Gold Silver Update: कीमत देखकर ही न करें सोने-चांदी में निवेश, डिमांड-सप्लाई का पूरा गणित भी समझें

Gold Silver price forecast: सोना और चांदी लगातार निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। बड़ी छलांग के बाद एक-दो गिरावट से उनकी ऊपर चढ़ने की रफ्तार प्रभावित हुई है, लेकिन मजबूती की संभावनाएं बरकरार हैं। कमोडिटी एक्स्पर्ट्स का मानना है कि भले ही गोल्ड-सिल्वर की रफ्तार पिछले साल जैसी न रहे, लेकिन ये धातुएं 2026 में भी अच्छा रिटर्न देकर जाएंगी। अगर आप सोने-चांदी में निवेश करने या उसे बढ़ाने का सोच रहे हैं, तो केवल कीमतों के अनुमान के आधार पर फैसला लेना ठीक नहीं होगा। यह जानना भी जरूरी है कि गोल्ड-सिल्वर की चाल किन फैक्टर्स पर टिकी है, कौन इन्हें खरीद रहा है और भविष्य में क्या हालात बन सकते हैं।

फाइनेंशियल इनवेस्टमेंट के रॉकेट पर Gold

गोल्ड इस समय फाइनेंशियल सुपर साइकिल पर सवार है, जबकि चांदी को उसकी सीमित उपलब्धता हवा दे रही है। पहले बात करते हैं गोल्ड की। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, 2025 की तीसरी तिमाही में सोने की मांग करीब 1313 टन के आसपास पहुंच गई, जिसकी वैल्यू 146 अरब डॉलर थी। यहां गौर करने वाली बात यह है कि कुल मांग में भले ही 3% का उछाल देखने को मिला, लेकिन निवेश की डिमांड 40 से 45% तक बढ़ गई। इसका मतलब है कि सोने में निवेश की इच्छा लगातार बढ़ रही है। गोल्ड एक तरह से फाइनेंशियल इनवेस्टमेंट के रॉकेट पर सवार हो गया है। निवेशक सोने की तेजी का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाने की चाहत में उसे खरीदते जा रहे हैं।

Gold ETF में तेजी से बढ़ रहा है निवेश

सोने की आपूर्ति में मामूली बढ़ोतरी हुई है। आम निवेशकों के साथ-साथ केंद्रीय बैंक भी धड़ाधड़ सोना खरीद रहे हैं। वर्ष 2025 के पहले 9 महीनों में केंद्रीय बैंक 600 टन से ज्यादा सोना खरीद चुके हैं। इस तरह से देखें तो कुल सप्लाई का सबसे बड़ा हिस्सा दुनिया के केंद्रीय बैंक ले जा रहे हैं। सोने की ज्वेलरी आदि की मांग में कमी देखने को मिली है। 2025 में यह 20% गिरी है। वजह इसकी ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच चुकी कीमत है। लेकिन निवेश की मांग लगातार बढ़ रही है। खासतौर पर गोल्ड ETF में इन्वेस्टमेंट बढ़ा है। ईटीएफ के जरिए बहुत कम से भी निवेश किया जा सकता है। इसलिए लोग चढ़ती कीमतों का लाभ उठाने के लिए ETF के जरिए गोल्ड में निवेश कर रहे हैं।

किल्लत दे रही Silver की कीमतों को हवा

चांदी की बात करें, तो आपूर्ति में किल्लत इसकी कीमतों को हवा दे रही है। सिल्वर इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट बताती है कि बाजार में पिछले 5 सालों से लगातार चांदी की कमी बनी हुई है। 2024 में सिल्वर की डिमांड करीब 1.2 बिलियन औंस थी। माइनिंग और रिसाइकलिंग को मिलाकर भी आपूर्ति केवल 1 बिलियन औंस रही। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए चांदी के स्टॉक्स धड़ाधड़ बेचे गए। जब मांग ज्यादा हो और आपूर्ति कम, तो दाम बढ़ना लाजमी है और चांदी के मामले में यही हो रहा है। सिल्वर की इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ी है। इलेक्ट्रॉनिक वाहन और सोलर सेक्टर में चांदी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रही है। इसके अलावा, इसमें निवेश भी लगातार बढ़ रहा है। गोल्ड की तरह सिल्वर ETF में इन्वेस्टमेंट फ्लो तेज हुआ है।

अब आगे का क्या है अनुमान?

एक्स्पर्ट्स का कहना है कि गोल्ड माइनिंग बढ़ाने के लिए काम हुआ है, लेकिन आपूर्ति में तेजी आने में समय लगेगा। जबकि सिल्वर का उत्पादन बुरी तरह फंसा हुआ है। चीन द्वारा चांदी निर्यात को सीमित करने की वजह से भी दुनिया में सिल्वर की किल्लत बढ़ेगी। चीन ने जनवरी 2026 से निर्यात के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया है और प्रक्रिया बेहद कड़ी कर दी है। इस वजह से दुनिया के बाजार में आने वाली चीनी चांदी कम हो जाएगी और चढ़ती कीमतों को सपोर्ट मिलेगा। इस लिहाज से देखें तो गोल्ड और सिल्वर दोनों में तेजी का दौर कयाम रह सकता है।

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