ईडी अफसरों के खिलाफ पुलिस जांच पर रोक, CISF-BSF तैनात होगी

ईडी अफसरों के खिलाफ पुलिस जांच पर रोक, CISF-BSF तैनात होगी

ईडी ऑफिस में रांची पुलिस की छापेमारी का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की कोर्ट ने शुक्रवार को इस पर सख्त आदेश जारी किया। कोर्ट ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ रांची पुलिस की जांच और कार्रवाई पर तत्काल रोक लगा दी। कोर्ट ने इस मामले में केंद्रीय गृह सचिव को प्रतिवादी बनाया। ईडी ऑफिस की सुरक्षा में सीआईएसएफ ओर बीएसएफ के जवानों को तैनात करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर ईडी कार्यालय में कोई भी अप्रिय घटना हुई तो इसके लिए रांची एसएसपी जिम्मेदार होंगे। कोर्ट ने इस मामले में ईडी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वाले संतोष कुमार और राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई अब नौ फरवरी को होगी। सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार दास, शिवम यू.सहाय और सौरव कुमार ने पक्ष रखा। वहीं राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता कपिल सिब्बल (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से) व मनोज कुमार, केंद्र सरकार की ओर से एएसजीआई प्रशांत पल्लव और संतोष कुमार की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया व रितेश कुमार गुप्ता ने पक्ष रखा। गौरतलब है कि पेयजल स्वच्छता प्रमंडल के क्लर्क संतोष कुमार की ओर से 13 जनवरी को एयरपोर्ट थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इस एफआईआर के आधार पर एयरपोर्ट थाने की पुलिस ने सिटी डीएसपी के नेतृत्व में 15 जनवरी को अहले सुबह ईडी कार्यालय में छापेमारी की थी। ईडी ने की थी पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाने व सीबीआई जांच की मांग
छापेमारी के बाद ईडी के सहायक निदेशक विनय कुमार सिंह और सहायक प्रवर्तन अधिकारी शुभम भारती ने हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दाखिल की है। इसमें एयरपोर्ट थाना कांड संख्या 05/2026 के मामले में पुलिस की कार्यवाही पर रोक लगाने और पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई थी। संतोष कुमार ने एयरपोर्ट थाना में दर्ज एफआईआर में ईडी अफसरों पर पूछताछ के लिए बुलाकर डंडे से मारकर सिर फोड़ने, जान से मारने की धमकी देने और डॉक्टर व अधिकारियों को सच्चाई बताने पर पूरे परिवार को जेल भेजने की धमकी देने का आरोप लगाया था। इसके बाद पुलिस ने ईडी कार्यालय में छापेमारी की थी। हाईकोर्ट : हम मूकदर्शक नहीं रह सकते…जांच पर तुरंत रोक लगाएं दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा- कोर्ट एफआईआर के प्रारंभिक चरण में अंतरिम संरक्षण प्रदान करने में अत्यंत सावधानी बरतता है। लेकिन ईडी द्वारा जो मामला कोर्ट के समक्ष लाया गया है, ऐसे मामले में हाईकोर्ट मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता है। हालांकि, इस मामले का निष्कर्ष अन्य पक्षों की प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही दी जा सकती है। फिलहाल पुलिस द्वारा शुरू की गई जांच और कार्यवाही पर रोक लगाई जाती है। केंद्रीय गृह सचिव को ईडी कार्यालय की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ या बीएसएफ के जवानों को तैनात करने का निर्देश दिया जाता है। ईडी को निदेशालय के परिसर में लगाए गए सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया जाता है। जानिए…हाईकोर्ट में किसने क्या दी दलील ईडी: झारखंड में बंगाल जैसे हालात, जांच बाधित करने की पूर्व नियोजित रणनीति ईडी की ओर से कहा गया कि रांची जोनल कार्यालय कई हाई प्रोफाइल और संवेदनशील मामले की जांच कर रही है। इसमें मुख्यमंत्री व पूर्व मं​त्री सहित कई प्रभावशाली राजनेता और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शामिल हैं। शिकायत करने वाला पेयजल विभाग का कर्मचारी संतोष कुमार भी 23 करोड़ रुपए के सरकारी धन के गबन का मुख्य आरोपी है। संतोष के खिलाफ इसीआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने भी उसे हिरासत में लिया था और बाद में उसे जमानत मिल गई थी। रांची पुलिस की यह कार्रवाई ईडी की ओर से की जा रही जांच को बाधित करने की पूर्व नियोजित रणनीति है। झारखंड में बंगाल जैसे हालात बन रहे हैं। इसमें राज्य के हाई प्रोफाइल लोग भी शामिल हैं। इसलिए संरक्षण जरूरी है। आरोपी संतोष कुमार : ईडी के अधिकारियों ने फोन करके ईडी ऑफिस में बुलाया था ईडी अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कराने वाले पेयजल विभाग के क्लर्क संतोष कुमार के वकील सुमित गाड़ोदिया ने कहा कि संतोष को ईडी अधिकारियों ने फोन कर अपने कार्यालय में बुलाया था। कार्यालय में प्रवेश करते समय रजिस्टर में उसका नाम भी दर्ज किया गया था। इसके बाद ही उसे कार्यालय में प्रवेश करने की अनुमति दी गई थी। ईडी : कोई समन नहीं, खुद आया था संतोष को कोई समन जारी नहीं किया गया था। वह खुद 12 जनवरी को दोपहर 1:20 बजे ईडी कार्यालय पहुंचा। जब उससे गबन मामले में बातचीत की जा रही थी, तभी वह उत्तेजित हो गया। उसने मेज पर रखे कांच के जग को उठाकर खुद के सिर पर मार