पीरियड के दौरान NEET छात्रा से रेप, डिप्रेशन में गई:ज्यादा ब्लड निकलने से जांच इफैक्टेड, 12 खरोंच के निशान; एक नंबर पर सबसे ज्यादा कॉल

पीरियड के दौरान NEET छात्रा से रेप, डिप्रेशन में गई:ज्यादा ब्लड निकलने से जांच इफैक्टेड, 12 खरोंच के निशान; एक नंबर पर सबसे ज्यादा कॉल

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत अब संदिग्ध नहीं रही। NEET की छात्रा के साथ पीरियड के दौरान सेक्सुअल असॉल्ट हुआ। यानी रिपोर्ट के मुताबिक रेप से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। इसके बाद वो डिप्रेशन में चली गई। सेक्सुअल असॉल्ट के दौरान छात्रा ने बचने का काफी प्रयास भी किया, जिससे उसके शरीर पर गहरी खरोंच आई हैं। शरीर पर 12 से ज्यादा खरोंच के निशान मिले हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि हुई है। लेकिन ब्लीडिंग होने के कारण जांच इफैक्टेड हो सकती है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, दो जगह इलाज, पुलिस की थ्योरी और घर वालों के आरोप, मेडिकल सूत्रों से बातचीत के आधार पर भास्कर ने पूरे मामले को इन्वेस्टिगेट किया..पढ़िए रिपोर्ट। सबसे पहले पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट: सेक्सुअल असॉल्ट की पुष्टि और 12 जगह शरीर पर स्क्रैच पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट इस केस का सबसे अहम डॉक्यूमेंट बन रहा है। रिपोर्ट में सामने आया है कि छात्रा के साथ सेक्सुअल असॉल्ट हुआ है, वारदात कुछ दिन पुरानी है। छात्रा के शरीर पर 12 अलग-अलग जगहों पर खरोंच पाई गई हैं। ये खरोंच हाथ, कंधे और शरीर के ऊपरी हिस्से पर हैं। मेडिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह के स्क्रैच तब बनते हैं, जब पीड़िता खुद को बचाने की कोशिश करती है। पुलिस ने साफ कहा है, छात्रा के साथ सेक्सुअल असॉल्ट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। पोस्टमॉर्टम के दौरान यह भी सामने आया कि शरीर पर बाहरी चोटों के अलावा अंदरूनी चोट के भी संकेत मिले हैं। इसी वजह से पोस्टमॉर्टम की पूरी वीडियोग्राफी कराई गई है। रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि छात्रा की मौत सिर्फ दवा के ओवरडोज से नहीं लगती। संघर्ष के दौरान कहीं गले पर चोट के निशान नहीं है। इसलिए पुलिस ने रिपोर्ट को सेकेंड ओपिनियन के लिए पटना AIIMS भेजने का फैसला किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया, ताकि किसी भी तरह की जांच पर सवाल न उठे। लेडी डॉक्टर की इन्वेस्टिगेशन: पीरियड की ब्लीडिंग से जांच इफैक्टेड हो सकती है छात्रा की जांच करने वाली एक लेडी डॉक्टर ने बताया, ‘छात्रा को जब यहां लाया गया तो उसके ब्लीडिंग हो रही थी। यह ब्लीडिंग पीरियड के दौरान होने जैसी प्रतीत होती है। छात्रा कि कंडीशन ज्यादा खराब थी। इसलिए जो चीजें दिख रहीं थीं, उसके मुताबिक प्राइवेट पार्ट्स में जख्म जैसा नहीं था’ डॉक्टर का कहना है, ‘अगर पीड़िता के पीरियड चल रहे हों तो सेक्सुअल असॉल्ट की मेडिकल जांच तकनीकी रूप से प्रभावित हो सकती है। खासतौर पर स्वैब टेस्ट में सही रिजल्ट मिलने में दिक्कत आती है। ब्लीडिंग की स्थिति में कई बार यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि चोट किस वजह से हुई पीरियड, जबरदस्ती या किसी अन्य कारण से।’ डॉक्टर ने यह भी स्पष्ट किया, ‘ब्लीडिंग का मतलब यह नहीं कि यौन शोषण नहीं हुआ। शरीर पर मौजूद खरोंच और अन्य चोटें इस बात का संकेत हैं कि कुछ गलत जरूर हुआ है। पहले अस्पताल के डॉक्टर का बयान: खरोंच और हेड इंजरी मिली छात्रा को जब पहली बार अस्पताल में भर्ती कराया गया, तब वह बेहोशी की हालत में थी। उस अस्पताल के एक डॉक्टर ने भास्कर को बताया कि, छात्रा के शरीर पर कई खरोंच और चोट के निशान थे। डॉक्टर के अनुसार, सिर पर भी चोट दिखाई दे रही थी। यह हेड इंजरी कैसे हुई, यह उस समय स्पष्ट नहीं था। डॉक्टर ने शुरुआती जांच में ही आशंका जता दी थी कि मामला सिर्फ दवा खाने का नहीं है। डॉक्टर ने यह भी कहा कि, छात्रा की हालत इतनी खराब थी कि वह ठीक से बोल भी नहीं पा रही थी। शरीर में मूवमेंट बेहद कम था। पुलिस की दो थ्योरी: थ्योरी–1: डिप्रेशन और नींद की दवा पुलिस ने पहले कहा कि छात्रा डिप्रेशन में थी। मोबाइल की सर्च हिस्ट्री में सुसाइड और नींद की दवा से जुड़े शब्द मिले हैं। यूरीन रिपोर्ट में ओवरडोज का जिक्र किया गया है। जांच रिपोर्ट्स और गायनेकोलॉजिस्ट के बयान के आधार पर पुलिस ने शुरू में यौन शोषण से इनकार किया। पुलिस ने साक्ष्य के तौर पर शुरू में जांच करने वाले डॉक्टर्स के स्टेटमेंट्स भी रिकॉर्ड किए हैं। थ्योरी–2: पोस्टमॉर्टम के बाद बदला बयान 24 घंटे बाद पुलिस ने माना कि सेक्सुअल असॉल्ट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद वार्डन मनीष रंजन को गिरफ्तार किया। ताकि हॉस्टल बिल्डिंग के अंदर साक्ष्य के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं हो। निजी अस्पताल के डॉक्टर्स और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में अंतर: पुलिस ने जहां जहां छात्रा का इलाज चला। वहां डॉक्टर्स का ओपिनियन रिकॉर्ड किया था। इसमें सबने पहले सेक्सुअल असॉल्ट से इनकार किया था। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सेक्सुअल असॉल्ट की बात सामने आई है। ऐसे में पुलिस की ओर से रिपोर्ट AIIMS भेजी गई है। ताकि स्पष्ट कनक्लूजन निकाला जा सके। अब पिता ने जो आरोप लगाए: आत्महत्या की कहानी झूठी है छात्रा के पिता का कहना है, ‘मेरी बेटी की मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि एक हत्या है। हॉस्टल प्रबंधन और वहां मौजूद कुछ लोग इस पूरे मामले में शुरू से झूठ बोल रहे हैं और सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। 6 जनवरी की शाम मुझे सूचना दी गई कि आपकी बेटी हॉस्टल के कमरे में बेहोश पड़ी है। यह सूचना भी सीधे हॉस्टल से नहीं, बल्कि किसी दूसरे व्यक्ति के माध्यम से मिली। जब मैंने हॉस्टल प्रबंधन से संपर्क किया, तो कहा गया कि बच्ची की तबीयत अचानक खराब हो गई है। ‘बेटी को देखा तो वो बोलने की हालत में नहीं थी’ मैं तुरंत पटना पहुंचा। बेटी को पहले एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत गंभीर थी। जब मैंने अपनी बेटी को देखा तो वह बोलने की हालत में नहीं थी। शरीर में किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं हो रही थी। उसी समय मुझे शक हो गया था कि मामला सिर्फ तबीयत खराब होने का नहीं है। मेरी बेटी के साथ कुछ गलत हुआ है।’ पिता ने कहा, ‘हॉस्टल वालों की यह बात पूरी तरह झूठ है कि बेटी ने नींद की गोली खाई थी। अगर ऐसा होता तो हॉस्टल प्रबंधन तुरंत पुलिस को सूचना देता और परिवार को पूरी जानकारी देता। लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया। हमलोगों के पटना पहुंचने से पहले हॉस्टल के CCTV फुटेज डिलीट कर दिए गए, ताकि यह पता न चल सके कि आखिरी बार मेरी बेटी के कमरे में कौन गया था या किसकी आवाजाही हुई थी।’ पिता ने बताया, ‘मैंने अपनी बेटी के शरीर को खुद देखा। शरीर पर कई जगह चोट और खरोंच के निशान थे। कोई भी पिता यह देखकर समझ सकता है कि उसकी बेटी के साथ कुछ गलत हुआ है। हॉस्टल प्रबंधन ने खुद को बचाने के लिए बेटी के कमरे में दवाइयां रख दीं, ताकि बाद में यह कहा जा सके कि उसने खुद दवा खाई थी। हॉस्टल प्रबंधक ने झूठी कहानी बनाई। मेरी बेटी के पैसे और सामान के साथ भी छेड़छाड़ की गई। यह सब तब किया गया, जब वह बेहोशी की हालत में थी।’ घटना के बाद प्रदर्शन की कुछ तस्वीरें… पुलिस की भूमिका पर पिता के कई सवाल पिता ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘पुलिस ने पहले ही बयान दे दिया कि कोई यौन शोषण नहीं हुआ, जबकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बाद में आई। पुलिस ने बिना पूरी जांच के जल्दबाजी में निष्कर्ष निकाल दिए। मामला रेप के बाद हत्या का है और इसमें एक से ज्यादा लोग शामिल हो सकते हैं। मैं बस यही चाहता हूं कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से हो और किसी भी दबाव में आकर सच्चाई को दबाया न जाए। मुझे किसी का मुआवजा या समझौता नहीं चाहिए। मुझे सिर्फ अपनी बेटी के लिए न्याय चाहिए।’ पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत अब संदिग्ध नहीं रही। NEET की छात्रा के साथ पीरियड के दौरान सेक्सुअल असॉल्ट हुआ। यानी रिपोर्ट के मुताबिक रेप से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। इसके बाद वो डिप्रेशन में चली गई। सेक्सुअल असॉल्ट के दौरान छात्रा ने बचने का काफी प्रयास भी किया, जिससे उसके शरीर पर गहरी खरोंच आई हैं। शरीर पर 12 से ज्यादा खरोंच के निशान मिले हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि हुई है। लेकिन ब्लीडिंग होने के कारण जांच इफैक्टेड हो सकती है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, दो जगह इलाज, पुलिस की थ्योरी और घर वालों के आरोप, मेडिकल सूत्रों से बातचीत के आधार पर भास्कर ने पूरे मामले को इन्वेस्टिगेट किया..पढ़िए रिपोर्ट। सबसे पहले पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट: सेक्सुअल असॉल्ट की पुष्टि और 12 जगह शरीर पर स्क्रैच पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट इस केस का सबसे अहम डॉक्यूमेंट बन रहा है। रिपोर्ट में सामने आया है कि छात्रा के साथ सेक्सुअल असॉल्ट हुआ है, वारदात कुछ दिन पुरानी है। छात्रा के शरीर पर 12 अलग-अलग जगहों पर खरोंच पाई गई हैं। ये खरोंच हाथ, कंधे और शरीर के ऊपरी हिस्से पर हैं। मेडिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह के स्क्रैच तब बनते हैं, जब पीड़िता खुद को बचाने की कोशिश करती