Nipah Virus Alert: कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक है यह वायरस, सिर्फ 12 घंटे में कोमा में जा सकता है मरीज!

Nipah Virus Alert: कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक है यह वायरस, सिर्फ 12 घंटे में कोमा में जा सकता है मरीज!

Nipah Virus Alert: हाल ही में बहुत तेजी से फैलता हुआ चर्चा का विषय बना हुआ है निपाह वायरस। पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में स्वास्थ्य विभाग ने एक विशेष जांच टीम का गठन किया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सामान्य रूप से स्थानीय चमगादड़ों में भी यह वायरस पाया जाता है क्या? निपाह एक जानलेवा संक्रमण है और इसकी मृत्यु दर भी 45 से 75% है जो आम वायरस से कहीं ज्यादा है। 12 से 14 घंटों के अंदर इससे संक्रमित व्यक्ति कोमा के अंदर जा सकता है। आइए जानते हैं निपाह वायरस क्या है? इसके कारण क्या होते हैं? निपाह वायरस के लक्षण और बचाव के उपाय क्या होते हैं?

क्या है निपाह वायरस?((Nipah Virus)

निपाह वायरस एक बेहद खतरनाक और जानलेवा बीमारी है। यह एक ‘जुनोटिक’ (Zoonotic) बीमारी यानी कि यह बीमारी जानवरों से इंसानों में फैलती है। निपाह वायरस का सबसे बड़ा स्रोत ‘टेरोपस’ प्रजाति के चमगादड़ होते हैं। इस वायरस की विशेष बात यह भी है कि यह वायरस सूअर, बिल्लियों और कुत्तों के माध्यम से भी इंसान तक पहुंच सकता है।

कैसे फैलता है निपाह वायरस?((Nipah Virus Cause)

हर वायरस के फैलने का तरीका अलग-अलग होता है। ऐसे ही इस वायरस के फैलने का तरीका भी सबसे अलग है और वह यह है कि यह वायरस फलों के माध्यम से फैलता है यानी जब किसी फल पर चमगादड़ की लार लग जाए और फिर उसी फल को इंसान खाता है तो यह वायरस इंसान तक फैल जाता है। खजूर के कच्चे रस से भी यह वायरस फैलता है क्योंकि उसमें भी चमगादड़ के मल-मूत्र के अंश होते हैं। इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से भी वायरस कोरोना की तरह फैलता है।

निपाह वायरस के लक्षण क्या होते हैं?((Nipah Virus Symptoms)

  • गले में खराश होना
  • शरीर में दर्द होना
  • बहुत ज्यादा थकान होना
  • गंभीर स्थिति में दौरे आना
  • मरीज को चक्कर आना
  • श्वसन संबंधी समस्या होना

निपाह वायरस से बचाव के उपाय क्या-क्या हैं?(Nipah Virus Prevention)

  • साबुन और पानी से हाथ धोते रहें
  • संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखें
  • खुले में रखे पेय पदार्थों के सेवन से परहेज करें

डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालिफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *