बांका के शंभूगंज प्रखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभुकों से कथित अवैध वसूली का मामला सामने आया है। ताजा मामला बिरनौधा पंचायत से जुड़ा है, जहां एक दर्जन से अधिक महिला लाभुकों ने आवास सहायक पर आवास स्वीकृति और जियो टैगिंग के नाम पर पैसे लेने का गंभीर आरोप लगाया है। इस घटना के बाद पंचायत में चर्चा का माहौल गर्म है और लाभुकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। सर्वे के बाद सूची में जुड़ा था नाम लाभुक महिलाओं पिंकी देवी, राधा देवी, सरिता देवी, रुबी देवी सहित अन्य ने बताया कि विधानसभा चुनाव से पूर्व प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए उनके घरों का सर्वे किया गया था। इसके बाद उनका नाम योजना की सूची में जोड़ दिया गया। महिलाओं को उम्मीद थी कि उन्हें सरकारी नियमों के अनुसार बिना किसी खर्च के आवास योजना का लाभ मिलेगा। जियो टैग और स्वीकृति के नाम पर मांगे गए पैसे महिलाओं का आरोप है कि एक दिन पहले आवास सहायक मु.जावेद आलम उनके घर पहुंचे। इस दौरान जियो टैग करने और आवास स्वीकृत कराने के नाम पर प्रति लाभुक 1500 रुपए की मांग की गई।आरोप है कि आवास सहायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ऑफिस खर्च के नाम पर राशि नहीं दी गई, तो उनका काम आगे नहीं बढ़ेगा। मजबूरी में कई महिलाओं ने पैसे दे दिए। हजारों रुपए की उगाही की चर्चा लाभुकों के अनुसार, पंचायत में कई महिलाओं से इसी तरह पैसे लिए गए हैं, जिससे कुल मिलाकर हजारों रुपये की उगाही की चर्चा है। महिलाओं का कहना है कि उन्हें यह विश्वास दिलाया गया कि यह राशि सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा है, इसलिए उन्होंने विरोध नहीं किया। प्रखंड कार्यालय पहुंचने पर खुली सच्चाई अगले दिन जब कुछ लाभुक महिलाएं सच्चाई जानने के लिए शंभूगंज प्रखंड कार्यालय पहुंचीं, तब उन्हें बताया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत किसी भी प्रकार की राशि देने का कोई प्रावधान नहीं है।यह जानकारी मिलते ही लाभुकों का गुस्सा और बढ़ गया। महिलाओं का कहना है कि यदि पहले ही सही जानकारी होती, तो वे एक पैसा भी नहीं देतीं। दिहाड़ी मजदूर परिवारों पर आर्थिक बोझ लाभुक महिलाओं ने बताया कि उनके पति दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे में 1500 रुपये जैसी रकम देना उनके लिए बड़ा बोझ है।महिलाओं ने साफ कहा है कि यदि आवास सहायक द्वारा ली गई राशि वापस नहीं की गई, तो वे जिला पदाधिकारी से लिखित शिकायत करेंगी और न्याय की मांग करेंगी। आवास सहायक ने आरोपों को बताया निराधार इस मामले में आवास सहायक जावेद आलम ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें बिरनौधा पंचायत की जिम्मेदारी दी गई है और उन्होंने किसी भी लाभुक से किसी तरह की राशि नहीं ली है। उनका दावा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं। BDO बोले- शिकायत मिलने पर होगी जांच प्रखंड विकास पदाधिकारी नीतीश कुमार ने बताया कि फिलहाल इस मामले में किसी भी लाभुक द्वारा लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि शिकायत मिलती है, तो पूरे मामले की जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और जमीनी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाभुकों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो गरीबों के लिए बनी योजनाओं का उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाएगा। जांच की मांग तेज फिलहाल मामला आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है, लेकिन पंचायत स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है। लाभुकों को उम्मीद है कि प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सच्चाई सामने लाएगा और दोषियों पर कार्रवाई करेगा। बांका