नारनौल के बसीरपुर–तलोट में हवन कर शुरू किया आंदोलन:मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब को लेकर ग्रामीणों का धरना, जमीन अधिग्रहण में धांधली का आरोप

नारनौल के बसीरपुर–तलोट में हवन कर शुरू किया आंदोलन:मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब को लेकर ग्रामीणों का धरना, जमीन अधिग्रहण में धांधली का आरोप

हरियाणा के नारनौल में गांव बसीरपुर व तलोट में बन रहे मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब में जमीन को लेकर हुई कथित धांधली के विरोध में आज ग्रामीणों ने हवन कर धरना शुरू किया। इस मौके पर सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने सरकार से इस कथित घोटाले की जांच की मांग की। हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के बसीरपुर और तलोट गांवों में मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब (MMLP) बन रहा है, जो दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) पर स्थित है और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) से जुड़कर इस क्षेत्र को एक बड़ा औद्योगिक केंद्र बनाएगा। 765 करोड़ होंगे खर्च जिससे उद्योगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे। यह परियोजना कई चरणों में विकसित की जा रही है, जिसमें पहले चरण में 400 एकड़ पर काम शुरू हो चुका है। यह हब कुल 1200 एकड़ जमीन पर बनेगा। इस पर 765 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। बनाई गई समिति अब इस योजना पर सवाल उठने लगे हैं। जिसको लेकर आसपास के ग्रामीण धरने पर बैठ गए हैं। इसके लिए श्री ग्राम भूमि हीन जन संघर्ष समिति गांव बसीरपुर, घाटाशेर, तलोट का गठन किया गया है। जिसके लिए बस स्टैंड के बसीरपुर पर धरना शुरू किया गया है। इस समिति का अध्यक्ष शेर सिंह को बनाया गया है। वहीं सुरेश बोहरा को महासचिव तथा ब्रह्मप्रकाश यादव को सचिव बनाया है। किसानों को नहीं किया गया शामिल समिति के अध्यक्ष शेर सिंह का कहना है कि क्षेत्र के किसानों ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि उनकी भूमि का रेट तय करते समय उन्हें मार्केट कमेटी में शामिल नहीं किया गया और न ही उनकी सहमति से उचित भाव निर्धारित किया गया। आरोप है कि उनकी जमीन उचित मूल्य पर नहीं ली गई, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। गुमराह कर करवाए साइन किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण से संबंधित सहमति पत्रों पर उनसे गुमराह करके हस्ताक्षर करवाए गए। यह कहकर हस्ताक्षर कराए गए कि उन्हें अधिग्रहण का मुआवजा और नौकरी दी जाएगी, जबकि वास्तविकता में यह सहमति बिना किसानों की जानकारी और सहभागिता के तैयार की गई थी। आरोप है कि सहमति पत्रों पर न तो किसी प्रशासनिक अधिकारी और न ही किसी विभाग के अधिकृत प्रतिनिधि के हस्ताक्षर करवाए गए। विधायक से जुड़े निजी व्यक्तियों ने की किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया पूर्व हल्का विधायक से जुड़े निजी व्यक्तियों द्वारा करवाई गई। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन सस्ते भाव पर बिकवाई गई और इस सौदे में संबंधित लोगों को मोटी रकम कमीशन के रूप में मिली। इस पूरे प्रकरण में एक ही व्यक्ति को ठेकेदार बनाया गया, जिससे उसे भारी मुनाफा हुआ, जबकि किसानों को उनके हक से वंचित कर दिया गया। सीबीआई जांच की मांग किसानों का आरोप है कि मार्केट कमेटी में किसानों की भागीदारी न होने से पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और गरीब किसानों के अधिकारों का हनन हुआ है। किसानों ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए। किसानों ने इस पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *