत्र लिख भवन में जलभराव रोकने के लिए रिटेनिंग वॉल बनाने के लिए कहा है।