लिया। उससे उसके सिर में हल्की चोट आई। ईडी ऑफिस में रांची पुलिस की छापेमारी का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की कोर्ट ने शुक्रवार को इस पर सख्त आदेश जारी किया। कोर्ट ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ रांची पुलिस की जांच और कार्रवाई पर तत्काल रोक लगा दी। कोर्ट ने इस मामले में केंद्रीय गृह सचिव को प्रतिवादी बनाया। ईडी ऑफिस की सुरक्षा में सीआईएसएफ ओर बीएसएफ के जवानों को तैनात करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर ईडी कार्यालय में कोई भी अप्रिय घटना हुई तो इसके लिए रांची एसएसपी जिम्मेदार होंगे। कोर्ट ने इस मामले में ईडी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वाले संतोष कुमार और राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई अब नौ फरवरी को होगी। सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार दास, शिवम यू.सहाय और सौरव कुमार ने पक्ष रखा। वहीं राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता कपिल सिब्बल (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से) व मनोज कुमार, केंद्र सरकार की ओर से एएसजीआई प्रशांत पल्लव और संतोष कुमार की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया व रितेश कुमार गुप्ता ने पक्ष रखा। गौरतलब है कि पेयजल स्वच्छता प्रमंडल के क्लर्क संतोष कुमार की ओर से 13 जनवरी को एयरपोर्ट थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इस एफआईआर के आधार पर एयरपोर्ट थाने की पुलिस ने सिटी डीएसपी के नेतृत्व में 15 जनवरी को अहले सुबह ईडी कार्यालय में छापेमारी की थी। ईडी ने की थी पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाने व सीबीआई जांच की मांग
छापेमारी के बाद ईडी के सहायक निदेशक विनय कुमार सिंह और सहायक प्रवर्तन अधिकारी शुभम भारती ने हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दाखिल की है। इसमें एयरपोर्ट थाना कांड संख्या 05/2026 के मामले में पुलिस की कार्यवाही पर रोक लगाने और पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई थी। संतोष कुमार ने एयरपोर्ट थाना में दर्ज एफआईआर में ईडी अफसरों पर पूछताछ के लिए बुलाकर डंडे से मारकर सिर फोड़ने, जान से मारने की धमकी देने और डॉक्टर व अधिकारियों को सच्चाई बताने पर पूरे परिवार को जेल भेजने की धमकी देने का आरोप लगाया था। इसके बाद पुलिस ने ईडी कार्यालय में छापेमारी की थी। हाईकोर्ट : हम मूकदर्शक नहीं रह सकते…जांच पर तुरंत रोक लगाएं दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा- कोर्ट एफआईआर के प्रारंभिक चरण में अंतरिम संरक्षण प्रदान करने में अत्यंत सावधानी बरतता है। लेकिन ईडी द्वारा जो मामला कोर्ट के समक्ष लाया गया है, ऐसे मामले में हाईकोर्ट मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता है। हालांकि, इस मामले का निष्कर्ष अन्य पक्षों की प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही दी जा सकती है। फिलहाल पुलिस द्वारा शुरू की गई जांच और कार्यवाही पर रोक लगाई जाती है। केंद्रीय गृह सचिव को ईडी कार्यालय की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ या बीएसएफ के जवानों को तैनात करने का निर्देश दिया जाता है। ईडी को निदेशालय के परिसर में लगाए गए सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया जाता है। जानिए…हाईकोर्ट में किसने क्या दी दलील ईडी: झारखंड में बंगाल जैसे हालात, जांच बाधित करने की पूर्व नियोजित रणनीति ईडी की ओर से कहा गया कि रांची जोनल कार्यालय कई हाई प्रोफाइल और संवेदनशील मामले की जांच कर रही है। इसमें मुख्यमंत्री व पूर्व मं​त्री सहित कई प्रभावशाली राजनेता और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शामिल हैं। शिकायत करने वाला पेयजल विभाग का कर्मचारी संतोष कुमार भी 23 करोड़ रुपए के सरकारी धन के गबन का मुख्य आरोपी है। संतोष के खिलाफ इसीआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने भी उसे हिरासत में लिया था और बाद में उसे जमानत मिल गई थी। रांची पुलिस की यह कार्रवाई ईडी की ओर से की जा रही जांच को बाधित करने की पूर्व नियोजित रणनीति है। झारखंड में बंगाल जैसे हालात बन रहे हैं। इसमें राज्य के हाई प्रोफाइल लोग भी शामिल हैं। इसलिए संरक्षण जरूरी है। आरोपी संतोष कुमार : ईडी के अधिकारियों ने फोन करके ईडी ऑफिस में बुलाया था ईडी अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कराने वाले पेयजल विभाग के क्लर्क संतोष कुमार के वकील सुमित गाड़ोदिया ने कहा कि संतोष को ईडी अधिकारियों ने फोन कर अपने कार्यालय में बुलाया था। कार्यालय में प्रवेश करते समय रजिस्टर में उसका नाम भी दर्ज किया गया था। इसके बाद ही उसे कार्यालय में प्रवेश करने की अनुमति दी गई थी। ईडी : कोई समन नहीं, खुद आया था संतोष को कोई समन जारी नहीं किया गया था। वह खुद 12 जनवरी को दोपहर 1:20 बजे ईडी कार्यालय पहुंचा। जब उससे गबन मामले में बातचीत की जा रही थी, तभी वह उत्तेजित हो गया। उसने मेज पर रखे कांच के जग को उठाकर खुद के सिर पर मार लिया। उससे उसके सिर में हल्की चोट आई।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *