अमेजन-फ्लिपकार्ट समेत 8 ई-कॉमर्स कंपनियों पर ₹44 लाख का जुर्माना:अवैध वॉकी-टॉकी बेचने पर CCPA की कार्रवाई; इन्हें नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा बताया

अमेजन-फ्लिपकार्ट समेत 8 ई-कॉमर्स कंपनियों पर ₹44 लाख का जुर्माना:अवैध वॉकी-टॉकी बेचने पर CCPA की कार्रवाई; इन्हें नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा बताया

सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर गैरकानूनी वॉकी-टॉकी बेचने के लिए एक्शन लिया है। CCPA ने अमेजन, फ्लिपकार्ट, मीशो और मेटा समेत आठ कंपनियों पर कुल 44 लाख रुपए की पेनाल्टी लगाई है। इन प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे वॉकी-टॉकी बेचे जा रहे थे जिनके पास जरूरी लाइसेंस या तकनीकी मंजूरी नहीं थी। कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 और टेलीकॉम कानूनों के उल्लंघन के लिए की गई है। अथॉरिटी ने जांच में पाया कि इन वेबसाइट्स पर 16,970 से ज्यादा ऐसे प्रोडक्ट लिस्टेड थे, जो सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते। अमेजन-मेटा समेत 4 बड़ी कंपनियों पर 10-10 लाख की पेनाल्टी उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने बताया कि मीशो, मेटा (फेसबुक मार्केटप्लेस), फ्लिपकार्ट और अमेजन पर 10-10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा चिमिया , जियोमार्ट, टॉक प्रो और मास्कमैन टॉयज पर 1-1 लाख रुपए का जुर्माना लगा है। अधिकारी के मुताबिक, मीशो, मेटा, चिमिया, जियोमार्ट और टॉक प्रो ने जुर्माने की राशि जमा कर दी है, जबकि बाकी कंपनियों के भुगतान का इंतजार है। यह मामला तब सामने आया जब जांच में पता चला कि ये प्लेटफॉर्म पर्सनल मोबाइल रेडियो (PMR) को बिना किसी लाइसेंस जानकारी के बेच रहे थे। बिना मंजूरी और गलत फ्रीक्वेंसी पर चल रहे थे डिवाइस भारत में वॉकी-टॉकी इस्तेमाल करने के कड़े नियम हैं। मौजूदा नियमों के अनुसार, बिना लाइसेंस के केवल वही वॉकी-टॉकी इस्तेमाल किए जा सकते हैं जो 446.0 से 446.2 मेगाहर्ट्ज (MHz) की फ्रीक्वेंसी पर काम करते हैं। CCPA की जांच में सामने आया कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले कई डिवाइस इस तय सीमा से बाहर की फ्रीक्वेंसी पर काम कर रहे थे। साथ ही, इन उपकरणों के पास ‘इक्विपमेंट टाइप अप्रूवल’ (ETA) सर्टिफिकेट भी नहीं था, जो किसी भी वायरलेस डिवाइस को भारत में बेचने के लिए अनिवार्य है। किस प्लेटफॉर्म पर कितनी गड़बड़ी मिली? सुरक्षा के लिए क्यों बड़ा खतरा हैं ये डिवाइस? CCPA ने चेतावनी दी है कि बिना अनुमति वाले ये रेडियो डिवाइस देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हो सकते हैं। ये डिवाइस पुलिस, आपदा प्रबंधन और अन्य इमरजेंसी सेवाओं के कम्युनिकेशन नेटवर्क में बाधा डाल सकते हैं। अगर ये डिवाइस संवेदनशील फ्रीक्वेंसी में दखल देते हैं, तो इससे महत्वपूर्ण सरकारी ऑपरेशन्स रुक सकते हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता हो सकता है। कंपनियों की ‘बिचौलिया’ वाली दलील खारिज सुनवाई के दौरान कई कंपनियों ने तर्क दिया कि वे केवल एक ‘बिचौलिया’ हैं और थर्ड-पार्टी सेलर जो सामान बेच रहे हैं, उसके लिए वे जिम्मेदार नहीं हैं। हालांकि, CCPA ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। प्राधिकरण ने कहा कि जो प्लेटफॉर्म उत्पादों की लिस्टिंग, होस्टिंग और प्रमोशन कर रहे हैं, वे अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। कंपनियों को अपनी तकनीक का इस्तेमाल कर अवैध सामान की लिस्टिंग को रोकना चाहिए। ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए नई गाइडलाइंस जारी ई-कॉमर्स कंपनियों की जवाबदेही तय करने के लिए CCPA ने ‘रेडियो उपकरणों की अवैध लिस्टिंग और बिक्री की रोकथाम’ के लिए नई गाइडलाइंस-2025 अधिसूचित की हैं। इसे दूरसंचार विभाग (DoT) और गृह मंत्रालय के साथ सलाह के बाद तैयार किया गया है। अब कंपनियों के लिए ये काम करना जरूरी होगा:

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