के शंभूगंज प्रखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभुकों से कथित अवैध वसूली का मामला सामने आया है। ताजा मामला बिरनौधा पंचायत से जुड़ा है, जहां एक दर्जन से अधिक महिला लाभुकों ने आवास सहायक पर आवास स्वीकृति और जियो टैगिंग के नाम पर पैसे लेने का गंभीर आरोप लगाया है। इस घटना के बाद पंचायत में चर्चा का माहौल गर्म है और लाभुकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। सर्वे के बाद सूची में जुड़ा था नाम लाभुक महिलाओं पिंकी देवी, राधा देवी, सरिता देवी, रुबी देवी सहित अन्य ने बताया कि विधानसभा चुनाव से पूर्व प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए उनके घरों का सर्वे किया गया था। इसके बाद उनका नाम योजना की सूची में जोड़ दिया गया। महिलाओं को उम्मीद थी कि उन्हें सरकारी नियमों के अनुसार बिना किसी खर्च के आवास योजना का लाभ मिलेगा। जियो टैग और स्वीकृति के नाम पर मांगे गए पैसे महिलाओं का आरोप है कि एक दिन पहले आवास सहायक मु.जावेद आलम उनके घर पहुंचे। इस दौरान जियो टैग करने और आवास स्वीकृत कराने के नाम पर प्रति लाभुक 1500 रुपए की मांग की गई।आरोप है कि आवास सहायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ऑफिस खर्च के नाम पर राशि नहीं दी गई, तो उनका काम आगे नहीं बढ़ेगा। मजबूरी में कई महिलाओं ने पैसे दे दिए। हजारों रुपए की उगाही की चर्चा लाभुकों के अनुसार, पंचायत में कई महिलाओं से इसी तरह पैसे लिए गए हैं, जिससे कुल मिलाकर हजारों रुपये की उगाही की चर्चा है। महिलाओं का कहना है कि उन्हें यह विश्वास दिलाया गया कि यह राशि सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा है, इसलिए उन्होंने विरोध नहीं किया। प्रखंड कार्यालय पहुंचने पर खुली सच्चाई अगले दिन जब कुछ लाभुक महिलाएं सच्चाई जानने के लिए शंभूगंज प्रखंड कार्यालय पहुंचीं, तब उन्हें बताया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत किसी भी प्रकार की राशि देने का कोई प्रावधान नहीं है।यह जानकारी मिलते ही लाभुकों का गुस्सा और बढ़ गया। महिलाओं का कहना है कि यदि पहले ही सही जानकारी होती, तो वे एक पैसा भी नहीं देतीं। दिहाड़ी मजदूर परिवारों पर आर्थिक बोझ लाभुक महिलाओं ने बताया कि उनके पति दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे में 1500 रुपये जैसी रकम देना उनके लिए बड़ा बोझ है।महिलाओं ने साफ कहा है कि यदि आवास सहायक द्वारा ली गई राशि वापस नहीं की गई, तो वे जिला पदाधिकारी से लिखित शिकायत करेंगी और न्याय की मांग करेंगी। आवास सहायक ने आरोपों को बताया निराधार इस मामले में आवास सहायक जावेद आलम ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें बिरनौधा पंचायत की जिम्मेदारी दी गई है और उन्होंने किसी भी लाभुक से किसी तरह की राशि नहीं ली है। उनका दावा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं। BDO बोले- शिकायत मिलने पर होगी जांच प्रखंड विकास पदाधिकारी नीतीश कुमार ने बताया कि फिलहाल इस मामले में किसी भी लाभुक द्वारा लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि शिकायत मिलती है, तो पूरे मामले की जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और जमीनी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाभुकों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो गरीबों के लिए बनी योजनाओं का उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाएगा। जांच की मांग तेज फिलहाल मामला आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है, लेकिन पंचायत स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है। लाभुकों को उम्मीद है कि प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सच्चाई सामने लाएगा और दोषियों पर कार्रवाई करेगा।


