सहरसा न्यायालय ने अवैध हथियार रखने के एक मामले में दो आरोपियों को तीन-तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी हसन तवरेज ने गुरुवार, 15 जनवरी को यह फैसला सुनाया। यह मामला 9 जनवरी 2025 का है, जिसे चिडैया थाना में मामला दर्ज किया गया था। इसमें आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-बी) ए, 26 और 35 के तहत आरोप लगाए गए थे। कारावास के पांच हजार रुपये का अर्थदंड न्यायालय ने आरोपी अबरेन कुमार उर्फ अबो कुमार और ऋषि कुमार को दोषी पाया। दोनों पिपरा, वार्ड संख्या-11, थाना सलखुआ, जिला सहरसा के निवासी हैं। कारावास के साथ-साथ प्रत्येक दोषी पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अर्थदंड का भुगतान न करने की स्थिति में दोषियों को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अवैध हथियार रखना कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा इस मामले को त्वरित विचारण के लिए चुना गया था और यह सहरसा पुलिस अधीक्षक हिमांशु द्वारा चयनित टीएमएस पोर्टल पर भी अपलोड था। अभियोजन पक्ष की ओर से अभियोजन पदाधिकारी विनय कुमार ने मजबूती से पक्ष रखा। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि अवैध हथियार रखना समाज और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है, ऐसे मामलों में सख्ती आवश्यक है। इस फैसले को सहरसा पुलिस की प्रभावी कार्रवाई की सफलता माना जा रहा है, जिससे जिले में अपराध और अवैध हथियारों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। सहरसा न्यायालय ने अवैध हथियार रखने के एक मामले में दो आरोपियों को तीन-तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी हसन तवरेज ने गुरुवार, 15 जनवरी को यह फैसला सुनाया। यह मामला 9 जनवरी 2025 का है, जिसे चिडैया थाना में मामला दर्ज किया गया था। इसमें आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-बी) ए, 26 और 35 के तहत आरोप लगाए गए थे। कारावास के पांच हजार रुपये का अर्थदंड न्यायालय ने आरोपी अबरेन कुमार उर्फ अबो कुमार और ऋषि कुमार को दोषी पाया। दोनों पिपरा, वार्ड संख्या-11, थाना सलखुआ, जिला सहरसा के निवासी हैं। कारावास के साथ-साथ प्रत्येक दोषी पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अर्थदंड का भुगतान न करने की स्थिति में दोषियों को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अवैध हथियार रखना कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा इस मामले को त्वरित विचारण के लिए चुना गया था और यह सहरसा पुलिस अधीक्षक हिमांशु द्वारा चयनित टीएमएस पोर्टल पर भी अपलोड था। अभियोजन पक्ष की ओर से अभियोजन पदाधिकारी विनय कुमार ने मजबूती से पक्ष रखा। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि अवैध हथियार रखना समाज और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है, ऐसे मामलों में सख्ती आवश्यक है। इस फैसले को सहरसा पुलिस की प्रभावी कार्रवाई की सफलता माना जा रहा है, जिससे जिले में अपराध और अवैध हथियारों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।


