मुजफ्फरनगर साइबर क्राइम पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और साइबर स्लेवरी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह युवाओं को विदेश में आकर्षक नौकरी का लालच देकर कंबोडिया भेजता था, जहां उन्हें जबरन साइबर ठगी और फर्जी कॉल सेंटर चलाने जैसी अवैध गतिविधियों में धकेला जाता था। इस कार्रवाई में दो मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान आश मोहम्मद (निवासी ग्राम तावली, थाना शाहपुर) और जावेद (निवासी खतौला, थाना शाहपुर) के रूप में हुई है। पुलिस ने उनके पास से तीन मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद किया है। यह सफलता अपर पुलिस महानिदेशक मेरठ जोन और पुलिस उपमहानिरीक्षक सहारनपुर परिक्षेत्र के निर्देशन में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के पर्यवेक्षण में मिली। थाना साइबर क्राइम प्रभारी सुल्तान सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर यह छापेमारी की। जांच में सामने आया कि आरोपी आश मोहम्मद पहले कतर में नौकरी करता था। बाद में वह ट्रेवल एजेंट बन गया और अपने साथी अनवर अहमद अंसारी उर्फ साबरी के साथ मिलकर युवाओं को निशाना बनाने लगा। गिरोह अच्छी सैलरी वाली नौकरी का झांसा देकर युवाओं को कंबोडिया भेजता था। वहां पहुंचने पर पीड़ितों के पासपोर्ट छीन लिए जाते थे और उन्हें जबरन साइबर फ्रॉड में शामिल किया जाता था। विरोध करने पर उन्हें चीनी नागरिकों को साइबर स्लेवरी के लिए बेच दिया जाता था। दूसरे आरोपी जावेद ने पूछताछ में बताया कि उसका भाई साजिद कंबोडिया में रहकर इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा है। जावेद प्रति व्यक्ति 50 हजार रुपये कमीशन के लालच में युवाओं को फंसाता था। गिरोह का कथित मास्टरमाइंड अनवर अंसारी उर्फ साबरी फिलहाल फरार है और उसके कंबोडिया में सक्रिय होने की जानकारी मिली है। पुलिस ने दोनों गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ मानव तस्करी, ठगी और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। जांच एजेंसी अब फरार आरोपियों की तलाश कर रही है और उन सभी युवाओं की जानकारी जुटा रही है, जिन्हें इस गिरोह ने विदेश भेजा था।


