मुजफ्फरपुर में एक साल पहले मोतीपुर थाना क्षेत्र में आग लगने से एक ही परिवार के सात लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। यह घटना साल 2024 के 15 नवंबर को हुई थी, लेकिन मोतीपुर पुलिस ने अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की। मृतका के भाई मनोज कुमार, नई दिल्ली में रहते हैं। आग लगने से उनकी बहन पूजा, बहनोई, दो बच्चे, बहन की सास जल कर मर गई थी। वो घटना की सूचना मिलते ही मोतीपुर पहुंचे थे। उन्होंने मोतीपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए लिखित आवेदन दिया था। मनोज कुमार ने कहा है कि उन्होंने केस दर्ज करने के लिए रिक्वेस्ट किया। लेकिन, पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। ना ही एफआईआर दर्ज किया। उन्होंने इसे लेकर सम्राट चौधरी को भी लेटर लिखा था। लेकिन, अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। लास्ट में मैंने कोर्ट में जाने का फैसला लिया। मोतीपुर थाने की ओर से लगातार टाल-मटोल किया जाता रहा और एफआईआर दर्ज नहीं की गई। आज कोर्ट ने इस मामले को ‘अति गंभीर’ माना है। पीड़ित की ओर से मानवाधिकार वकील एस.के. झा ने कोर्ट में बहस की। परिजन ने जताई हत्या की आशंका परिवादी मनोज ने कोर्ट को बताया कि जिस कमरे में लोग सोए हुए थे, आग सिर्फ उसी कमरे के बेड पर लगी थी। उन्होंने यह भी बताया कि कमरे में खिड़की और दरवाजा नहीं था, और सभी व्यक्ति अलग-अलग कमरों में सोए हुए थे, लेकिन आग वहीं लगी जहां वे सो रहे थे। परिवादी ने बताया कि नशे की दवा देकर सबको बेहोश कर जलाया गया। परिवादी मनोज ने कोर्ट में दिये परिवाद-पत्र में अंकित किया है कि नशे की दवा देकर सबको बेहोश कर फिर जलाया गया। अगर पुलिस सही से मामले की जांच करती हैं, तो मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। वकील ने पुलिस की कार्यशैली पर उठाया सवाल वकील ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस की ओर से अबतक एफआईआर दर्ज नहीं किया जाना पुलिस की लापरवाही को स्पष्ट करता है। पूरा मामला काफ़ी संदेहास्पद है और प्रथम दृष्टया यह मामला हत्या का प्रतीत हो रहा है। मुजफ्फरपुर में एक साल पहले मोतीपुर थाना क्षेत्र में आग लगने से एक ही परिवार के सात लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। यह घटना साल 2024 के 15 नवंबर को हुई थी, लेकिन मोतीपुर पुलिस ने अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की। मृतका के भाई मनोज कुमार, नई दिल्ली में रहते हैं। आग लगने से उनकी बहन पूजा, बहनोई, दो बच्चे, बहन की सास जल कर मर गई थी। वो घटना की सूचना मिलते ही मोतीपुर पहुंचे थे। उन्होंने मोतीपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए लिखित आवेदन दिया था। मनोज कुमार ने कहा है कि उन्होंने केस दर्ज करने के लिए रिक्वेस्ट किया। लेकिन, पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। ना ही एफआईआर दर्ज किया। उन्होंने इसे लेकर सम्राट चौधरी को भी लेटर लिखा था। लेकिन, अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। लास्ट में मैंने कोर्ट में जाने का फैसला लिया। मोतीपुर थाने की ओर से लगातार टाल-मटोल किया जाता रहा और एफआईआर दर्ज नहीं की गई। आज कोर्ट ने इस मामले को ‘अति गंभीर’ माना है। पीड़ित की ओर से मानवाधिकार वकील एस.के. झा ने कोर्ट में बहस की। परिजन ने जताई हत्या की आशंका परिवादी मनोज ने कोर्ट को बताया कि जिस कमरे में लोग सोए हुए थे, आग सिर्फ उसी कमरे के बेड पर लगी थी। उन्होंने यह भी बताया कि कमरे में खिड़की और दरवाजा नहीं था, और सभी व्यक्ति अलग-अलग कमरों में सोए हुए थे, लेकिन आग वहीं लगी जहां वे सो रहे थे। परिवादी ने बताया कि नशे की दवा देकर सबको बेहोश कर जलाया गया। परिवादी मनोज ने कोर्ट में दिये परिवाद-पत्र में अंकित किया है कि नशे की दवा देकर सबको बेहोश कर फिर जलाया गया। अगर पुलिस सही से मामले की जांच करती हैं, तो मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। वकील ने पुलिस की कार्यशैली पर उठाया सवाल वकील ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस की ओर से अबतक एफआईआर दर्ज नहीं किया जाना पुलिस की लापरवाही को स्पष्ट करता है। पूरा मामला काफ़ी संदेहास्पद है और प्रथम दृष्टया यह मामला हत्या का प्रतीत हो रहा है।


