किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण, सिंचाई सुविधा और विपणन व्यवस्था का और अधिक सहयोग मिले, तो जिले को बागवानी के क्षेत्र में एक नई पहचान मिल सकती है। कुल मिलाकर, जिले में फल-फूल और सब्जियों की बढ़ती खेती किसानों के भविष्य के लिए एक शुभ संकेत है और यह जिले की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी। भास्कर न्यूज | चतरा जिले में कृषि के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। परंपरागत खेती के साथ-साथ अब किसान बागवानी और व्यावसायिक फसलों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। इससे न केवल खेती में विविधता आई है, बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं। जिले में वर्तमान समय में लीची, केला, आम, अमरुद, स्ट्रॉबेरी, बेल, कटहल, मिर्च और गेंदा फूल की खेती की जा रही है। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में लीची, केला, आम और अमरुद की खेती प्रत्येक 4-4 हेक्टेयर क्षेत्र में हो रही है। इसके अलावा बेल, कटहल और गेंदा फूल की खेती भी 4-4 हेक्टेयर में की जा रही है। खास बात यह है कि जिले में स्ट्रॉबेरी जैसी उन्नत और अधिक लाभ देने वाली फसल की खेती 9 हेक्टेयर क्षेत्र में की जा रही है, जो किसानों के लिए एक नई पहल मानी जा रही है। वहीं मिर्च की खेती जिले में सबसे अधिक 100 हेक्टेयर क्षेत्र में हो रही है, जिससे किसानों को बाजार में बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है। फल, फूल और सब्जी उत्पादन से किसानों को पारंपरिक फसलों की तुलना में कम समय में अधिक मुनाफा मिलने की संभावना रहती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। स्थानीय बाजार के साथ-साथ आसपास के जिलों में भी इन उत्पादों की मांग बनी रहती है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। जिल कृषि पदाधिकारी गौतम कुमार ने बताया कि जिला कृषि पदाधिकारी गौतम कुमार ने बताया कि जिले में किसान पारंपरिक खेती से हटकर बागवानी, सब्जी और फूलों की खेती अपना रहे हैं, जिससे कम समय में अधिक मुनाफा मिलने की संभावना है। किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण, सिंचाई सुविधा और विपणन व्यवस्था का और अधिक सहयोग मिले, तो जिले को बागवानी के क्षेत्र में एक नई पहचान मिल सकती है। कुल मिलाकर, जिले में फल-फूल और सब्जियों की बढ़ती खेती किसानों के भविष्य के लिए एक शुभ संकेत है और यह जिले की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी। भास्कर न्यूज | चतरा जिले में कृषि के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। परंपरागत खेती के साथ-साथ अब किसान बागवानी और व्यावसायिक फसलों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। इससे न केवल खेती में विविधता आई है, बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं। जिले में वर्तमान समय में लीची, केला, आम, अमरुद, स्ट्रॉबेरी, बेल, कटहल, मिर्च और गेंदा फूल की खेती की जा रही है। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में लीची, केला, आम और अमरुद की खेती प्रत्येक 4-4 हेक्टेयर क्षेत्र में हो रही है। इसके अलावा बेल, कटहल और गेंदा फूल की खेती भी 4-4 हेक्टेयर में की जा रही है। खास बात यह है कि जिले में स्ट्रॉबेरी जैसी उन्नत और अधिक लाभ देने वाली फसल की खेती 9 हेक्टेयर क्षेत्र में की जा रही है, जो किसानों के लिए एक नई पहल मानी जा रही है। वहीं मिर्च की खेती जिले में सबसे अधिक 100 हेक्टेयर क्षेत्र में हो रही है, जिससे किसानों को बाजार में बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है। फल, फूल और सब्जी उत्पादन से किसानों को पारंपरिक फसलों की तुलना में कम समय में अधिक मुनाफा मिलने की संभावना रहती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। स्थानीय बाजार के साथ-साथ आसपास के जिलों में भी इन उत्पादों की मांग बनी रहती है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। जिल कृषि पदाधिकारी गौतम कुमार ने बताया कि जिला कृषि पदाधिकारी गौतम कुमार ने बताया कि जिले में किसान पारंपरिक खेती से हटकर बागवानी, सब्जी और फूलों की खेती अपना रहे हैं, जिससे कम समय में अधिक मुनाफा मिलने की संभावना है।