है। पुलिस ने साफ कहा है, छात्रा के साथ सेक्सुअल असॉल्ट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। पोस्टमॉर्टम के दौरान यह भी सामने आया कि शरीर पर बाहरी चोटों के अलावा अंदरूनी चोट के भी संकेत मिले हैं। इसी वजह से पोस्टमॉर्टम की पूरी वीडियोग्राफी कराई गई है। रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि छात्रा की मौत सिर्फ दवा के ओवरडोज से नहीं लगती। संघर्ष के दौरान कहीं गले पर चोट के निशान नहीं है। इसलिए पुलिस ने रिपोर्ट को सेकेंड ओपिनियन के लिए पटना AIIMS भेजने का फैसला किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया, ताकि किसी भी तरह की जांच पर सवाल न उठे। लेडी डॉक्टर की इन्वेस्टिगेशन: पीरियड की ब्लीडिंग से जांच इफैक्टेड हो सकती है छात्रा की जांच करने वाली एक लेडी डॉक्टर ने बताया, ‘छात्रा को जब यहां लाया गया तो उसके ब्लीडिंग हो रही थी। यह ब्लीडिंग पीरियड के दौरान होने जैसी प्रतीत होती है। छात्रा कि कंडीशन ज्यादा खराब थी। इसलिए जो चीजें दिख रहीं थीं, उसके मुताबिक प्राइवेट पार्ट्स में जख्म जैसा नहीं था’ डॉक्टर का कहना है, ‘अगर पीड़िता के पीरियड चल रहे हों तो सेक्सुअल असॉल्ट की मेडिकल जांच तकनीकी रूप से प्रभावित हो सकती है। खासतौर पर स्वैब टेस्ट में सही रिजल्ट मिलने में दिक्कत आती है। ब्लीडिंग की स्थिति में कई बार यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि चोट किस वजह से हुई पीरियड, जबरदस्ती या किसी अन्य कारण से।’ डॉक्टर ने यह भी स्पष्ट किया, ‘ब्लीडिंग का मतलब यह नहीं कि यौन शोषण नहीं हुआ। शरीर पर मौजूद खरोंच और अन्य चोटें इस बात का संकेत हैं कि कुछ गलत जरूर हुआ है। पहले अस्पताल के डॉक्टर का बयान: खरोंच और हेड इंजरी मिली छात्रा को जब पहली बार अस्पताल में भर्ती कराया गया, तब वह बेहोशी की हालत में थी। उस अस्पताल के एक डॉक्टर ने भास्कर को बताया कि, छात्रा के शरीर पर कई खरोंच और चोट के निशान थे। डॉक्टर के अनुसार, सिर पर भी चोट दिखाई दे रही थी। यह हेड इंजरी कैसे हुई, यह उस समय स्पष्ट नहीं था। डॉक्टर ने शुरुआती जांच में ही आशंका जता दी थी कि मामला सिर्फ दवा खाने का नहीं है। डॉक्टर ने यह भी कहा कि, छात्रा की हालत इतनी खराब थी कि वह ठीक से बोल भी नहीं पा रही थी। शरीर में मूवमेंट बेहद कम था। पुलिस की दो थ्योरी: थ्योरी–1: डिप्रेशन और नींद की दवा पुलिस ने पहले कहा कि छात्रा डिप्रेशन में थी। मोबाइल की सर्च हिस्ट्री में सुसाइड और नींद की दवा से जुड़े शब्द मिले हैं। यूरीन रिपोर्ट में ओवरडोज का जिक्र किया गया है। जांच रिपोर्ट्स और गायनेकोलॉजिस्ट के बयान के आधार पर पुलिस ने शुरू में यौन शोषण से इनकार किया। पुलिस ने साक्ष्य के तौर पर शुरू में जांच करने वाले डॉक्टर्स के स्टेटमेंट्स भी रिकॉर्ड किए हैं। थ्योरी–2: पोस्टमॉर्टम के बाद बदला बयान 24 घंटे बाद पुलिस ने माना कि सेक्सुअल असॉल्ट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद वार्डन मनीष रंजन को गिरफ्तार किया। ताकि हॉस्टल बिल्डिंग के अंदर साक्ष्य के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं हो। निजी अस्पताल के डॉक्टर्स और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में अंतर: पुलिस ने जहां जहां छात्रा का इलाज चला। वहां डॉक्टर्स का ओपिनियन रिकॉर्ड किया था। इसमें सबने पहले सेक्सुअल असॉल्ट से इनकार किया था। