लखनऊ में साहिर लुधियानवी पर संगीतमय नाटक का मंचन:’साहिर-हर इक पल का शायर’ कार्यक्रम में कविता पाठ हुआ

लखनऊ के संगीत नाटक अकादमी स्थित संत गाडगे प्रेक्षागृह में साहिर लुधियानवी पर आधारित संगीतमय नाट्य-रचना ‘साहिर: हर इक पल का शायर’ का मंचन किया गया। अवध कॉन्क्लेव और आकृति सामाजिक एवं सांस्कृतिक समिति के सहयोग से प्रस्तुत इस नाटक में कविता, प्रेम और विद्रोह की गूंज सुनाई दी। भारतीय स्टेट बैंक और योनो इसके प्रायोजक थे। यह प्रस्तुति दर्शकों के लिए एक यादगार सांस्कृतिक अनुभव बन गई। वर्ष 2025 में इसी मंच पर दो सफल मंचनों के बाद यह तीसरी बार था जब इसका मंचन किया गया। इस बार भी सभागार दर्शकों से खचाखच भरा रहा। प्रस्तुति ने दर्शकों को भावनात्मक स्तर पर बांधे रखा यह नाटक साहिर लुधियानवी के जीवन की केवल क्रमबद्ध कथा प्रस्तुत नहीं करता, बल्कि उनके आंतरिक द्वंद्व, प्रेम, पीड़ा, विद्रोह और सत्य की तलाश को मंच पर सजीव करता है। इसमें साहिर की उस दुनिया को दर्शाया गया, जहाँ कविता ही जीवन थी और जीवन ही कविता। यह प्रस्तुति उन्हें सिर्फ फिल्मी गीतों के महान रचयिता के रूप में नहीं, बल्कि एक बेचैन और संवेदनशील आत्मा के रूप में प्रस्तुत करती है। चंद्रशेखर वर्मा द्वारा लिखित और गोपाल सिन्हा के निर्देशन में मंचित इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भावनात्मक स्तर पर बांधे रखा। मंच सज्जा और प्रकाश योजना ने कथा के प्रभाव को और सशक्त बनाया। डॉ. सुधांशु मणि ने साहिर की भूमिका में अपनी सधी हुई उर्दू अदायगी और प्रभावशाली आवाज से चरित्र को जीवंत किया। साहिर के कालजयी गीतों की संगीतमय प्रस्तुति अमृता प्रीतम की भूमिका में रुपाली चंद्रा ने भावनात्मक गरिमा और गहराई के साथ दर्शकों को प्रभावित किया। सूत्रधार के रूप में चंद्रशेखर वर्मा ने कथा के प्रवाह को संतुलित बनाए रखा। अन्य कलाकारों ने भी अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया ।इस प्रस्तुति का एक प्रमुख आकर्षण साहिर के कालजयी गीतों की संगीतमय प्रस्तुति थी। “कभी-कभी मेरे दिल में”, “मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया” और “अभी न जाओ छोड़कर” जैसे गीतों पर दर्शकों की तालियों की गूंज देर तक सुनाई देती रही। जीवंत संगीत और सधी हुई संगत ने नाटक को एक नई ऊंचाई प्रदान की।

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