राजगढ़ के मोहनपुरा ने खींचा छत्तीसगढ़ का ध्यान:58 सदस्यीय दल पहुंचा राजगढ़, बगिया में पायलट प्रोजेक्ट लागू करने की तैयारी शुरू

राजगढ़ जिले के मोहनपुरा क्षेत्र में बनी विश्व की सबसे बड़ी प्रेशराइज्ड एरिगेशन परियोजना अब छत्तीसगढ़ की खेती का रास्ता तय कर रही है। इसी परियोजना को नजदीक से देखने और समझने के लिए छत्तीसगढ़ से अधिकारियों और किसानों का 58 सदस्यीय दल शनिवार को राजगढ़ पहुंचा। दल ने मोहनपुरा के लगदरिया पंप हाउस से भ्रमण की शुरुआत की। शनिवार सुबह करीब 10 बजे दल लगदरिया पंप हाउस पहुंचा, जहां मालवी परंपरा के अनुसार पगड़ी पहनाकर स्वागत किया गया। यहां परियोजना प्रशासक विकास राजोरिया और शुभंकर विश्वास ने दाबयुक्त सिंचाई प्रणाली की तकनीकी जानकारी दी। पंप हाउस से किस तरह पानी लिफ्ट होकर पाइपलाइन के जरिए खेतों तक पहुंचता है, इसका लाइव प्रदर्शन दिखाया गया। छत्तीसगढ़ के सीएम ने भेजा दल
यह भ्रमण दल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर राजगढ़ आया है। एक दिन पहले मुख्यमंत्री साय ने दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।इससे पहले उन्होंने भोपाल में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से स्वयं मोहनपुरा–कुंडलिया परियोजना का प्रेजेंटेशन समझा था। इसके बाद जशपुर जिले के बगिया में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्णय लिया गया। दल में जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास, प्रमुख अभियंता इंद्रजीत ऊइके, एसई आलोक अग्रवाल, ईई संदीप दुबे,विपिन तिवारी, मिलिंद मृदुकर सहित अन्य अधिकारी और किसान शामिल हैं।पहले दिन दल ने लगदरिया और आरबीसी पंप हाउस का निरीक्षण किया।इसके बाद माचलपुर सहित आसपास के गांवों में जाकर किसानों से सीधी चर्चा की गई। पथरीली जमीन पर सिंचाई देख चौंके अधिकारी
ऊबड़-खाबड़ और पथरीली जमीन पर प्रभावी सिंचाई देखकर छत्तीसगढ़ से आए अधिकारी और किसान हैरान दिखे।उनका कहना था कि जहां नहरें सीमित साबित होती हैं, वहां दाबयुक्त प्रणाली खेती को नई दिशा दे रही है। रविवार को दल कुंडलिया परियोजना क्षेत्र का भ्रमण करेगा। यहां किसान समूहों की कार्यप्रणाली,फसल चक्र और सामूहिक जल प्रबंधन को समझा जाएगा। बगिया में 13 गांवों तक पहुंचेगा पानी
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में प्रस्तावित बगिया परियोजना के तहत 13 गांवों को दाबयुक्त सिंचाई से जोड़ा जाएगा।डेम से सीधे पाइपलाइन के जरिए खेतों तक पानी पहुंचेगा।इससे नहरों से होने वाले नुकसान पर रोक लगेगी और कम पानी में अधिक क्षेत्र सिंचित हो सकेगा।

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