शहादत को सलाम: राजस्थान के उस शहीद की कहानी…जिनके नाम से छूटते थे आतंकियों के पसीने, मारने के लिए रखा लाखों का इनाम

शहादत को सलाम: राजस्थान के उस शहीद की कहानी…जिनके नाम से छूटते थे आतंकियों के पसीने, मारने के लिए रखा लाखों का इनाम

Shahadat Ko Salam: कोटा: बीएसएफ के डिप्टी कमांडेंट शहीद सुभाष शर्मा के नाम से ही दुश्मनों के पसीने छूट जाते थे। आतंकी भी उन्हें ‘टेरर ऑफ टेरर’ के रूप में पीटर के नाम से संबोधित करते थे। आतंकियों ने उन्हें 16 जनवरी 1996 को एक साइकिल पर अपनी तरह की पहली आईईडी रखकर हमला करने की साजिश रची।

आतंकियों ने पहली बार साइकिल पर ब्लास्ट करने का तरीका डिप्टी कमांडेंट सुभाष के लिए तैयार किया था। जैसे ही सुभाष शर्मा सड़क पर खड़ी इस संदिग्ध साइकिल को चेक करने पहुंचे, तो आंतकियों ने रिमोट से विस्फोट कर दिया। विस्फोट में देश ने एक बहादुर और जांबाज डिप्टी कमांडेंट खो दिया।

Shahadat Ko Salam Story of Martyr BSF Deputy Commandant Subhash Sharma

सुभाष शर्मा सीमा सुरक्षा बल में असम, पंजाब, दिल्ली और श्रीनगर में तैनात रहे। मई 1994 की शुरुआत में जब श्रीनगर में उग्रवाद चरम पर था, तब सुभाष को शांति स्थापना के लिए श्रीनगर भेजा गया था। अपने असाधरण शौर्य और वीरता की वजह से सुभाष को 9 अप्रैल 1996 को डिप्टी कमांडेंट के पद पर पदासीन किया गया। सुभाष ने न सिर्फ आतंकियों के दांत खट्टे कर दिए, बल्कि वे आतंकियों के लिए भी एक खौफ बन गए।

वे बहुत कुशल पायलट भी थे। उन्हें राष्ट्रपति ने पुलिस शौर्य पदक से सम्मानित भी किया। सुभाष शर्मा के नाम से नए कोटा में पार्क का नामकरण भी किया गया है। शहीद की वीरांगना बबीता शर्मा ने जीएडी सर्कल पर शहीद सुभाष शर्मा की प्रतिमा लगाने की मांग की है।

बबीता ने बताया कि आतंकी संगठनों ने सुभाष को खत्म करने के लिए लाखों रुपए का इनाम घोषित करते हुए दीवारों पर लिख दिया कि जो भी पीटर उर्फ टेरर ऑफ टेरर को मारेगा, उसे पांच लाख रुपए का इनाम दिया जाएगा।

वीरांगना की कहानी भी देती है प्रेरणा

बबीता ने बताया, जब पति को तिरंगे में लिपटे देखा और शहादत पर 21 तोपों की सलामी दी गई तो खुद को संभालते हुए यही विचार आया कि शहीद की पत्नी कमजोर नहीं हो सकती। मैं विधवा नहीं, वीरांगना हूं। फिर बेटे का भविष्य संवारने की ठानी। पेंशन काफी कम मिलती थी। इसके बावजूद बेटे को पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उस वक्त उनका बेटा क्षितिज महज नौ महीने का था।

Shahadat Ko Salam Story of Martyr BSF Deputy Commandant Subhash Sharma

उन्होंने संघर्षों के बीच उसका पालन-पोषण किया। वर्ष 2013 में एनडीए की परीक्षा दी। उसी समय नई मुसीबत आ गई। नौकरी के साक्षात्कार के पहले हमारा घर ढह गया। घर में जो सामान था, चोरी हो गया। ऐसी परिस्थिति में बेटे का रिजल्ट आया तो उसने प्रदेश में पहला और देश में 13वां स्थान प्राप्त किया था। वर्ष 2018 में क्षितिज लेफ्टिनेंट बन गया और आज वह आर्मी चीफ का एडीसी है। बेटे को सफल देख जीवन का ध्येय पूरा हो गया।

राजस्थान पत्रिका ने किया सम्मान

राजस्थान पत्रिका की ओर से आयोजित शहादत को सलाम कार्यक्रम में शहीद सुभाष शर्मा की वीरांगना बबीता शर्मा का सम्मान किया गया। इस अवसर पर कोटा विकास प्राधिकरण की आयुक्त ममता तिवाड़ी, सर्व ब्राह्मण समाज के युवा प्रकोष्ठ संभागीय अध्यक्ष ईश्वर शर्मा और जिला अध्यक्ष प्रेम शंकर शर्मा ने उन्हें स्मृति चिन्ह, शॉल और नारियल भेंट कर सम्मान किया।

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