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सेक्सुअल असॉल्ट की बात सामने आई है। ऐसे में पुलिस की ओर से रिपोर्ट AIIMS भेजी गई है। ताकि स्पष्ट कनक्लूजन निकाला जा सके। अब पिता ने जो आरोप लगाए: आत्महत्या की कहानी झूठी है छात्रा के पिता का कहना है, ‘मेरी बेटी की मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि एक हत्या है। हॉस्टल प्रबंधन और वहां मौजूद कुछ लोग इस पूरे मामले में शुरू से झूठ बोल रहे हैं और सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। 6 जनवरी की शाम मुझे सूचना दी गई कि आपकी बेटी हॉस्टल के कमरे में बेहोश पड़ी है। यह सूचना भी सीधे हॉस्टल से नहीं, बल्कि किसी दूसरे व्यक्ति के माध्यम से मिली। जब मैंने हॉस्टल प्रबंधन से संपर्क किया, तो कहा गया कि बच्ची की तबीयत अचानक खराब हो गई है। ‘बेटी को देखा तो वो बोलने की हालत में नहीं थी’ मैं तुरंत पटना पहुंचा। बेटी को पहले एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत गंभीर थी। जब मैंने अपनी बेटी को देखा तो वह बोलने की हालत में नहीं थी। शरीर में किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं हो रही थी। उसी समय मुझे शक हो गया था कि मामला सिर्फ तबीयत खराब होने का नहीं है। मेरी बेटी के साथ कुछ गलत हुआ है।’ पिता ने कहा, ‘हॉस्टल वालों की यह बात पूरी तरह झूठ है कि बेटी ने नींद की गोली खाई थी। अगर ऐसा होता तो हॉस्टल प्रबंधन तुरंत पुलिस को सूचना देता और परिवार को पूरी जानकारी देता। लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया। हमलोगों के पटना पहुंचने से पहले हॉस्टल के CCTV फुटेज डिलीट कर दिए गए, ताकि यह पता न चल सके कि आखिरी बार मेरी बेटी के कमरे में कौन गया था या किसकी आवाजाही हुई थी।’ पिता ने बताया, ‘मैंने अपनी बेटी के शरीर को खुद देखा। शरीर पर कई जगह चोट और खरोंच के निशान थे। कोई भी पिता यह देखकर समझ सकता है कि उसकी बेटी के साथ कुछ गलत हुआ है। हॉस्टल प्रबंधन ने खुद को बचाने के लिए बेटी के कमरे में दवाइयां रख दीं, ताकि बाद में यह कहा जा सके कि उसने खुद दवा खाई थी। हॉस्टल प्रबंधक ने झूठी कहानी बनाई। मेरी बेटी के पैसे और सामान के साथ भी छेड़छाड़ की गई। यह सब तब किया गया, जब वह बेहोशी की हालत में थी।’ घटना के बाद प्रदर्शन की कुछ तस्वीरें… पुलिस की भूमिका पर पिता के कई सवाल पिता ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘पुलिस ने पहले ही बयान दे दिया कि कोई यौन शोषण नहीं हुआ, जबकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बाद में आई। पुलिस ने बिना पूरी जांच के जल्दबाजी में निष्कर्ष निकाल दिए। मामला रेप के बाद हत्या का है और इसमें एक से ज्यादा लोग शामिल हो सकते हैं। मैं बस यही चाहता हूं कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से हो और किसी भी दबाव में आकर सच्चाई को दबाया न जाए। मुझे किसी का मुआवजा या समझौता नहीं चाहिए। मुझे सिर्फ अपनी बेटी के लिए न्याय चाहिए।’  

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