अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा का प्रशासन चलाने में मदद के लिए बोर्ड ऑफ पीस के गठन का ऐलान किया है। यह गाजा में संघर्ष खत्म करने की ट्रंप की योजना के दूसरे चरण का एक महत्वपूर्ण कदम है। इस बोर्ड में विश्व बैंक के भारतवंशी सीईओ अजय बंगा भी शामिल हैं। ट्रंप इसके चेयरमैन होंगे।
क्या है बोर्ड ऑफ पीस?
गाजा बोर्ड ऑफ पीस एक निगरानी निकाय है, जिसे ट्रंप ने युद्ध के बाद गाजा के प्रशासन, राजनीतिक और सुरक्षा फैसलों की देखरेख के लिए बनाया गया है। इसका उद्देश्य गाजा में स्थिरता बहाल करना और वहां शासन व्यवस्था को एक व्यवस्थित ढांचे के तहत आगे बढ़ाना है।
इस बोर्ड में कौन-कौन शामिल?
- टोनी ब्लेयर, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री
- मार्को रुबियो, अमरीकी विदेश मंत्री
- जेरेड कुशनर, ट्रंप के दामाद और विशेष दूत
- स्टीव विटकॉफ, ट्रंप के विशेष दूत
- मार्क रोवन, सीईओ अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट
- अजय बंगा, विश्व बैंक के अध्यक्ष
- रॉबर्ट गैब्रियल, अमरीका के डिप्टी एनएसए
- निकोले म्लादेनोव, बुल्गारिया के नेता, यूएन के पूर्व मिडिल ईस्ट दूत
फिलस्तीनी कमेटी इससे कैसे अलग?
बोर्ड ऑफ पीस से पहले एक 15 सदस्यीय फिलस्तीनी टेक्नोक्रेटिक कमेटी का गठन किया गया है। यह गाजा में रोजाना के प्रशासन का काम देखेगी। वहीं, बोर्ड ऑफ पीस शासन क्षमता निर्माण, क्षेत्रीय संबंध, पुनर्निर्माण, निवेश और पूंजी जुटाने जैसे काम करेगी। अली शाथ को नवगठित नेशनल कमेटी फॉर द एडिमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा का प्रमुख बनाया गया है। वह फिलिस्तीनी अथॉरिटी में उप मंत्री रह चुके हैं।
गाजा स्टैबिलाइजेशन फोर्स क्या करेगी?
ट्रंप के प्लान में आगे गाजा में एक इंटनेशनल स्टैबिलाइजेशन फोर्स की भी तैनाती होगी। यह फोर्स फिलिस्तीनी पुलिस बलों को ट्रेनिंग देगा और उन्हें सपोर्ट करेगा। अमरीकी मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स इस बल की कमान संभालेंगे। इसका उद्येश्य गाजा में सुरक्षा, शांति बनाए रखना और आतंकवाद को खत्म करना है। -रिपोर्ट: मुकुल


